खेत की खुदाई में निकला वाइकिंग युग का खजाना, एक के बाद एक मिले करीब 3,000 चांदी के सिक्के
नॉर्वे के रेना गांव के पास खेत में मेटल डिटेक्टर से शुरू हुई खोज बनी ऐतिहासिक खोज, इंग्लैंड, जर्मनी, डेनमार्क और नॉर्वे के सिक्के मिले
नॉर्वे। खेत में सामान्य तौर पर की जा रही खोज ने अचानक इतिहास का एक बेहद महत्वपूर्ण अध्याय सामने ला दिया। पूर्वी नॉर्वे के रेना गांव के पास एक खेत में पुरातत्वविदों को वाइकिंग युग का विशाल सिक्का खजाना मिला है। अब तक यहां करीब 3,000 चांदी के सिक्के मिलने की बात सामने आई है। विशेषज्ञ इसे नॉर्वे में मिला अब तक का सबसे बड़ा वाइकिंग सिक्का खजाना बता रहे हैं।
खास बात यह है कि इस स्थान पर खुदाई और जांच अभी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में विशेषज्ञों को यहां से और भी ऐतिहासिक वस्तुएं मिलने की उम्मीद है।
19 सिक्कों से शुरू हुई थी खोज
इस असाधारण खोज की शुरुआत 10 अप्रैल 2026 को हुई। दो मेटल डिटेक्टर से खोज करने वाले लोगों को खेत में जमीन के भीतर से 19 सिक्के मिले। उन्होंने इसकी सूचना तत्काल स्थानीय पुरातत्व विशेषज्ञों को दी।
अगले दिन विशेषज्ञ मौके पर पहुंचे और व्यवस्थित तरीके से जांच शुरू की। शुरुआत में उन्हें लगा कि कुछ और सिक्के मिल सकते हैं, लेकिन मेटल डिटेक्टर लगातार संकेत देता रहा। जैसे-जैसे खुदाई आगे बढ़ी, सिक्कों की संख्या बढ़ती चली गई और आखिरकार यह एक बड़े खजाने के रूप में सामने आया।
पुरातत्वविद् मे-टोवे स्मिसेथ के मुताबिक, इतनी बड़ी संख्या में सिक्कों का एक ही स्थान से मिलना बेहद असाधारण है।
चार देशों से जुड़े सिक्के
खजाने की सबसे खास बात इसमें मिले सिक्कों की विविधता है। विशेषज्ञों के अनुसार इनमें इंग्लैंड, जर्मनी, डेनमार्क और नॉर्वे में बनाए गए सिक्के शामिल हैं।
इनमें इंग्लैंड के राजा एथलरेड द्वितीय और क्नूट द ग्रेट के शासनकाल के सिक्के बताए जा रहे हैं। इसके अलावा पवित्र रोमन साम्राज्य के सम्राट ओटो तृतीय के समय के सिक्के भी मिले हैं। कुछ सिक्कों को नॉर्वे के राजा हैराल्ड हार्डराडा के शासनकाल से जोड़ा गया है।
इन सिक्कों के आधार पर विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह खजाना लगभग 1050 ईस्वी के आसपास जमीन में छिपाया गया होगा।
सिर्फ लूट की दौलत नहीं, कमाई का भी हो सकता है सुराग
इतिहासकारों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में चांदी किसी एक स्थान पर कैसे जमा हुई और इसे जमीन के अंदर क्यों छिपाया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह जरूरी नहीं कि यह संपत्ति केवल लूट या युद्ध से हासिल की गई हो। इसके पीछे उस दौर के स्थानीय आर्थिक कारोबार की भी भूमिका हो सकती है।
बताया जाता है कि उस समय इस क्षेत्र के दलदली इलाकों से लौह अयस्क निकाला जाता था। इससे तैयार किया गया लोहा यूरोप के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाया जाता था। लगभग 900 से 1200 ईस्वी के बीच इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लौह उत्पादन होने के प्रमाण मिलते हैं।
सिक्कों के साथ मिला हैक्ससिल्वर भी
पुरातत्वविदों को सिक्कों के अलावा हैक्ससिल्वर भी मिला है। यह चांदी के गहनों और अन्य वस्तुओं के काटे गए टुकड़े होते थे, जिनका मध्यकालीन यूरोप में लेन-देन के लिए मुद्रा की तरह इस्तेमाल किया जाता था।
इससे संकेत मिलता है कि उस दौर में संपत्ति और व्यापार केवल सिक्कों तक सीमित नहीं थे। चांदी के टुकड़े भी आर्थिक लेन-देन का महत्वपूर्ण माध्यम थे।
अभी जारी है पुरातात्विक जांच
करीब 3,000 चांदी के सिक्कों की यह खोज वाइकिंग युग के आर्थिक और व्यापारिक इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञ अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि खजाना किसने जमा किया था, इसे जमीन में क्यों छिपाया गया और उस समय इस क्षेत्र का यूरोप के अन्य हिस्सों से किस तरह का व्यापारिक संबंध था।
चूंकि स्थल की जांच अभी जारी है, इसलिए आने वाले दिनों में इस खजाने से जुड़ी और भी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारियां सामने आने की संभावना है।


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