44 भूखंडों पर व्यापारी समाज में दरार! ज्यादातर कारोबारी बंद के खिलाफ

व्यापारी नेता आंजनेय बोले- सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वोपरि, तोड़फोड़ की प्रक्रिया शुरू कर चुके कई व्यापारी

मेरठ। 44 भूखंडों को लेकर चल रहे विवाद में अब व्यापारियों के बीच ही मतभेद सामने आने लगे हैं। व्यापारी नेता आंजनेय ने दावा किया है कि 2 सितंबर के प्रस्तावित मेरठ बंद के समर्थन में 44 भूखंडों से जुड़े ज्यादातर व्यापारी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि व्यापारियों के बीच बंद को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि कई कारोबारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए अपने स्तर से भूखंडों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं।

आंजनेय ने बताया कि दो दिन पहले एडीएम सिटी और अन्य अधिकारियों के साथ हुई बैठक में बड़ी संख्या में व्यापारी पहुंचे थे। करीब 100-100 व्यापारियों के समूह में लोगों ने हाथ उठाकर स्पष्ट किया कि वे प्रस्तावित बंद में शामिल नहीं हैं। उनका कहना है कि बाजार की वास्तविक स्थिति भी यही संकेत देती है कि अधिकांश व्यापारी बंद के पक्ष में नहीं हैं।

नवीन शर्मा की भूमिका पर भी उठाए सवाल

व्यापारी नेता आंजनेय ने व्यापारी नेता नवीन शर्मा का नाम लेते हुए कहा कि वह उनके बड़े भाई हैं और व्यापारियों के साथ हैं, लेकिन पिछले डेढ़ साल से चल रही इस लड़ाई में उनकी भूमिका पर सवाल उठता है। उन्होंने कहा कि जब 606 भूखंडों पर कार्रवाई हो रही थी, तब भी व्यापारियों के साथ खड़ा होना चाहिए था।

आंजनेय ने दावा किया कि वह करीब डेढ़ साल से व्यापारियों के साथ इस मुद्दे पर संघर्ष कर रहे हैं और आगे भी उनके साथ खड़े रहेंगे।

कहा- केवल 44 भूखंडों का मामला समझना गलत

आंजनेय के मुताबिक, विवाद को सिर्फ 44 भूखंडों तक सीमित करके देखना सही नहीं है। इन भूखंडों से बड़ी संख्या में व्यापारी जुड़े हैं और एक भूखंड पर कई लोगों का कारोबार निर्भर है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ व्यापारियों को एक जगह एकत्र करके यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि 44 भूखंडों के ज्यादातर कारोबारी बंद के समर्थन में हैं, जबकि जमीनी स्थिति इससे अलग है।

सरकार समाधान की कोशिश में

आंजनेय ने कहा कि सरकार और प्रशासन लगातार मामले का समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री स्तर पर भी व्यापारियों की समस्याएं सुनी गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बनाई जाने वाली किसी भी नीति को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप होना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि पहले भी एक नीति लाई गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे स्वीकार नहीं किया। इसलिए अब सरकार को कोर्ट के आदेश के दायरे में रहकर ही कोई रास्ता निकालना होगा।

‘कोर्ट का आदेश सर्वोपरि’

व्यापारी नेता ने स्पष्ट कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वोपरि है। जब तक कोर्ट किसी नई नीति को मंजूरी नहीं देता, तब तक सरकार भी ऐसा कोई फैसला नहीं कर सकती, जो उसके आदेश के विपरीत हो।

उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन व्यापारियों का पक्ष सुप्रीम कोर्ट के सामने रखने और नई नीति को मंजूरी दिलाने का प्रयास कर रहा है तो व्यापारियों को विरोध के बजाय सहयोग करना चाहिए।

आंजनेय ने कहा कि व्यापारियों के हित में समाधान निकालने के लिए सरकार और प्रशासन के साथ मिलकर आगे बढ़ना ही मौजूदा परिस्थितियों में सबसे बेहतर रास्ता है।

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