पैर की हड्डी से बनाया नया जबड़ा, 25 वर्षीय पेंटर को मिला दर्द से छुटकारा
टीएमयू के डेंटल डॉक्टर्स ने की दुर्लभ सर्जरी, अमेलोब्लास्टोमा से गल चुका था निचले जबड़े का हिस्सा; आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क हुआ इलाज
मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) के डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने 25 वर्षीय पेंटर किशन की दुर्लभ और जटिल सर्जरी कर उसे नई जिंदगी दी है। बिलारी निवासी किशन के निचले जबड़े की हड्डी अमेलोब्लास्टोमा नामक ट्यूमर के कारण लगभग पूरी तरह गल चुकी थी। चिकित्सकों ने प्रभावित जबड़े को निकालकर पैर की फिबुला (Fibula) हड्डी से नया जबड़ा तैयार कर दिया।
करीब पांच घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी के बाद किशन को लंबे समय से चले आ रहे असहनीय दर्द से राहत मिली है। अब वह बेहतर तरीके से खाना चबा सकता है और सामान्य रूप से मुंह खोलने और मुस्कुराने की उम्मीद भी जगी है।
दो साल से दर्द और सूजन से परेशान था किशन
बिलारी निवासी किशन पिछले करीब दो साल से दांतों में दर्द और जबड़े में सूजन की समस्या से परेशान था। हालत यह थी कि वह अपना मुंह पूरी तरह नहीं खोल पाता था और खाना भी ठीक से नहीं चबा पाता था। उसने आसपास के कई चिकित्सकों से इलाज कराया, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ।
स्थिति गंभीर होने पर उसे दिल्ली में इलाज कराने की सलाह दी गई, लेकिन वहां इलाज का खर्च उसकी आर्थिक क्षमता से बाहर था। इसके बाद वह उम्मीद लेकर टीएमयू हॉस्पिटल पहुंचा।
जांच में सामने आया अमेलोब्लास्टोमा
टीएमयू के डेंटल हॉस्पिटल में किशन की सीवीसीटी जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि उसके दायीं ओर के निचले जबड़े की हड्डी काफी हद तक नष्ट हो चुकी थी। इसके बाद बायोप्सी की गई, जिसमें अमेलोब्लास्टोमा नामक ट्यूमर की पुष्टि हुई।
चिकित्सकों के अनुसार अमेलोब्लास्टोमा कैंसर नहीं होता, लेकिन यह जबड़े की हड्डी में तेजी से फैलने वाला ट्यूमर है। शुरुआती दौर में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होने के कारण मरीज को इसकी जानकारी देर से होती है। समय पर उपचार न होने पर यह जबड़े की हड्डी को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है।
पैर की हड्डी से तैयार किया नया जबड़ा
किशन के मामले में चिकित्सकों ने प्रभावित निचले जबड़े को निकालकर पैर की फिबुला हड्डी से नया जबड़ा तैयार किया। इस सर्जरी के दौरान डॉक्टरों के सामने कई चुनौतियां थीं। इनमें मस्तिष्क और जबड़े से जुड़ी महत्वपूर्ण नसों को सुरक्षित रखना, रक्तस्राव को नियंत्रित करना, स्वस्थ दांतों और टिश्यू को बचाना तथा पैर से फिबुला हड्डी निकालते समय उसे क्षतिग्रस्त होने से बचाना प्रमुख था।
टीएमयू की चिकित्सकीय टीम ने इन चुनौतियों के बीच करीब पांच घंटे में सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया।
आयुष्मान योजना के तहत पूरी सर्जरी निशुल्क
इस दुर्लभ सर्जरी की एक खास बात यह भी रही कि किशन का इलाज आयुष्मान योजना के तहत पूरी तरह निशुल्क किया गया। भर्ती से लेकर जांच, ऑपरेशन और दवाइयों तक की सुविधाएं बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई गईं। चिकित्सकों के मुताबिक, निजी स्तर पर इस तरह की सर्जरी में करीब दो से तीन लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है।
प्रो. दीपक ठाकुर की अगुवाई में हुई सर्जरी
सर्जरी टीएमयू के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के हेड प्रो. दीपक ठाकुर की अगुवाई में की गई। टीम में डॉ. नकुल चौधरी, डॉ. शुभम मिश्रा, डॉ. मीमांषा दफ्तरी के साथ पीजी रेजीडेंट्स डॉ. श्रेया चटर्जी, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, डॉ. रूषभ राउत और डॉ. शुभांगी गोयन शामिल रहे।
डेंटल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. प्रदीप तांगडे और वाइस प्रिंसिपल डॉ. अंकिता जैन ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह रेयर और कॉम्प्लिकेटेड सर्जरी थी। इस तरह की सर्जरी देश के चुनिंदा बड़े अस्पतालों में ही होती है और टीएमयू में इसका सफलतापूर्वक होना संस्थान के लिए गर्व की बात है।
19 साल में 1500 से अधिक ऑपरेशन
विभागाध्यक्ष प्रो. दीपक ठाकुर के अनुसार, उन्हें मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के क्षेत्र में करीब 19 वर्षों का अनुभव है और अब तक वह लगभग 1500 ऑपरेशन कर चुके हैं। किशन की सर्जरी भी इसी विशेषज्ञता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसमें चिकित्सा तकनीक के साथ मरीज की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए आयुष्मान योजना के जरिए उसे निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया गया।


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