आसपा नेता बदर अली का विवादित बयान, बोले- ‘इतनी ताकत दे दो कि टोपी को हाथ लगाने से पहले 10 बार सोचें’

केसरगंज की जनसभा में भाजपा, आरएसएस और बजरंग दल को लेकर टिप्पणी; हिंदू संगठन ने जताया विरोध

मेरठ। आजाद समाज पार्टी (आसपा) के नेता बदर अली का केसरगंज में आयोजित जनसभा के दौरान दिया गया बयान विवादों में आ गया है। बदर अली ने मंच से कहा कि “जिस दिन आपने हमारे हाथों को ताकत दे दी, उस दिन भाजपा, आरएसएस और बजरंग दल वाले किसी भी टोपी को हाथ लगाने से पहले 10 बार सोचेंगे।” बयान का वीडियो सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने इसका विरोध किया है।

अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने बयान पर नाराजगी जताते हुए कहा कि संगठनों के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बदर अली पर राजनीति चमकाने के लिए विवादित बयान देने का आरोप लगाया।

चंद्रशेखर आजाद ने कराई थी पार्टी में एंट्री

बदर अली ने हाल ही में आजाद समाज पार्टी में सक्रिय रूप से राजनीति शुरू की है। पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाषचंद्र बोस प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद थे।

मेरठ शहर सीट से चुनाव की तैयारी

बदर अली को आजाद समाज पार्टी की ओर से मेरठ शहर विधानसभा सीट के लिए प्रभारी/प्रत्याशी के तौर पर आगे किया गया है। वह पिछले कई महीनों से क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा रहे हैं। मेरठ शहर सीट पर वर्तमान में समाजवादी पार्टी के रफीक अंसारी विधायक हैं।

शहर सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी संख्या होने के कारण यह सीट राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। भाजपा की ओर से भी कई नेता इस सीट पर दावेदारी कर रहे हैं।

बदर अली पर कई मुकदमे दर्ज होने का दावा

बदर अली को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, मेरठ और गाजियाबाद के विभिन्न थानों में उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। इनमें बलवा, धमकी और अन्य गंभीर धाराओं से जुड़े मामले शामिल बताए जाते हैं।

जानकारी के मुताबिक, मार्च 2021 में आजाद समाज पार्टी ने अनुशासनहीनता का हवाला देते हुए बदर अली को पार्टी से निष्कासित किया था। बाद में 16 अक्टूबर को उन्होंने समर्थकों के साथ दोबारा पार्टी में वापसी की।

फिलहाल जनसभा में दिए गए बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।

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