44 भूखंडों पर अग्निपरीक्षा: 2 सितंबर के बंद से पहले व्यापारियों में दो फाड़
190 कारोबारियों पर अवैध निर्माण हटाने का दबाव, 201 भूखंडों से निर्माण हट चुका; आवास विकास परिषद के सामने 21 दिन में कार्रवाई की चुनौती
मेरठ। 44 भूखंडों को लेकर चल रहे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। एक ओर 2 सितंबर को मेरठ बंद का आह्वान किया गया है, वहीं दूसरी ओर व्यापारी नेता आंजनेय का दावा है कि 44 भूखंडों से जुड़े ज्यादातर व्यापारी बंद के समर्थन में नहीं हैं। उनका कहना है कि कई व्यापारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए अपने स्तर से अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं।
आंजनेय के अनुसार, दो दिन पहले एडीएम सिटी और अन्य अधिकारियों के साथ हुई बैठक में बड़ी संख्या में व्यापारी पहुंचे थे। करीब 100-100 व्यापारियों के समूह में लोगों ने हाथ उठाकर स्पष्ट किया कि वे प्रस्तावित बंद में शामिल नहीं हैं। उनका दावा है कि बाजार में भी ज्यादातर व्यापारी बंद के पक्ष में नहीं हैं।
201 भूखंडों से हट चुका अवैध निर्माण
आवास विकास परिषद की रिपोर्ट के अनुसार 659 भूखंडों में से 201 भूखंड स्वामियों ने कोर्ट के अनुपालन में सैटबैक के हिसाब से किए गए अवैध निर्माण को खुद हटा लिया है। वहीं, सील खोले गए 44 भूखंडों में करीब 190 व्यापारी जुड़े हुए हैं। इनमें से ज्यादातर ने अभी तक अवैध निर्माण नहीं हटाया है और निर्धारित समयसीमा भी समाप्त हो चुकी है।
ऐसे में अगले 21 दिन आवास विकास परिषद के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं। परिषद को अब यह तय करना है कि निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद 44 भूखंडों पर किस तरह की कार्रवाई की जाए और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट किस स्थिति में पेश की जाए।
बंद को लेकर व्यापारियों में मतभेद
आंजनेय ने कहा कि 44 भूखंडों से जुड़े व्यापारियों में बंद को लेकर एक राय नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ व्यापारियों को एकत्र कर यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि सभी कारोबारी बंद के समर्थन में हैं, जबकि वास्तविक स्थिति अलग है।
नवीन शर्मा पर भी उठाए सवाल
आंजनेय ने व्यापारी नेता नवीन शर्मा की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नवीन शर्मा उनके बड़े भाई हैं और व्यापारियों के साथ हैं, लेकिन पिछले डेढ़ साल से चल रहे संघर्ष में उनकी भूमिका पर सवाल उठता है। उनका कहना है कि जब 606 भूखंडों पर कार्रवाई हो रही थी, तब भी व्यापारियों के साथ खड़ा होना चाहिए था।
‘कोर्ट का आदेश सर्वोपरि’
आंजनेय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वोपरि है। सरकार और प्रशासन को कोर्ट के आदेश के दायरे में रहकर ही व्यापारियों की समस्या का समाधान तलाशना होगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन व्यापारियों का पक्ष सुप्रीम कोर्ट के सामने रखकर नई नीति को मंजूरी दिलाने का प्रयास कर रहा है तो व्यापारियों को विरोध के बजाय सहयोग करना चाहिए।
अब नजर इस बात पर है कि अगले 21 दिनों में आवास विकास परिषद 44 भूखंडों पर क्या कार्रवाई करती है और 2 सितंबर के प्रस्तावित बंद का व्यापारियों के बीच कितना असर दिखाई देता है।


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