यूपी के 20 जिलों में लंपी का प्रकोप, सहारनपुर में 8 पशुओं की मौत
20 जिलों में 8562 पशु संक्रमित, 7180 स्वस्थ; सीमावर्ती जिलों में विशेष टीकाकरण और निगरानी तेज
मेरठ/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पशुओं में फैलने वाली संक्रामक बीमारी लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) अब नियंत्रण में बताई जा रही है। इसके बावजूद प्रदेश के प्रभावित 20 जिलों की राज्य मुख्यालय से रोजाना समीक्षा की जा रही है। पशुपालन विभाग ने संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रभावित क्षेत्रों में विशेष टीकाकरण अभियान चलाया है। सहारनपुर में सबसे अधिक 5391 पशु बीमारी की चपेट में आए हैं, जिनमें आठ की मौत की पुष्टि हुई है।
प्रदेश रोग नियंत्रण निदेशक डॉ. संगीता तिवारी के अनुसार, जिन जिलों में शुरुआती दौर में संक्रमण के मामले सामने आए थे, वहां अब नए केस लगभग खत्म होने की स्थिति में हैं। सीमावर्ती जिलों से संक्रमित पशुओं के प्रवेश को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई गई है। उन्होंने बताया कि मृत पशुओं में अधिकतर वे थे, जिनका समय पर इलाज नहीं हो सका या जो निराश्रित थे। उन्होंने पशुपालकों से अफवाहों से बचने की अपील करते हुए कहा कि लंपी बीमारी पशुओं से मनुष्यों में नहीं फैलती।पशुपालन विभाग के अनुसार प्रदेश में अब तक करीब 8562 पशु संक्रमित मिले हैं, जिनमें 7180 स्वस्थ हो चुके हैं और करीब 1368 पशुओं का उपचार चल रहा है। प्रभावित जिलों में करीब 50 लाख टीके भेजे गए हैं। संबंधित गांवों में विभागीय टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।सहारनपुर के बाद शामली में 1212, मुजफ्फरनगर में 364, मेरठ में 156, मथुरा में 206, फिरोजाबाद में 325, बिजनौर में 206, बागपत में 230 और हापुड़ में 163 पशु संक्रमित मिले हैं। आगरा, अमरोहा, बुलंदशहर, इटावा, हाथरस, चित्रकूट, झांसी, बहराइच और कानपुर नगर में भी छिटपुट मामले सामने आए हैं। सहारनपुर में आठ, गाजियाबाद में तीन, मथुरा में दो और बागपत में एक पशु की मौत हुई है।हरियाणा से सटे पश्चिमी यूपी के जिलों में संक्रमण अधिक पाया गया है। विभाग ने सीमावर्ती क्षेत्रों में करीब 10 किलोमीटर की परिधि में टीकाकरण की बाड़बंदी की है। पूर्वांचल और बुंदेलखंड के सीमावर्ती जिलों में भी निगरानी बढ़ाई गई है। लंपी के प्रमुख लक्षणों में पशु के शरीर पर गांठें पड़ना, तेज बुखार और दूध उत्पादन में कमी शामिल है। विभाग ने पशुपालकों से सभी पशुओं का अनिवार्य रूप से टीकाकरण कराने की अपील की है।


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