जन्माष्टमी पर मेरठ के इन मंदिरों में करें श्रीकृष्ण के दर्शन, महाभारत काल से जुड़ी हैं मान्यताएं
हस्तिनापुर से परीक्षितगढ़ तक कृष्ण भक्ति की अनूठी परंपरा, औघड़नाथ और इस्कॉन मंदिर में भी होंगे विशेष आयोजन
मेरठ। जन्माष्टमी के पर्व पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना के लिए मेरठ और आसपास का क्षेत्र विशेष महत्व रखता है। महाभारत काल से जुड़ी मान्यताओं के कारण हस्तिनापुर और परीक्षितगढ़ समेत शहर के कई मंदिरों में जन्माष्टमी पर विशेष आयोजन होते हैं। श्रद्धालु इन मंदिरों में पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण और राधा-कृष्ण के दर्शन करते हैं।
हस्तिनापुर से जुड़े विभिन्न विषयों पर शोध करने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती के अनुसार, हस्तिनापुर और किला परीक्षितगढ़ का क्षेत्र महाभारत की कई घटनाओं से जुड़ा हुआ है। यहां स्थित कुछ मंदिरों और धार्मिक स्थलों को भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित मान्यताओं के कारण विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है।
द्रौपदी मंदिर में कृष्ण के दर्शन
हस्तिनापुर स्थित द्रौपदी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा भी विराजमान है। मान्यता है कि यह मंदिर महाभारत में द्रौपदी के चीरहरण प्रसंग से जुड़ा है। कथा के अनुसार द्रौपदी ने संकट के समय भगवान श्रीकृष्ण का आह्वान किया था और श्रीकृष्ण ने उनकी लाज बचाई थी। इसी धार्मिक प्रसंग के कारण मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की उपस्थिति को विशेष महत्व दिया जाता है।
परीक्षितगढ़ में कृष्ण के रात्रि विश्राम की मान्यता
किला परीक्षितगढ़ भी भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि महाभारत युद्ध को रोकने और कौरव-पांडवों के बीच संधि कराने के प्रयास के दौरान श्रीकृष्ण इस क्षेत्र में पहुंचे थे। मान्यता है कि उन्होंने गांधारी तालाब के पास रात्रि विश्राम किया था। वर्तमान में यहां प्राचीन शिव मंदिर और संबंधित स्थल मौजूद हैं।
औघड़नाथ मंदिर में राधा-कृष्ण की विशेष पूजा
मेरठ कैंट स्थित ऐतिहासिक औघड़नाथ मंदिर में भगवान श्री राधा-कृष्ण की भी पूजा होती है। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। श्रद्धालुओं के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और चांदी के पालने में भगवान लड्डू गोपाल को झुलाने की परंपरा भी निभाई जाती है।
बुढ़ाना गेट के बालाजी मंदिर में भी कृष्ण भक्ति
बुढ़ाना गेट स्थित श्री बालाजी मंदिर में भगवान श्री राधा-कृष्ण की चांदी की प्रतिमाएं विराजमान हैं। मंदिर समिति के पदाधिकारी डॉ. गौरव पाठक के अनुसार, इन प्रतिमाओं की स्थापना के पीछे परिवार की आस्था और समर्पण की कहानी जुड़ी है। जन्माष्टमी पर यहां भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
सराफा बाजार में सजता है कृष्ण दरबार
मेरठ सराफा क्षेत्र स्थित भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर में भी जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जाती है। सराफा व्यापारी हर वर्ष विशेष आयोजन करते हैं। भगवान का आकर्षक श्रृंगार किया जाता है और कई बार चांदी तथा हीरे-जड़ित मुकुट से उनका शृंगार किया जाता है। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
शास्त्रीनगर इस्कॉन मंदिर में गूंजता है हरे कृष्ण महामंत्र
शास्त्रीनगर स्थित इस्कॉन मंदिर भी जन्माष्टमी पर श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहता है। यहां इस्कॉन परंपरा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करते हुए भक्ति में लीन नजर आते हैं। जन्माष्टमी पर विशेष धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
महाभारत कालीन मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं से जुड़े इन स्थलों के कारण जन्माष्टमी पर मेरठ और हस्तिनापुर में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिलता है। श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन और पूजा-अर्चना कर पर्व को श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाते हैं।



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