राष्ट्र प्रथम अब केवल भावना ही नहीं यह भारत की जीवन धारा बन चुकी है-हरवीर पाल

रजपुरा ब्लॉक मेंं डा़. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जंयती परकार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन 

मेरठ। जनपद मेरठ के रजपुरा ब्लॉक के महाराणा प्रताप सभागार में, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती संस्मरण पखवाड़ा, कार्यकर्ता सम्मेलन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता क्षेत्रीय मंत्री अनूप बाल्मीकि उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि विमल शर्मा चेयरमैन कॉपरेटिव बैंक मेरठ उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष हरवीर सिंह पाल ने की।  बैठक का संचालन जिला उपाध्यक्ष, कार्यक्रम संयोजक अतुल त्यागी ने किया।

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 125वे जयंती वर्ष के अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ने कहा,

 डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में एक बंगाल परिवार में हुआ। उनके पिता आशुतोष मुखर्जी एक प्रख्यात न्यायाधीश,शिक्षाविद और कोलकाता विश्वविद्यालय कुलपति थे। 33 वर्ष की आयु में डॉ मुखर्जी कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। 

उन्होंने महिला शिक्षा,कृषि एवं विज्ञान जैसे कौशल आधारित विषयों को प्रोत्साहित किया। वर्ष 1937 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। और बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता बने, जो बिना किसी पार्टी तंत्र के भी उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और लोकप्रियता का प्रमाण था। वह वर्ष 1941 में बंगाल के वित्त मंत्री बने। 

वर्ष 1950 में नेहरू लियाकत समझौते का कड़ा विरोध किया  और 6 अप्रैल 1950 को नेहरू के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया।

अनुच्छेद 370 का विरोध और सर्वोच्च बलिदान डॉ मुखर्जी ने इस देश के लिए किया। परमिट व्यवस्था के खिलाफ में 1953 में उन्होंने अन्यायपूर्ण कानून की जानबूझकर और सचेत अवहेलना करते हुए,बिना परमिट जम्मू कश्मीर की सीमा पार की 11 में 1953 को उनको गिरफ्तार किया गया। 45 दिनों तक उनको हिरासत में रखा गया। वहां वह गंभीर रूप से बीमार हो गए  और उपचार नहीं दिया गया 23 जून 1953 को उनका निधन हो गया। 

द्वितीय वक्त के रूप में विमल शर्मा ने कहा केंद्रीय मंत्री के रूप में डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का योगदान डॉ मुख़र्जी अंतरिम केंद्रीय सरकार में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में शामिल हुए। यदि वह कांग्रेस के सदस्य नहीं थे। लेकिन उनकी क्षमता ईमानदारी और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए सरदार पटेल जैसे नेताओं ने सरकार ने उनकी समावेश का समर्थन किया, और महत्वपूर्ण मंत्रालय में राष्ट्रीय निर्माण के महत्वपूर्ण चरण में सबसे उपयुक्त व्यक्ति माना, उन्होंने आधुनिक भारत में स्वतंत्र भारत की औद्योगिक व्यवस्था की बुनियाद संस्था खड़ी कर दी। क्योंकि  वे संविधान सभा के सदस्य भी रहे। 

भारत का पहला औद्योगिक नीति प्रस्ताव 6 अप्रैल 1948 को आया, भारत सरकार के ऐतिहासिक संकल्प के माध्यम से देश की पहली औद्योगिक नीति की रूपरेखा तैयार की, उनकी मूल विश्वास था,भारत को राष्ट्रीय रक्षा के लिए आवश्यक वस्तु के उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए निजी एवं सरकारी दोनों संसाधनों को एक सहकारी प्रयास में लाना चाहिए। वे एक बेदाग मंत्रिमंडल का कीर्तिमान उन्होंने स्थापित किया। उनका प्रशासनिक प्रसंग पूरी तरह से निष्कलंक और पारदर्शी था।

 भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में जिला अध्यक्ष हरवीर पाल ने कहा, वर्ष 1950 तक डॉ मुखर्जी के सामने एक ए सहज, राजनीतिक, वास्तविकता खड़ी थी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सामने देश में कोई विश्वसनीय संगठित और राष्ट्रवादी विकल्प मौजूद नहीं था। उन्हें राष्ट्र को उनकी दृष्टि से अनुरूप एक मंच की आवश्यकता थी, इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना की। जनसंख्या वैचारिक स्तंभ थे, राष्ट्र सांस्कृतिक, राष्ट्रवाद,राष्ट्रीय,एकीकरण ,स्वदेशी, अर्थशास्त्र, हिंदी को बढ़ावा देना, अखंड भारत की भावना और सभी नागरिकों को पूर्ण समानता। 1952 में स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनाव में पार्टी को तीन सीट मिली, जिसमें खुद डॉक्टर मुखर्जी भी शामिल थे, उन्होंने अनुजछेद 370 को हटाने की मांग को लेकर एक विशाल देश व्यापी सत्याग्रह किया। वर्ष 1993 में डॉक्टर मुखर्जी के सर्वोच्च बलिदान के बाद जनसंघ पंडित दीनदयाल उपाध्याय,श्री अटल बिहारी वाजपेई और  एल के आडवाणी जैसे महान नेताओं के संरक्षण में निरंतर आगे बढ़ता रहा। वर्ष 1977 में देश में आपातकाल के समय लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनसंघ का जनता पार्टी में विलय हो गया, और इसके बाद 1980 में भारतीय जनता पार्टी का जन्म हुआ। उनके द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत एक राष्ट्र एक संविधान स्वदेशी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और एकात्मक मानवाद आज भी भाजपा के जीवन मूल्य बने हुए हैं।

राष्ट्र प्रथम अब केवल भावना ही नहीं यह भारत की जीवन धारा बन चुकी है। 

भाजपा का संगठनात्मक विस्तार भाजपा द्वारा लाया गया परिवर्तन सेवा भाव,अंतोदय विकास उन्मुख राजनीति एवं राष्ट्रप्रथम की भावना को रखना है। उनके बलिदान के बाद अनुच्छेद 370 को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। गया एक संविधान एक निशान और एक प्रधान डा मुखर्जी का नारा अभी देश का कानून बन चुका है। भारत का संविधान अब जम्मू कश्मीर पूरी तरीके से लागू है।

इस अवसर पर उपस्थित कार्यकर्ता,जिला अध्यक्ष हरवीर सिंह पाल, क्षेत्रीय मंत्री अनूप वाल्मीकि, पूर्व विधायक सत्यवीर त्यागी, रणवीर राणा, कोऑपरेटिव सोसाइटी के अध्यक्ष विमल शर्मा, जिला महामंत्री भंवर सिंह तोमर, हरीश चौधरी, समीर चौहा,जिला उपाध्यक्ष फ़िरेराम धनतला,अतुल त्यागी, संजीव बंसल,जिला मंत्री,विमला जाटव, ब्रजवीर सैनी,जिला मीडिया प्रभारी संजीव आदि मौजूद रहे। 

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