बिक्री घटी तो खुला नकली सिगरेट का खेल, हस्तिनापुर में 10 करोड़ का माल बरामद

तीन माह की जांच के बाद खुला नकली सिगरेट का राज

 बंद इमारत में चल रहा था नकली सिगरेट का कारोबार

कंटेनरों की आवाजाही से खुला राज

रोज तैयार होती थी 40-50 लाख की नकली सिगरेट

कंबोडिया से कच्चा माल, राजस्थान से तंबाकू

मेरठ।हस्तिनापुर क्षेत्र में नकली गोल्ड फ्लैक सिगरेट बनाने वाली फैक्ट्री का पुलिस और आईटीसी लिमिटेड की संयुक्त टीम ने भंडाफोड़ किया है। दूधली खादर स्थित एक इमारत में हुई छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकली सिगरेट, तंबाकू, पैकेजिंग सामग्री और सिगरेट बनाने की आधुनिक मशीनें बरामद की गईं। बरामद माल की कीमत करीब 10 करोड़ रुपये बताई जा रही है। मामले में हस्तिनापुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

आईटीसी लिमिटेड के सेल्स अधिकारी रिशु मिश्रा के अनुसार, पिछले कुछ समय से हस्तिनापुर और आसपास के क्षेत्रों में कंपनी की सिगरेट की बिक्री अचानक कम होने लगी थी। जांच के दौरान पता चला कि कुछ दुकानदारों को काफी कम कीमत पर कंपनी के नाम से सिगरेट के पैकेट सप्लाई किए जा रहे हैं। कंपनी की टीम ने करीब तीन माह तक पड़ताल की, जिसके बाद नकली सिगरेट तैयार करने वाले गिरोह का पता चला।

शिकायत के बाद एसएसपी मेरठ बीबीजीटीएस मूर्ति के निर्देश पर गुरुवार शाम पुलिस और कंपनी की टीम ने दूधली खादर स्थित इमारत पर छापा मारा। यहां सिगरेट निर्माण की आधुनिक मशीनें, पैकेजिंग सामग्री, भारी मात्रा में तंबाकू और तैयार नकली सिगरेट के पैकेट मिले।

कंबोडिया से आता था कच्चा माल

कंपनी के सेल्स अधिकारी ने बताया कि प्राथमिक जांच में सामने आया है कि सिगरेट तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाला कुछ कच्चा माल कंबोडिया से, जबकि तंबाकू राजस्थान से मंगाया जाता था। प्रारंभिक पूछताछ में दिल्ली निवासी रवि किशोर का नाम सामने आया है, जिसे फैक्ट्री संचालन से जुड़ा बताया जा रहा है।

टीम के मुताबिक, फैक्ट्री में प्रतिदिन करीब 40 से 50 लाख रुपये तक का माल तैयार किया जाता था। बरामद मशीनों की कीमत भी करोड़ों रुपये में बताई जा रही है। फिलहाल पुलिस और आईटीसी की टीम बरामद माल की वास्तविक मात्रा और कीमत का आकलन कर रही है।

इमारत में ही रहते थे करीब दो दर्जन कर्मचारी

फैक्ट्री में नकली सिगरेट तैयार करने के लिए कई श्रमिक काम करते थे। उनके रहने और खाने-पीने की व्यवस्था भी इसी इमारत में की गई थी। पूछताछ के दौरान कुछ श्रमिकों ने अपना नाम बताने से भी इनकार कर दिया। बताया गया कि अधिकांश कर्मचारी दूसरे जनपदों से यहां काम करने आए थे।

सीओ पंकज लवानिया ने बताया कि बरामद माल का आकलन कराया जा रहा है। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में इमारत को सील करने की कार्रवाई के साथ ही मामले में अन्य विधिक कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों को भी नहीं लगी भनक

जिस इमारत में कथित तौर पर नकली सिगरेट बनाने का काम चल रहा था, वह दूधली गांव से करीब 300 मीटर की दूरी पर बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार इमारत का गेट अधिकांश समय बंद रहता था और केवल कंटेनर या अन्य वाहन आने-जाने के दौरान ही खोला जाता था। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अंदर इतने बड़े स्तर पर सिगरेट बनाने का कारोबार चलने की जानकारी नहीं थी।

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