निर्धारित कर्म को निष्ठा से करना ही श्रीकृष्ण की सच्ची भक्ति : डॉ. प्रशान्त शर्मा

सीसीएसयू के संस्कृत विभाग में जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम, गीत-भजन और वक्तव्यों से हुआ योगेश्वर श्रीकृष्ण का स्तवन

मेरठ,। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर स्थित संस्कृत प्राच्यभाषा विभाग में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभाग के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, प्राध्यापकों तथा विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से उपस्थित शिक्षकों ने गीत, भजन, स्तोत्र और वक्तव्यों के माध्यम से योगेश्वर श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय परंपरा के अनुसार मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद डॉ. नरेन्द्र कुमार ने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का स्वागत किया। भौतिकी विभाग से डॉ. विवेक नौटियाल, शिक्षा विभाग से डॉ. जितेन्द्र गोयल, समाजशास्त्र विभाग से डॉ. देवकीनन्दन भट्ट तथा सांख्यिकी विभाग से डॉ. शुभम् सैनी बतौर अतिथि उपस्थित रहे।

संस्कृत विभाग की छात्राओं रिया, शिवानी, हिमानी और तनुजा जैन सहित डॉ. ओमपाल एवं डॉ. संतोष कुमारी ने श्रीकृष्ण से संबंधित गीत, भजन एवं स्तोत्र प्रस्तुत किए। प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को भक्तिमय वातावरण से भर दिया।

श्रीकृष्ण के चरित्र को समाज तक पहुंचाने का आह्वान

सहविभागाध्यक्ष डॉ. प्रशान्त शर्मा ने संस्कृत के विद्यार्थियों एवं अध्येताओं का आह्वान किया कि वे महाभारतकार महर्षि वेदव्यास द्वारा वर्णित श्रीकृष्ण के चरित्र का गहन अध्ययन करें और समाज में उनके सत्य स्वरूप को प्रचारित करें। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का गुण, कर्म, स्वभाव और चरित्र आप्त पुरुषों के समान रहा है। उन्होंने जीवनपर्यंत अधर्म का आचरण नहीं किया और योगेश्वर, कर्मयोगी, कुशल राजनीतिज्ञ तथा समाज के पथप्रदर्शक के रूप में मानवता का मार्गदर्शन किया।

डॉ. शर्मा ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार मनुष्य अपने निर्धारित कर्म को करते हुए भी श्रीकृष्ण की भक्ति के माध्यम से सिद्धि प्राप्त कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों और जिज्ञासुओं को गीता के मर्म को समझने के लिए पंडित बुद्धदेव विद्यालंकार द्वारा रचित ‘समर्पण भाष्य’ का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी सन्नी ने किया। अंत में ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर श्री तुषार गोयल, डॉ. आभा, श्री साहिल तरीका सहित विभाग के शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

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