सोशल मीडिया के बारे में कहा गया कि लोकतंत्र में सबकी आवाज पहुंचाने और उन्हें मौका देने का यह बड़ा माध्यम है। इसे लोकतंत्र के वाजिब और जरूरी औजार के रूप में भी मान्यता मिली। लेकिन बीतते वक्त के साथ पता चल रहा है कि जिसे हम सोशल मीडिया कहते हैं, वह लोकतंत्र के लिए जितना जरूरी है, उससे कहीं ज्यादा अनसोशल यानी असामाजिक भी है। यह ठीक है कि सोशल मीडिया के जरिए व्यवस्था की अंधी सुरंग में खो रही आवाजों को मौका मिलता है।
लेकिन यह उतना ही सच है कि इस माध्यम ने लोगों की नजर का पानी उतार दिया है। लोग अब लिहाज करना भूल गए हैं। सोशल मीडिया पर अगर किसी की बात पसंद नहीं आती तो उसे खुलेआम गालियां दी जा सकती हैं। उसके चरित्र पर आक्षेप लगाया जा सकता है। उसका चरित्र हनन किया जा सकता है। चाहे वह व्यक्ति सामाजिक जीवन में कितना ही प्रतिष्ठित क्यों न हो, उसकी उम्र चाहे जितनी भी बड़ी क्यों ना हो। सोशल मीडिया मंचों ने अपना अलगोरिदम भी ऐसा विकसित किया है, जो अच्छी बातों, सामाजिक चिंतन और बेहतर कल की बातों को ज्यादा तवज्जो नहीं देखा। एक तरह से कहें तो वह इसकी अनदेखी ही करता है।
लेकिन जैसे ही किसी को कोई गाली देता है, किसी के चरित्र का बेवजह ही हनन करता है, किसी का घटिया कार्टून बनाता है, सोशल मीडिया का अलगोरिदम उसे फैलाने में द्रुत गति से जुट जाता है। सोशल मीडिया ने अब तक पर्दे के पीछे रही नंगई को भी उजागर कर दिया है। आज रील्स के चक्कर में अधनंगे और कई बार करीब-करीब नग्न फोटोग्राफ और वीडियो तक जारी किए जा रहे हैं। भले ही अपने परिवारों में महिलाएँ और युवतियां सलीके से रहती हों, लेकिन सोशल मीडिया पर प्रसिद्धि पाने और उसके जरिए कुछ कमाने के चक्कर में अपने शील और अपनी लज्जा को भी बेपर्दा कर रही हैं। सोशल मीडिया कितना असमाजिक हो चुका है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसका अलगोरिदम अश्लीलता को बढ़ावा देता है, लेकिन शील और लज्जा की बात को अपने मंच के किसी कोने में डाल देता है।
कह सकते हैं कि वर्चुअल स्पेस के किसी अंधेरे कोने में उसे गुम कर देता है। सोशल मीडिया पर सकारात्मक, उपयोगी और समाजहित की सामग्री साझा करनी चाहिए। सोशल मीडिया पर केवल प्रामाणिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही विश्वास करना चाहिए। जेन-ज़ी में भी यह विवेक विकसित होना चाहिए कि क्या सही है और क्या नहीं। वरिष्ठ पीढ़ी की भी जिम्मेदारी है कि वह नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करे तथा उन्हें सही और गलत के बीच अंतर समझाए।





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