रेवड़ी-गजक कारोबार को मिलेगा सरकारी सहारा, 50 लाख तक लोन और सब्सिडी
‘एक जिला-एक व्यंजन’ योजना से पारंपरिक कारोबार को आधुनिक उद्योग में बदलने की पहल
मेरठ। मेरठ की मशहूर रेवड़ी-गजक को बड़े कारोबार का रूप देने के लिए प्रदेश सरकार ने वित्तीय सहायता की पहल की है। ‘एक जिला-एक व्यंजन’ वित्तपोषण योजना के तहत रेवड़ी-गजक कारोबारी फैक्टरी में आधुनिक मशीनें लगाने या नया सेटअप तैयार करने के लिए 50 लाख रुपये तक का ऋण और सब्सिडी प्राप्त कर सकेंगे।
सीडीओ नूपुर गोयल के अनुसार, योजना के जरिए इस पारंपरिक कारोबार को छोटे स्तर की दुकान या पारिवारिक व्यवसाय से निकालकर आधुनिक उद्योग का स्वरूप दिया जा सकता है। जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र के माध्यम से अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।
योजना में परियोजना लागत के अनुसार अलग-अलग सब्सिडी का प्रावधान है। 25 लाख रुपये तक की परियोजना पर लागत का 25 प्रतिशत, अधिकतम 6.25 लाख रुपये, जबकि 25 से 50 लाख रुपये तक की परियोजना पर 10 प्रतिशत, अधिकतम 6.25 लाख रुपये अनुदान मिलेगा। 50 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक की परियोजना पर 20 प्रतिशत या अधिकतम 10 लाख और 1.5 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना पर 10 प्रतिशत या अधिकतम 50 लाख रुपये तक सब्सिडी का प्रावधान है।
उपायुक्त उद्योग अमरेश कुमार पांडे के अनुसार, सामान्य श्रेणी के लाभार्थी को परियोजना लागत का 10 प्रतिशत अंशदान करना होगा। एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, महिला और दिव्यांग लाभार्थियों के लिए अंशदान पांच प्रतिशत रखा गया है। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए और किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता नहीं है।
मेरठ में रेवड़ी-गजक की 35 पंजीकृत फर्म हैं और इससे सालाना करीब 60 से 70 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। उत्पाद की देश-विदेश में मांग है और मेरठ की रेवड़ी-गजक को जीआई टैग भी हासिल है।
रेवड़ी व्यापारी संदीप गोयल ने योजना को छोटे कारोबारियों के लिए उपयोगी बताया। वहीं मेरठ रेवड़ी गजक व्यापारी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष वरुण गुप्ता ने कहा कि इससे छोटे व्यापारियों को कारोबार बढ़ाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने लोन प्रक्रिया को और सरल बनाने की मांग भी की।


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