सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद मेरठ में अवैध निर्माण खड़े, नई उपविधि की आड़ में बिना अनुमति हुआ निर्माण
भू-उपयोग परिवर्तन के हजारों आवेदन लखनऊ भेजकर अधिकारी जिम्मेदारी से बचते रहे; अब ध्वस्तीकरण का खतरा
मेरठ। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद शहर में कई अवैध निर्माण अभी भी खड़े हैं। आवास विकास परिषद की नई उपविधि-2025 के प्रावधानों का लाभ उठाकर निर्माणकर्ताओं ने भू-उपयोग परिवर्तन के लिए आवेदन किए और उसी प्रक्रिया की आड़ में बिना अंतिम अनुमति के निर्माण भी शुरू कर दिया। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस उपविधि को मान्यता न दिए जाने के बाद इन निर्माणों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का खतरा बढ़ गया है।
आवास विकास परिषद ने 2025 में नई उपविधि लागू की थी। इसके तहत निर्धारित शमन शुल्क जमा कर आवासीय भूखंडों को व्यावसायिक उपयोग में बदलने की अनुमति मिल सकती थी। इस प्रावधान के बाद भूखंड स्वामियों ने बड़ी संख्या में आवेदन दाखिल किए। आवेदनों की संख्या हजारों में बताई जा रही है।
कई आवेदन आगे की कार्रवाई के लिए लखनऊ भेज दिए गए। इस बीच कुछ भूखंड स्वामियों ने यह मान लिया कि अनुमति जल्द मिल जाएगी। उन्होंने अंतिम स्वीकृति का इंतजार किए बिना ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया। कई स्थानों पर निर्माण पूरा भी हो चुका है।
जब इन निर्माणों की शिकायत अधिकारियों से की गई तो उन्होंने यह कहकर जिम्मेदारी से किनारा कर लिया कि “आवेदन लखनऊ भेजे जा चुके हैं। निर्णय वहीं से होगा।” इस कारण निर्माणकर्ताओं को अप्रत्यक्ष राहत मिलती रही और अवैध निर्माण बढ़ते गए।
अब स्थिति बदल गई है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में नई उपविधि को स्वीकार नहीं किया गया। कोर्ट के रुख के अनुसार, निर्माण उसी उपयोग और स्वरूप के अनुरूप होना चाहिए, जिस स्थिति में नक्शा स्वीकृत हुआ था। बिना अनुमति भू-उपयोग बदलकर किए गए निर्माणों पर कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।
आवास विकास परिषद के अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और अगली सुनवाई सितंबर में प्रस्तावित है। ऐसे में सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।


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