नमो भारत कॉरिडोर की 60% बिजली जरूरत पूरी करेगा 110 मेगावॉट का सोलर प्लांट
जालौन में 450 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा कैप्टिव सोलर प्लांट, बिजली खर्च में 25% कमी का अनुमान
मेरठ। दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को अब बड़ी मात्रा में बिजली सौर ऊर्जा से मिलेगी। एनसीआरटीसी ने एनएनआरएल (एनआईआरएल एनसीआरटीसी रिन्यूएबल्स लिमिटेड) के साथ 110 मेगावॉट के कैप्टिव सोलर पावर प्लांट के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस परियोजना के शुरू होने के बाद दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर की कुल बिजली आवश्यकता का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा होने का अनुमान है।
समझौते पर एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल, एनआईआरएल के निदेशक वित्त एवं सीएमडी डेजिगनेट डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य, एनसीआरटीसी की निदेशक वित्त नमिता मेहरोत्रा और निदेशक इलेक्ट्रिकल्स एंड रोलिंग स्टॉक महेंद्र कुमार समेत दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।
110 मेगावॉट क्षमता वाला यह कैप्टिव सोलर पावर प्लांट उत्तर प्रदेश के जालौन में विकसित किया जाएगा। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 450 करोड़ रुपये है और इसे 80:20 डेट-इक्विटी फंडिंग मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। परियोजना को अगले 24 महीनों में परिचालित करने की योजना है।
प्लांट से उत्पादित बिजली उत्तर प्रदेश स्टेट ग्रिड के माध्यम से उत्तर प्रदेश और दिल्ली स्थित एनसीआरटीसी के रिसीविंग सबस्टेशनों तक पहुंचाई जाएगी। वहां से इस बिजली का इस्तेमाल नमो भारत कॉरिडोर के संचालन में किया जाएगा।
बिजली खर्च में 25 फीसदी तक कमी
दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के कुल परिचालन खर्च का करीब 30 से 35 प्रतिशत हिस्सा बिजली पर खर्च होता है। कैप्टिव सोलर प्लांट के संचालन के बाद बिजली खर्च में लगभग 25 प्रतिशत तक कमी आने का अनुमान है।
एनसीआरटीसी इस प्लांट से 25 वर्षों तक तय टैरिफ पर बिजली खरीदेगा। इससे लंबे समय तक बिजली की लागत को स्थिर रखने के साथ ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलेगी।
हर साल 1.77 लाख टन CO₂ उत्सर्जन घटेगा
परियोजना से आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरण को भी बड़ा फायदा होने का अनुमान है। पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की जगह सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से हर साल करीब 1.77 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है। इसके साथ ही नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) जैसे प्रदूषकों के उत्सर्जन में भी कमी आएगी।
आरआरटीएस और मेट्रो के लिए बनेगी मिसाल
एनसीआरटीसी के अनुसार, देश के आरआरटीएस और मेट्रो परिवहन तंत्र के लिए यह अपनी तरह की पहली कैप्टिव सोलर पावर परियोजना है। परियोजना शहरी परिवहन में नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल का नया मॉडल पेश करेगी और भविष्य के क्षेत्रीय एवं शहरी ट्रांजिट नेटवर्क के लिए उदाहरण बनेगी।
रक्षाबंधन पर 1.68 लाख से अधिक यात्रियों ने किया सफर
दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर पर यात्रियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वर्तमान में प्रतिदिन करीब एक लाख यात्री नमो भारत से सफर कर रहे हैं और कॉरिडोर पर चार करोड़ से अधिक कम्यूटर ट्रिप्स का आंकड़ा पार हो चुका है।
रक्षाबंधन के दिन 28 अगस्त को 1.68 लाख से अधिक यात्रियों ने नमो भारत से सफर किया, जो अब तक की सबसे अधिक दैनिक यात्री संख्या रही। एनसीआरटीसी के मुताबिक अधिक यात्री संख्या, भीषण गर्मी, मानसून, कांवड़ यात्रा और त्योहारों के दौरान भी नमो भारत सेवाओं का संचालन लगातार बेहतर रहा है।
यह परियोजना एनएनआरएल द्वारा विकसित की जा रही है, जो एनसीआरटीसी और एनआईआरएल का संयुक्त उपक्रम है। कैप्टिव सोलर प्लांट से नमो भारत कॉरिडोर को स्वच्छ ऊर्जा मिलने के साथ दीर्घकालिक लागत में कमी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।


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