पेपर लीक: ज़ेन जी का धरना और कॉकरोच प्रेम
- ललिता जोशी
आजकल पेपर लीक और ज़ेन जी के चर्चे हर जगह छाए हुए है। ये सड़क से संसद तक और आम जनता से नेताओं तक अपनी जोरदार और असरदार मौजूदगी दर्ज की। मौसम है बरसात का लेकिन आकाश में बादलों की जगह छाया हुआ है, पेपर लीक की गर्जना और ज़ेन जी का धारणा और कॉकरोच प्रेम।
ये वो कॉकरोच है जिसे गंदगी का प्रतीक माना जाता है और जिसे निकृष्ट श्रेणी का कीड़ा माना जाता है। पेपर लीक के मामले इतने बढ़े हैं कि युवाओं के भीतर असंतोष व्याप्त हो रहा था। इस पर एक टिप्पणी ने इनके असंतोष को भड़का दिया । मानो असंतोष की चिंगारी पर पेट्रोल डाल दिया हो । बस फिर क्या था इस मुद्दे पर बन गई कॉकरोच के नाम के बैनर तले एक पार्टी बन गई और कॉकरोच बैठ गए धरने पर।
इस घिनोने से कीड़े को देखकर अक्सर बच्चे चिल्लाते हैं और उससे दूर भागते हैं । ये कॉकरोच अगर खाने -पीने की चीजों पर चहलकदमी कर लें तो बहुत सी बीमारियाँ होती हैं । इन निकृष्ट प्राणियों को भागने के लिए हजारों -लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं, पेस्ट कंट्रोल पर ताकि इन कॉकरोचों से छुटकारा मिले । अपनी ज़ेन जी को इस कॉकरोच से इतना प्रेम हुआ कि इन्होने इस के नाम की पार्टी बना डाली और नीट पेपर लीक मामले को मुद्दा बनाया और बैठ गए धरने पर जंतर -मंतर पर ।
जंतर -मंतर भी शक्ति स्थल बन गया है, जहाँ से अपनी मांगों पर ध्यान आकृष्ट करवाया जा सकता है । टेक्नोलोजी के मास्टर ज़ेन जी अबकी बार दृढ़ संकल्प के साथ मैदान में उतरी और कोई भी ताक़त इन्हें इनके संकल्प से डिगा नहीं पाया । उन पर चाहे लाठीचार्ज हुआ चाहे उन्हें जेल में डाला गया, आसूं गैस के गोले पड़े, वॉटर कैनन उन चलाये गए। जंतर -मंतर से अन्य राज्यों को भी संदेश गया और पूरे देश में ज़ेन जी ने पेपर लीक के मुद्दे पर धरना प्रदर्शन किया । कोई भी ज्यादती इन्हें डरा नहीं और न ही प्रदर्शन करने से रोक नहीं पाई ।
देश के दूर -दराज के इलाकों से लोग इस आंदोलन में आए और इसे भरपूर समर्थन दिया । युवाओं के अग्रज नेता अनशन पर थे लेकिन उन्हें प्रशासनसे कोई भय नहीं लगा । लगे भी क्यों ? ये सब अपने हक़ के लिए लड़ रहे थे । जेन जी ने कॉकरोच को अपने संघर्ष का चेहरा बना लिया और इस निकृष्ट जीव को अपने धरने प्रदर्शन से हीरो बना डाला।
वैसे ज़ेन जी ने दिखा दिया कि जैसे कॉकरोच विषम कंडीशन में भी जीवित रह सकते हैं । ज़ेन जी ने भी दिखा दिया कि चाहे उन्हें डंडे पड़ें या फिर धूप हो या बारिश या फिर भूखे हों या प्यासे हों वो अपने लक्ष्य को प्राप्त किए बिना हिलेंगे नहीं ।
ज़ेन जी पर इल्जाम लग रहा है कि इन्होंने अमर्यादित और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था । ये वाकई में बहुत गंभीर मुद्दा है और विशेषकर हमारी बेटियों पर । कोई उनकी परवरिश पर सवाल उठा रहा है तो कोई उनकी शिक्षा पर । सही बात बोली लोगों ने लेकिन उन युवाओं के बारे में सोचा है जिनके लिए पेपर लीक एक प्रथा बन गई थी । अक्सर ऐसे प्रदर्शनों में असामाजिक तत्व घुस जाते हैं और वो आंदोलनों को हिंसक और अभद्र बना देते हैं । आम जनता के आंदोलन में कोई आ जा सकता है ।
आलोचकों को इस पेपर लीक के भयावहता पर भी ईमानदारी से रोष प्रकट करना चाहिए । अरे भाई स्कूल से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक के पेपर लीक होते ही जा रहें हैं । इस लीक के कारण कुछ छात्रों ने आत्महत्या तक कर ली । किसी के घर का चिराग ही बुझ गया तो पूरा घर ही उजड़ गया । अपने भविष्य से निराश युवाओं जिसके पास कुछ खोने के लिए कुछ है ही नहीं तो उससे क्या उम्मीद की जा सकती है ?
सरकार अगर पहले ही गंभीरता से पेपर लीक मामले पर कार्रवाई करती तो इस प्रदर्शन का रूप कुछ और ही होता है । ये देश की युवा पीढ़ी है और देश का वोटर भी है । इस लोकतन्त्र का बड़ा और अहम हिस्सा हैं । चुनी हुई सरकारों का दायित्व है कि वो देश की भावी पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करें ताकि युवाओं में असन्तोष न पनपें । सरकारों को भी सोचना पड़ेगा की देश का विकास युवाओं के विकास से ही होगा । कितनी पीड़ादायी परिस्तिथियों में ज़ेन जी सड़क पर उतरी होगी और बड़े ही दबाव के कारण शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा ।
हमारे नेताओं को फूँक -फूँक कार कदम रखना होगा । अब आरोप और प्रत्यारोप से काम नहीं चलेगा । टेक्नोलोजी फ्रेंडली जेन जी अपने भविष्य के लिए चिंतित है । इसीलिए तो इन्होने कॉकरोच को हीरो बना कर लोकप्रिय बना दिया । ये वही कॉकरोच है जिसे गंदगी में रहना पसंद है और अँधेरों में सक्रिय होते हैं और उजाले में गायब हो जाते हैं । लेकिन ज़ेन जी कॉकरोच को उजाले में ला खड़ा किया और संघर्ष का प्रतीक बना दिया ।विपक्षी नेताओं ने भी इन जेन जिओं को भी अपना भरपूर समर्थन सड़क से संसद तक में दिया।सरकार ने भी जेन जी की पीड़ा को समझा और उस पर कार्रवाई भी की।
चलते -चलते एक और मुद्दा कि जो लड़कियां स्वतंत्र विचारों की हैं उनका चरित्र हनन किया जाता है। यही निर्भया के केस में हुआ था। हम किस ओर जा रहें हैं एक ओर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और दूसरी ओर अपने हक के लिए धरने पर बैठी बेटियों की लड़कों की तरह भाषा बोलने वाली लड़कियों का चरित्र हनन ! क्या लड़कों को सब माफ है ? अब तो पड़ोसी देश के कॉकरोच भी बगावती हो गए हैं । कॉकरोच इतने बलशाली भी हो सकते हैं !
जनाब ये ज़ेन जी जो जी जान लगा कर करो या मरो पर उतर आती है ।
(मुनिरका एन्क्लेव, दिल्ली)




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