धूप में किंगकांग बनकर निकला शिवभक्त, कांवड़ मार्ग पर जहां रुकी स्कूटी, वहीं उमड़ी सेल्फी की भीड़

वूलन कॉस्ट्यूम और मास्क पहनकर कर रहे कांवड़ यात्रा, बोले- भोलेनाथ का नाम हो तो गर्मी की चिंता कैसी

मेरठ। भीषण गर्मी, तपती सड़क और कांवड़ यात्रा की थकान के बीच मेरठ के कांवड़ मार्ग पर इन दिनों एक अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर दिल्ली लौट रहे कांवड़ियों के बीच किंगकांग का रूप धारण किए एक शिवभक्त आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। स्कूटी पर सवार किंगकांग को देखने के लिए रास्ते में बच्चे और शिवभक्त रुक जा रहे हैं। जहां स्कूटी रुकती है, वहीं उसके साथ सेल्फी लेने वालों की भीड़ जुट जाती है।

मोटी वूलन पोशाक और मास्क के कारण इस शिवभक्त को देखकर लोग हैरान रह जाते हैं। गर्मी के बीच इस भारी कॉस्ट्यूम को पहनकर कांवड़ यात्रा कर रहे रोहित का कहना है कि "भोलेनाथ का नाम लेकर निकले हैं, फिर धूप और गर्मी की चिंता कैसी।"

एक महीने तक की रिहर्सल

दिल्ली निवासी रोहित ने बताया कि यह उनकी तीसरी कांवड़ यात्रा है। वह हर साल सामान्य तरीके से कांवड़ लेकर जाते थे, लेकिन इस बार कुछ अलग करने का विचार आया। इसी वजह से उन्होंने किंगकांग का रूप धारण किया, ताकि रास्ते में शिवभक्तों का मनोरंजन भी हो और यात्रा यादगार भी बने।

उन्होंने बताया कि इस रूप को तैयार करने के लिए करीब एक महीने तक रिहर्सल की गई। कॉस्ट्यूम काफी मोटा और वजनदार है। पोशाक के अंदर गर्मी कम करने के लिए पीछे छोटा पंखा भी लगाया गया है, लेकिन इसके बावजूद इसे लंबे समय तक पहनकर चलना चुनौतीपूर्ण है।

रोहित का कहना है कि भोलेनाथ का नाम लेकर आगे बढ़ने के बाद गर्मी और धूप का अहसास कम हो जाता है। आस्था और लोगों के उत्साह से उन्हें लगातार आगे बढ़ने की ऊर्जा मिल रही है।

स्कूटी पर सफर, दो-तीन घंटे में ब्रेक

इस अनोखी कांवड़ यात्रा में रोहित के साथ रोहन भी हैं। रोहन स्कूटी चला रहे हैं, जबकि रोहित पीछे बैठकर कांवड़ संभाल रहे हैं। भीषण गर्मी को देखते हुए दोनों हर दो-तीन घंटे में ब्रेक लेते हैं। इस दौरान खाना-पीना करने के साथ कुछ देर आराम किया जाता है।

ब्रेक के दौरान रोहित कॉस्ट्यूम उतारकर शरीर को राहत देते हैं, जिससे गर्मी का असर कम हो सके। इसके बाद दोबारा किंगकांग का रूप धारण कर यात्रा आगे बढ़ाई जाती है।

बच्चों और युवाओं में सेल्फी का क्रेज

किंगकांग के रूप में रोहित जहां भी रुकते हैं, वहां बच्चों और युवाओं की भीड़ लग जाती है। हर कोई उनके साथ सेल्फी लेने के लिए उत्साहित नजर आता है। कई बार भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि दोनों को निर्धारित समय से ज्यादा देर तक रुकना पड़ता है।

रोहन बताते हैं कि लोगों के उत्साह के कारण कई बार ब्रेक लंबा हो जाता है और इसी वजह से दिल्ली पहुंचने में थोड़ा ज्यादा समय लग रहा है। इसके बावजूद दोनों का कहना है कि रास्ते में शिवभक्तों के चेहरे पर मुस्कान लाने का अनुभव उनकी यात्रा को और खास बना रहा है।

कांवड़ यात्रा में आस्था के साथ मनोरंजन का यह अनोखा अंदाज राहगीरों और शिवभक्तों के बीच खासा आकर्षण बना हुआ है।

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