डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में अटकी सबा फरहत की रिहाई: जालसाजी का ठोस सुबूत न मिलने पर हाईकोर्ट ने दी जमानत, कांवड़ ड्यूटी से सत्यापन में देरी
मेरठ। पाकिस्तान मूल की मेरठ निवासी सबा फरहत की जेल से रिहाई हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद दस्तावेजों के सत्यापन में अटक गई है। 5 अगस्त 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करीब 170 दिन बाद सबा फरहत को जमानत दे दी थी। शुक्रवार शाम तक उनके अधिवक्ता की ओर से हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी कर दी गई। अब दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही रिहाई का रास्ता साफ होगा।
कांवड़ यात्रा के चलते पुलिस और अन्य सरकारी विभागों की ड्यूटी बढ़ी हुई है। ऐसे में दस्तावेज सत्यापन में देरी की संभावना जताई जा रही है। यदि शनिवार तक प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो सोमवार तक इंतजार करना पड़ सकता है। अधिकारियों की व्यस्तता को देखते हुए रिहाई में कुछ और दिन लगने की संभावना भी बताई जा रही है।
14 फरवरी को दर्ज हुआ था मुकदमा
पूरा मामला 14 फरवरी 2026 को मेरठ के देहलीगेट थाना क्षेत्र में दर्ज हुआ था। शिकायतकर्ता रुकसाना खान ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान मूल की सबा उर्फ नाजी उर्फ नाजिया और उनकी बेटी ऐमन फरहत फर्जी दस्तावेजों और पासपोर्ट के आधार पर खुद को भारतीय नागरिक दर्शाकर मेरठ में रह रही हैं।
शिकायत के अनुसार, देहलीगेट क्षेत्र निवासी फरहत मसूद ने पाकिस्तान जाकर सबा फरहत से विवाह किया था। विवाह के बाद उनके तीन बच्चे हुए। आरोप लगाया गया कि पाकिस्तान में जन्मी बेटी ऐमन फरहत अपनी मां के पासपोर्ट के आधार पर भारत आई और मेरठ के एक स्कूल में पढ़ाई की।
शिकायत में ऐमन के भारतीय पासपोर्ट और जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
सबा पर लगाए गए थे कई आरोप
सबा फरहत पर अलग-अलग नामों से वोटर आईडी बनवाने और कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पाकिस्तान समेत अन्य देशों की यात्रा करने के आरोप लगाए गए थे। शिकायत में उनके पिता पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े होने का भी आरोप लगाया गया था।
शिकायत के बाद देहलीगेट पुलिस ने सबा फरहत को पूछताछ के लिए बुलाया और 16 फरवरी 2026 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
निचली अदालत से खारिज हुई थी जमानत
गिरफ्तारी के बाद सबा फरहत की ओर से निचली अदालत में जमानत याचिका दाखिल की गई थी। बचाव पक्ष ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि सबा ने कभी वोटर आईडी के लिए आवेदन नहीं किया और न ही पाकिस्तान के अलावा किसी अन्य देश की यात्रा की है।
हालांकि, निचली अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद सबा फरहत ने हाईकोर्ट का रुख किया।
मुकदमे में हुआ बदलाव
मामले की शुरुआत में सबा फरहत और उनकी बेटी ऐमन फरहत को नामजद किया गया था। बाद में जांच के दौरान ऐमन का नाम मुकदमे से हटा दिया गया और सबा के पति मसूद फरहत को आरोपी बनाया गया।
पुलिस ने आरोप लगाया कि मसूद ने पाकिस्तान में जन्मी अपनी बेटी का मेरठ के एक निजी अस्पताल से कथित तौर पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया था। जांच के दौरान मुकदमे में विदेशी अधिनियम की धारा 14-ख भी जोड़ी गई।
हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?
सबा फरहत की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एनआई जाफरी और मोहम्मद असलम ने हाईकोर्ट में पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने कहा कि सबा और उनकी बेटी विधिसम्मत तरीके से भारत में रह रहे हैं।
दलीलों के दौरान बताया गया कि:
- सबा फरहत के पास 10 मार्च 2027 तक वैध लॉन्ग टर्म वीजा है और वह करीब 35 वर्षों से भारत में रह रही हैं।
- उनके खिलाफ किसी आपराधिक गतिविधि का पूर्व रिकॉर्ड नहीं है।
- ऐमन फरहत का भारतीय पासपोर्ट 5 जुलाई 2022 को जारी हुआ था, जो 3 जुलाई 2032 तक वैध है।
- नागरिकता के लिए वर्ष 2010 और 2011 में आवेदन किए जाने तथा तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से एलआईयू रिपोर्ट के आधार पर नागरिकता दिए जाने की संस्तुति का भी हवाला दिया गया।
- जिस वोटर आईडी को सबा फरहत का बताया जा रहा था, बचाव पक्ष के अनुसार वह हस्तिनापुर की किसी दूसरी महिला की है।
- बचाव पक्ष ने दावा किया कि सबा ने पाकिस्तान के अलावा किसी अन्य देश की यात्रा नहीं की।
- यह भी बताया गया कि उनके पति मसूद फरहत को 27 अप्रैल 2026 को अग्रिम जमानत मिल चुकी है।
जालसाजी के आरोपों पर हाईकोर्ट में क्या हुआ?
बचाव पक्ष की दलीलों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने सबा फरहत को जमानत दे दी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत ने जमानत देते समय व्यक्तिगत मुचलके और दो जमानतदारों के आधार पर रिहाई के निर्देश दिए।
अधिवक्ता वीके शर्मा के मुताबिक, कोर्ट ने जमानत के लिए श्योरिटी बॉन्ड की राशि 25 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी है। जरूरी दस्तावेज जमा किए जा चुके हैं और अब उनका सत्यापन कराया जा रहा है।
कांवड़ यात्रा के कारण सत्यापन में देरी
सबा फरहत की रिहाई अब पुलिस और संबंधित विभागों की ओर से दस्तावेजों के सत्यापन पर निर्भर है। बताया गया है कि सत्यापन की प्रक्रिया में थाना पुलिस के साथ आरटीओ की भूमिका भी है।
मेरठ में इस समय कांवड़ यात्रा के चलते पुलिस और सरकारी विभागों के अधिकांश कर्मचारी ड्यूटी में लगे हुए हैं। ऐसे में सत्यापन में दो से तीन दिन तक का समय लग सकता है।
यदि प्रक्रिया में और देरी हुई तो सबा फरहत को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी कुछ दिन और जेल में रहना पड़ सकता है। मौजूदा परिस्थितियों में उनकी रिहाई मंगलवार तक होने की संभावना जताई जा रही है।


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