जम्मू में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा घेरा मजबूत
21 संवेदनशील स्थानों पर सीआरपीएफ संभालेगी मोर्चा, जंगलों में ऑपरेशन के लिए CoBRA की विशेष टीमें होंगी साथ
जम्मू, 8 सितंबर। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ अभियान को और मजबूत करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। कठुआ और उधमपुर जिलों के 21 संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अब सीआरपीएफ को सौंपने की तैयारी है। इन इलाकों में घने जंगल और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रखना सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बना हुआ है।
सुरक्षा एजेंसियों की योजना के तहत इन स्थानों पर सीआरपीएफ की तैनाती के साथ उसकी विशेष जंगल युद्धक इकाई CoBRA (कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन) भी अभियान में सहयोग करेगी। इसका उद्देश्य जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में आतंकियों की तलाश और उनके खिलाफ लक्षित अभियान की क्षमता बढ़ाना है।
रिपोर्टों के मुताबिक 21 स्थानों में 15 कठुआ और छह उधमपुर जिले में हैं। यहां सीआरपीएफ की कंपनियां तैनात की जाएंगी। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार करीब 21 कंपनियों में लगभग 2,100 जवान तैनात किए जाने की योजना है। इससे सेना को नियमित आतंकवाद रोधी जिम्मेदारियों से कुछ राहत मिलेगी और वह नियंत्रण रेखा तथा अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेगी।
सुरक्षा व्यवस्था में यह बदलाव लंबे समय से चल रही उस योजना का हिस्सा है, जिसके तहत जम्मू के अंदरूनी इलाकों में आतंकवाद रोधी जिम्मेदारियों में सीआरपीएफ की भूमिका बढ़ाई जानी है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि जम्मू-कश्मीर के अंदरूनी इलाकों से सेना पूरी तरह हट जाएगी। राष्ट्रीय राइफल्स समेत सेना की मौजूदगी बनी रहेगी, जबकि सीआरपीएफ को चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों में बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी।
घने जंगलों में छिपकर गतिविधियां चलाने वाले आतंकियों से निपटने के लिए CoBRA की विशेषज्ञता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीआरपीएफ की जम्मू-कश्मीर जोन को पहले से ही आतंकवाद रोधी अभियानों की जिम्मेदारी हासिल है।


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