बरखा रानी जरा थम के बरसो...!
- ललिता जोशी
सावन यानि वर्षा ऋतु का मौसम । सावन का मौसम और बरसात दोनों का दोस्ताना है । सावन की जान है बरखा । बारिश का पानी तो सारी सृष्टि को नवजीवन प्रदान करता है। नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है और सूखी हुई नदियों में जल का प्रवाह देखते ही बनता है । बरखा बरसे तो प्रेमियों का मन मयूर नाचने लगता है । इतना ही नहीं इन्सानों, जानवर और पेड़ पौधों को तप्ति धरती और आग बरसाते आसमान से राहत मिल जाती है ।
राहत तो मिलती है लेकिन पी डब्लू डी और अन्य सिविक एजेंसियां की आफत आ जाती है । सड़कों पर ताल तलैया बन जाती हैं । सड़कों पर गड्ढे, टूटते हाइवे, बाढ़ बारिश से ढहते पुल, बारिश के कारण हाइटेंशन तारों से बिजली के कारण होने वाली मौतें, ट्रेफिक जाम और स्वास्थ्य संबंधी अनेक समस्याएँ । बरखा आई तो राहत के साथ आफत भी लाई । वैसे बरखा रानी तो बहुत से त्योहार और महादेव के पूजन अर्चन की सौगात लेकर आती है । पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है ।
भक्तों और प्रेमियों को ये मौसम बहुत प्रिय है । इस समय प्रकृति अपने यौवन पर होती है । हरियाली की छटा देखते ही बनती है । पशु-पक्षियों को भी ये मौसम भाता है और इनका उल्लास देखते ही बनता है । चलो इस मौसम का आनंद इस सृष्टि के प्राणी ले रहे हैं । इस मौसम का लाभ किसानों की फसलों को भी मिलता है । कुल मिला कर कहा जा सकता है कि सभी को बरखा रानी का आनंद मिलता है ।एक गीत है’ बरखा रानी जरा जम के बरसो मेरा दिलबर जा ना पाये झूमकर बरसो’ प्रेमियों की ये पुकार सुनकर जब बरखा रानी जम कर बरसती है तो फिर सारा सिस्टम अलर्ट मोड पर आ जाता है । कहीं पर उफनती नदियों और बरसाती नालों में लोग फंस जाते हैं और अपनी जान बचाने के लिए मदद की गुहार लगाते हैं । आपदामोचन के लोग अपनी ड्यूटी बड़ी मुस्तैदी करते हैं । कहीं पर बारिश का पानी रौद्र रूप लेकर पहाड़ों को सड़कों पर गिरा देता है तो कहीं पर पुल नदियों में बह जाते हैं, तो कहीं नदियों के मुहाने पर घर भी नदियों की गिरफ्त में आ जाते हैं। गाडियाँ पानी में ताश के पत्तों की तरह बह जाती हैं । हवाई अड्डों पर जब बरखा रानी की कृपा से पानी भर जाता है तो फ्लाइट जमीन पर ही खडी रह जाती है । ट्रेन लेट ,सड़क पर ट्रेफिक जाम का जाम छलकता है ।
हे बरखा रानी हम सिविक एजेंसी वाले आप से नम्र निवेदन करतेहैं कि आप जरूर बरसें क्योंकि आपकी आमद पर सारी सृष्टि निर्भर रहती है,लेकिन आप जब भी बरसो आप नेताओं और उन ठेकेदारों का ध्यान रखें जिन्होंने हजारों वृक्ष काटकर विकास के प्रतीक बड़े -बड़े फ्लाईओवर ,पुल और एक्सप्रेस हाइवे बनाएँ हैं । आप जमकर नहीं थोड़ा थम कर बरसें । आपके थम कर बरसने ये टूटे और बहेंगे नहीं । टैक्सपेयर के पैसे से बने विकास के ये प्रतीक जब क्षतिग्रस्त होते हैं तो मीडिया में हमारी पोल खुल जाती है और जनता को जवाब देना भारी पड़ता है ।
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हे बरखा रानी आपका आगमन तो सभी को प्रफुल्लित करता है लेकिन आपके आने से हम तो डरते हैं क्योंकि आप हमारे उत्कृष्ट कार्यों की पोल खोल दोगी । वैसे हम डरने वाले तो नहीं हैं लेकिन लोकलाज के लिए तो हमें भी डर का दिखावा करना पड़ता है । वैसे तो काम ठीक-ठाक क्वालिटी का करते हैं लेकिन भूल -चूक तो हो ही जाती है । वैसे पहले की बिलबुक में लिखा रहता था कि भूल-चूक लेनी देनी माफ । मगर अब सब भुगतान ऑन लाइन होता है तो ये सब लिखा नहीं होता। इसीलिए तो उपभोक्ता यानि पुल ,एक्सप्रेस वे और हाइवे का इस्तेमाल करने वालों को पता है नहीं है । इसीलिए तो सब भौकाल मचाते हैं ।
हे बरखारानी! बस एक ही प्रार्थना है आप जब भी बरसें तो येलो, ओरेंज अलर्ट के साथ न बरसें । हे देवी आप जब भी बरसें तो थम कर बरसें न कि जम के बरसें।
(मुनिरका एन्क्लेव, दिल्ली)





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