मॉनसूनी मौसम में हल्का-सुपाच्य भोजन जरूरी
मॉनसून या बरसात का मौसम चिलचिलाती गर्मी से राहत तो लाता है, लेकिन अपने साथ कई तरह की बीमारियां और स्वास्थ्य चुनौतियां भी लेकर आता है। आयुर्वेद के अनुसार, नमी के इस मौसम में जठराग्नि कमजोर हो जाती है, जिससे पाचन तंत्र में दिक्कतें आती हैं। आधुनिक चिकित्सा और न्यूट्रीशन साइंस भी मानते हैं कि मानसून में हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जिससे पेट के संक्रमण, फ्लू, टाइफाइड, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि इन दिनों खुराक में सही, संतुलित और स्वच्छ खाद्य पदार्थों को शामिल करना बेहद जरूरी है।
शुरुआत गुनगुने पानी और हर्बल चाय से
विशेषज्ञों के अनुसार, बरसात के मौसम में सुबह की शुरुआत चाय या कॉफी के बजाय गुनगुने पानी, नींबू पानी या हर्बल काढ़े से करनी चाहिए। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के दिशानिर्देशों के मुताबिक, अदरक, तुलसी, काली मिर्च और दालचीनी से बना काढ़ा एंटी-माइक्रोबियल गुणों से भरपूर होता है। यह आपके श्वसन तंत्र को साफ रखता है और मौसमी फ्लू से बचाता है। अदरक में मौजूद ‘जिंजरोल’ नामक तत्व सूजन और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है।
उबला हुआ पानी पीएं
हल्का और सुपाच्य भोजन
दोपहर और रात के भोजन में दाल-चावल, खिचड़ी या गेहूं-ज्वार की रोटी के साथ पकी हुई सब्जी का सेवन करें। मूंग की दाल इस मौसम के लिए सबसे सबसे अच्छी मानी जाती है। रात का खाना सोने से दो से तीन घंटे पहले खा लें। मानसून में पाचन तंत्र धीमा हो जाता है, इसलिए सुबह का नाश्ता हल्का, सुपाच्य और ताजा होना चाहिए। शोध बताते हैं कि ठंडा या रखा हुआ खाना बैक्टीरिया के पनपने का मुख्य केंद्र होता है। अपने नाश्ते में दलिया, ओट्स, पोहा या सूजी का उपमा शामिल करें। इनमें फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो पेट को साफ रखती है।
मौसमी फलों का सेवन
फलों का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन बरसात में फल चुनते समय सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, तरबूज या खरबूजा जैसे अत्यधिक पानी वाले फलों से इस मौसम में बचना चाहिए। इसके बजाय सेब, नाशपाती, अनार, पपीता और जामुन जैसे फलों को प्राथमिकता दें। जामुन में एंटी-ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं और यह पाचन क्रिया को सुधारता है।
मौसमी सब्जियां अपनाएं
जर्नल ऑफ फूड प्रोटेक्शन के शोध बताते हैं कि इस मौसम में पत्तागोभी, पालक और ब्रोकली की परतों में छिपे बैक्टीरिया धोने के बाद भी पूरी तरह नहीं निकलते। इसकी जगह लौकी, तोरई, कद्दू, टिंडा और परवल जैसी बेल वाली सब्जियों का सेवन करें। प्रोबायोटिक्स यानी छाछ, दही और कांजी न्यूट्रिशनिस्ट्स के अनुसार, दोपहर के भोजन में घर का जमा हुआ ताजा दही या जीरा-हींग युक्त छाछ शामिल करें। दही खट्टा या फ्रिज में बहुत दिनों से रखा हुआ न हो। प्रोबायोटिक्स आंतों की परत को मजबूत करते हैं और हानिकारक बैक्टीरिया को पेट में टिकने नहीं देते।
एंटी-बैक्टीरियल मसाले
मसाले प्राकृतिक दवा की तरह काम करते हैं। बरसात के दिनों में खाना बनाते समय हल्दी, जीरा, धनिया, मेथी दाना, हींग और लहसुन का प्रयोग थोड़ा बढ़ा दें। लहसुन में ‘एलिसिन’ पाया जाता है, जो एक शक्तिशाली एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल यौगिक है। हल्दी में मौजूद ‘कर्क्यूमिन’ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
स्ट्रीट फूड और कच्चे सलाद से परहेज
बरसात के मौसम में अक्सर चाय के साथ पकोड़े या चाट खाने का मन करता है। लेकिन डॉक्टरों के अनुसार, इस मौसम में बाहर का खाना, खासकर स्ट्रीट फूड, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए का सबसे बड़ा कारण बनता है। इसके अलावा, होटल या रेस्तरां में मिलने वाले कच्चे सलाद (जैसे कच्चा प्याज, खीरा) खाने से बचें। घर पर पका हुआ खाना ही खाएं।
स्नैक्स में सूप और भुने हुए अनाज
शाम के समय हल्की भूख लगने पर तले-भुने स्नैक्स की जगह गर्म सूप पीने की आदत डालें। टमाटर, कॉर्न या मिश्रित सब्जियों का गर्म सूप न केवल शरीर को गर्माहट देता है, बल्कि पचने में भी आसान होता है। इसके अलावा, आप भुने हुए मखाने, भुना हुआ चना या मुरमुरा (लाई) खा सकते हैं।
खट्टे फलों का सेवन है लाभकारी
मानसून व मौसमी डाइट संबंधी नवीनतम रिसर्च में मुख्य रूप से हल्के, ताजे और इम्यून-बूस्टर आहार पर जोर दिया गया है। न्यूट्रिएंट्स जर्नल के अनुसार, मानसून के दौरान बैक्टीरिया और वायरस से बचने के लिए खट्टे फल (जैसे संतरा, नींबू, मौसमी) बेहद जरूरी हैं क्योंकि शरीर खुद विटामिन-सी नहीं बना पाता है। यूरोपियन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रीशन की रिसर्च बताती है कि प्रोबायोटिक्स (दही, छाछ) आंतों के स्वास्थ्य को दुरुस्त रखते हैं।




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