जिलाधिकारी को जिला अस्पताल के निरीक्षण में खामियां ही खामियां
मरीजों को लिखी जा रही बाहर की दवा, 4 महीने से स्टॉक रजिस्टर खाली
मेरठ। शनिवार को जिलाधिकारी के जिला अस्पताल के निरीक्षण में अस्पताल की पोल खुलकर सामने आ गयी। अस्पताल में भर्ती मरीजों को बाहर से लिखी जा रही है। रजिस्ट्रर चैक करने पर चार माह से रजिस्टर खाली मिला। जिलाधिकारी ने एसआईसी समेत चिकित्सकों को जमकर हड़काते हुए व्यवस्थाओं को ठीक करने के निर्देश दिये।
शनिवार दोपहर 12 बजे जिला अधिकारी डॉ वीके सिंह ने सीएमओ डॉ रामप्रसाद के साथ औचक निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान जब उनको अस्पताल में खामिया मिली तो अस्पताल के एसआईसी समेत अन्य संबंधित अधिकारियों को खूब फटकार भी लगाई।वहीं जिला अधिकारी द्वारा व्यवस्थाओं के लेकर पूछे गए सवालों का जवाब देने में भी अस्पताल प्रबंधन असमर्थ दिखा।
निरीक्षण के दौरान जिला अधिकारी ने सबसे पहले इमरजेंसी वार्ड में मरीजों से बातचीत कर इलाज, दवाओं की उपलब्धता तथा अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। कई मरीजों ने बताया कि उन्हें बाहर से दवाएं लिखी जा रही हैं। इस पर अधिकारियों ने अस्पताल के संबंधित चिकित्सकों और प्रभारी को निर्देश दिए कि यदि कोई दवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं है तो संबंधित डॉक्टर से समन्वय कर मरीज को वैकल्पिक उपलब्ध दवा दी जाए। यदि किसी दवा का विकल्प भी उपलब्ध नहीं है, तभी नियमानुसार बाहर की दवा लिखी जाए। शासन की मंशा के अनुरूप मरीजों को अस्पताल से ही अधिकतम दवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मिली। इस पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ नोटिस जारी कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने अस्पताल के फार्मेसी स्टोर का भी निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि स्टॉक रजिस्टर में पिछले 20 से 25 दिनों से कोई एंट्री नहीं की गई थी। इससे दवाओं का मिलान करने में परेशानी हुई। अधिकारियों ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को आंतरिक जांच कराने और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
स्टॉक रजिस्टर खाली देख जताई नाराजगी
जिला अधिकारी जब अस्पताल की किचन में पहुंचे और बर्तन के साथ- साथ स्टॉक देखा तो किचन में स्टॉक रजिस्टर का रखरखाव नहीं मिला। इसके साथ ही केवल एक समय के भोजन का सामान मौजूद पाया गया। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि आवश्यक खाद्य सामग्री का पर्याप्त स्टॉक रखा जाए ताकि किसी भी परिस्थिति में मरीजों के भोजन की व्यवस्था प्रभावित न हो। साथ ही खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और मात्रा की भी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया।
रजिस्टर में चार महीने से नहीं साइन
निरीक्षण के दौरान किचन प्रभारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे। जिलाअधिकारी के मांगने पर जब स्टोर के प्रभारी रजिस्टर लेकर पहुंचे तो उसमें पिछले चार महीने से साइन नहीं मिले। इसके बाद जिला अधिकारी ने SIC को सख्त निर्देश दिए कि इतने गैर जिम्मेदार व्यक्ति को ऐसे महत्वपूर्ण पद से तत्काल हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई महीनों तक स्टॉक रजिस्टर पर हस्ताक्षर तक नहीं किए जाने से स्पष्ट है कि व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग नहीं हो रही थी।
जिला अधिकारी के निरीक्षण के दौरान डाइट का पूछा तो बताया गया कि आज 125 मरीज और उनके 1-1 तीमारदार का खाना बनना है , जिसके बाद वहां रखी कटी हुई सब्जी को तौला गया तो वह कुल साढ़े नौ किलो मिली जो प्रार्याप्त नहीं थी। जिला अधिकारी ने कहा कि मरीजों के स्वास्थ से खिलवाड़ करने वाले सभी लोगों पर कार्रवाई करना प्रबंधन सुनिश्चित करे और जल्द से जल्द मुझे रिपोर्ट दी जाए कि व्यवस्था को सुधारने के लिए क्या क्या कदम उठाए गए।


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