मेरठ दक्षिण सीट पर सपा में टिकट की जंग तेज, कई दावेदारों ने ठोकी ताल
मेरठ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) में टिकट की दौड़ तेज हो गई है। जिले की सातों विधानसभा सीटों में सबसे अधिक दावेदार इसी सीट पर सक्रिय हैं, जिससे पार्टी नेतृत्व के सामने उम्मीदवार चयन की चुनौती बढ़ गई है। जातीय समीकरण, संगठन में स्वीकार्यता, चुनावी प्रदर्शन और संभावित गठबंधन को टिकट वितरण में अहम आधार माना जा रहा है।
मेरठ दक्षिण सीट पर टिकट की दौड़ में सपा महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी सबसे प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। वह इस सीट से दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। पिछला चुनाव उन्होंने भाजपा के विधायक सोमेंद्र तोमर के खिलाफ कड़े मुकाबले में लड़ा था और करीब 7,942 वोटों से हार गए थे। उनके खाते में 1,21,725 वोट आए थे, जिससे उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।
इसके अलावा सपा जिलाध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुमी, डॉ. किशन पाल गुर्जर, मुखिया गुर्जर और जितेंद्र गुर्जर भी टिकट की दौड़ में बताए जा रहे हैं। वहीं, यदि पूर्व विधायक योगेश वर्मा को हस्तिनापुर विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिलता है तो वह भी मेरठ दक्षिण से मजबूत दावेदार बन सकते हैं।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन होता है तो कांग्रेस भी इस सीट पर अपनी दावेदारी पेश कर सकती है। हाल ही में पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना की सक्रियता को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अधिक दावेदार होना पार्टी की सक्रियता का संकेत है, लेकिन इससे गुटबाजी और अंतर्कलह का खतरा भी बढ़ सकता है। यदि टिकट वितरण के बाद असंतोष उभरता है तो इसका असर चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
जानकारों के अनुसार टिकट उसी नेता को मिलने की संभावना अधिक है जो मजबूत जातीय समीकरण साधने, मुस्लिम, दलित और ओबीसी मतदाताओं के बीच प्रभाव रखने, संगठन में स्वीकार्य होने और विवादों से दूर रहने की कसौटी पर खरा उतरे। इन मानकों के आधार पर आदिल चौधरी और योगेश वर्मा के नाम सबसे अधिक चर्चा में बताए जा रहे हैं।
हालांकि, अंतिम फैसला समाजवादी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा और उम्मीदवार की घोषणा के बाद ही मेरठ दक्षिण सीट का चुनावी समीकरण पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगा।


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