FCRA और परिसीमन बिल पर फंसा पेंच, मॉनसून सत्र के सिर्फ 3 दिन बाकी; सरकार के सामने बड़ी चुनौती
नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के खत्म होने में अब सिर्फ तीन दिन बाकी हैं, लेकिन दो अहम विधेयकों को लेकर सरकार की रणनीति अभी साफ नहीं है। FCRA संशोधन विधेयक को सदन में पेश किए जाने की संभावना है, लेकिन इसे पारित कराने को लेकर संशय बना हुआ है। वहीं परिसीमन विधेयक पर तो सरकार के सामने संख्या बल की चुनौती के कारण पूरी तरह सस्पेंस कायम है।
FCRA बिल पर विपक्ष और दक्षिणी राज्यों का विरोध
विदेशी अंशदान नियमन कानून यानी FCRA से जुड़े प्रस्तावित बदलावों का विपक्ष के साथ दक्षिण और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों के सांसद भी विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सरकार के सामने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि कांग्रेस इस विधेयक के खिलाफ है और इसे संयुक्त संसदीय समिति को भेजे जाने का भी विरोध करेगी।
सरकार ने इस मुद्दे पर संबंधित संस्थाओं और कुछ मुख्यमंत्रियों से बातचीत की है, लेकिन अभी तक व्यापक सहमति नहीं बन सकी है। ऐसे में सत्र के बचे हुए तीन दिनों में बिल पर सरकार क्या कदम उठाती है, इस पर नजर बनी हुई है।
परिसीमन बिल में सबसे बड़ी अड़चन नंबर गेम
परिसीमन से जुड़ा प्रस्ताव सरकार के लिए इससे भी बड़ी चुनौती माना जा रहा है। चूंकि यह संविधान संशोधन विधेयक है, इसलिए इसे पारित कराने के लिए संसद में विशेष बहुमत की जरूरत होगी।
मौजूदा राजनीतिक समीकरण में डीएमके का समर्थन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर सरकार जरूरी दो-तिहाई समर्थन नहीं जुटा पाती है तो विधेयक को पारित कराना मुश्किल होगा।
डीएमके ने फिलहाल अपने रुख में बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं। पार्टी के राज्यसभा नेता तिरुचि शिवा ने कहा है कि दक्षिणी राज्यों के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी बदलाव का उनकी पार्टी समर्थन नहीं करेगी।
सरकार ने विपक्ष को दिया चर्चा का प्रस्ताव
संसद में जारी गतिरोध के बीच सरकार ने विपक्ष से बातचीत की पहल की है। सरकार का कहना है कि वह छात्रों के आंदोलन के मुद्दे पर सदन में चर्चा के लिए तैयार है और गृह मंत्री इस पर जवाब देने को भी तैयार हैं, बशर्ते सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण तरीके से चले।
दूसरी ओर, विपक्ष राम मंदिर में कथित चंदा अनियमितता के मुद्दे पर चर्चा की मांग पर अड़ा हुआ है। सरकार का तर्क है कि इस मामले की जांच के लिए पहले ही एसआईटी गठित की जा चुकी है, इसलिए सदन में इस पर चर्चा नहीं हो सकती।
तीन दिन में क्या होगा या विशेष सत्र का विकल्प?
मॉनसून सत्र के अब सिर्फ तीन दिन बाकी हैं। ऐसे में सरकार के सामने दो अहम सवाल हैं—क्या FCRA बिल सिर्फ पेश होगा या पारित भी कराया जाएगा? और परिसीमन बिल के लिए जरूरी संख्या कैसे जुटेगी?
राजनीतिक सहमति नहीं बनने की स्थिति में परिसीमन बिल को लेकर विशेष सत्र बुलाने का विकल्प भी चर्चा में है। हालांकि, फिलहाल सरकार की ओर से इस बारे में कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है।
यानी संसद के बचे तीन दिन बेहद अहम हैं। सदन में हंगामा और गतिरोध जारी रहा तो सरकार के लिए अपने एजेंडे के दोनों महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा।


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