ट्रस्ट तो ट्रस्ट है


- ललिता जोशी
आजकल ट्रस्ट बड़ी चर्चा में है। ट्रस्ट यानि विश्वास, आस्था और भरोसा । ट्रस्ट का एक और मतलब है न्यास । ट्रस्ट के दोनों ही रूप बहुत महत्वपूर्ण हैं। किसी भी रिश्ते की नींव ट्रस्ट पर ही बनती है । ठीक ऐसे ही जब कोई ट्रस्ट बनाया जाता है तो वो इस ट्रस्ट पर बनाया जाता है कि सभी कार्य  नियमानुसार किए जाएंगे।

वास्तव में ऐसा होता है क्या ? यह एक यक्ष प्रश्न ! अभी श्री राममंदिर ट्रस्ट चर्चा में । हमारे देश में रामलला के लिए काफी बड़ी लड़ाई लड़ी गई । तब कहीं जाकर भव्य और दिव्य मंदिर बनाया गया । भक्तों का अपने आराध्य के प्रति समर्पण देखते ही बनता है । प्रत्येक भक्त का अपने भगवान को प्रसन्न करने या अपना भक्ति भाव दिखाने का एक तरीका होता है । कोई भक्त कभी उन्हें भोग लगता है तो कभी उन्हें चढ़ावा चढ़ाता है । ये चढ़ावा रुपया पैसा और कीमती धातुओं , कीमती रत्न और पोशाकों  के रूप में होता है। भक्त अपने खून -पसीने की कमाई से पाई -पाई जोड़कर भगवान को सप्रेम बड़े भाव से चढ़ावा अर्पित करते हैं । भक्त चढ़ावे के कारण भगवान के साथ प्रत्यक्ष रूप से संबंध स्थापित करता है। वो स्वयं को धन्य समझता है । पवित्रता के भाव से कोई भाव बड़ा नहीं है। किसी भी भाव ,स्थान और आस्था की पवित्रता को कलुषित करने से बड़ा कोई अपराध नहीं है । इससे ट्रस्ट यानि विश्वास बिल्कुल समाप्त हो जाता है । एक बार विश्वास उठ जाए तो उसे दोबारा बनाना अत्यंत कठिन हो जाता है । एक कहावत है ना दूध का जला छाछ को भी फूंक-फूंक कर पीता है ।

ट्रस्ट के कार्मिकों और अधिकारियों ने दान चोरी  की ।  राम और रामभक्तों के ट्रस्ट को छलनी- छलनी करने वाले लोग अब जांच के दायरे में हैं लेकिन जो दानदाता मंदिर बनने के बाद दिल और अपनी भावनाओं के साथ दानपेटी में दान दे रहे थे उनकी भावनाएं जो आहत हुई हैं उसके लिए कौन जिम्मेदार है ? अब देश के प्रत्येक राज्य से खबरें आ रही हैं कि भक्तों ने  सोने और चाँदी से बनी जो वस्तुएं दी थी उसकी कोई रसीद प्राप्त नहीं हुई । न जाने कब से गड़बड़ झाला चल रहा होगा । दान का हिसाब -किताब रखने वाले मस्त, दाता पस्त । वैसे दान लुटेरों ने तो भगवान को भी नहीं छोड़ा । भगवान के चौकीदार बने इन लोगों ने भगवान की अमानत में खयानत की ।
सारे नेशनल टी वी चैनल राम मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्ट ऑफ ब्रिच के समाचार को  अपनी  सुर्खियों में दिखा रहे हैं । जिस मंदिर को  न जाने कितने संघर्षों से बनाया गया । राम भक्तों ने इस मंदिर के लिए अपने प्राणों की आहुति भी दी। इसीलिए मर्यादा पुरुषोत्तम राम आज भी  असंख्य लोगों की आस्था के केंद्र हैं। ये वो लला जिन्हें एक आदर्श व्यक्तित्व के रूप में आज भी जाना -माना जाता है और पूजा भी जाता है ।

करोड़ो लोगों की आस्था राम मंदिर से जुड़ी हुई है । भक्तों द्वारा दिया जाने वाला दान चोरों के झोले में जा रहा था । जब भक्तों को ये मालूम हुआ तो उन्होने स्वयं को ठगा से महसूस किया । बेचारे भक्त तो भगवान कोअपना तन -मन -धन निश्चल भाव से समर्पित करते हैं । मंदिर के चढ़ावे के गणना करने वाले कैमरे की डाइरैक्शन बदल कर चढ़ावे की चोरी करते थे । वैसे तो सभी कहते हैं कि ऊपरवाला देखता है ,लेकिन ऊपरवाले से भी ऊपर हैं, ऊपरवाले की सेवा करने वाले ये सेवादार ।

ये कैसा ट्रस्ट है जहां श्री राम पर चढ़ाया जाने वाला चढ़ावा ही सुरक्षित नहीं है। बेचारे भक्त क्या ही करें ? इनका भगवान पर तो भरोसा है लेकिन ट्रस्ट पर अब भक्तों का ट्रस्ट समाप्त हो रहा है । ट्रस्ट पर ट्रस्ट बना रहना महत्वपूर्ण है।

वैसे राममंदिर ट्रस्ट नया बना है और इसी मंदिर के मुद्दे पर राजनीतिक दल की जीत हुई ।जिससे लाखों लोगों की आस्था जुड़ी हुई  है । वैसे धर्मस्थानों पर अनाधिकृत गतिविधियां होती ही रहती हैं । कभी दर्शनों के नाम पर तो कभी प्रसाद के नाम पर । शायद सेवादार भगवान पर अपना कॉपीराइट समझते हैं कि वो चाहे जो भी करेंगे भगवान बुरा नहीं मानेंगे क्योंकि वही भगवान के लाडले हैं इसीलिए वो उनके साथ जो चाहे वो कर सकते हैं । वैसे ही आजकल कलयुग चल रहा है और इस काल में धर्म के नाम पर जो कुछ हो रहा है वो सब कम है । अगर भक्तों का ट्रस्ट अगर ट्रस्ट पर से उठ गया तो ट्रस्टी क्या करेंगे । किसी ने सही ही कहा है कि :
सबसे
बड़ा पाप है विश्वासघात .....।
किसी के पीठ पीछे धोखा करके ये
ये मत सोचो कि मैंने उसे पागल
बना दिया ......।
बल्कि ये सोचो कि उसने आपके
ऊपर भरोसा किया था
और आपने उसके भरोसे के साथ
क्या कर दिया ......।
(मुनिरका एन्क्लेव, दिल्ली)

No comments:

Post a Comment

Popular Posts