नाले की क्षमता घटने से जलभराव की स्थिति बनी 

जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों का विधायक अमित अग्रवाल ने किया निरीक्षण

व्यापारियों के नुकसान के बाद अधिकारियों को स्थायी समाधान के निर्देश

मेरठ। शहर में हाल ही में हुई जलभराव की गंभीर समस्या को लेकर कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने अधिकारियों एवं व्यापारियों के साथ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने जलभराव के कारणों की जानकारी लेते हुए भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान व्यापारियों ने बताया कि दैनिक जागरण से लेकर शताब्दी मेट्रो स्टेशन होते हुए पेट्रोल पंप तक जाने वाले मुख्य नाले की क्षमता पहले अधिक थी। व्यापारियों का आरोप है कि पुराने करीब 5 मीटर चौड़े नाले को बंद कर स्टेशन के नीचे लगभग 2.5 मीटर चौड़ा नाला बना दिया गया, जिससे पानी के प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो गई। इसके अलावा नाले के मेनहोल अधिक दूरी पर होने के कारण सफाई कार्य भी मुश्किल हो गया है।

व्यापारियों ने बताया कि जल निकासी बाधित होने के कारण अमर उजाला, दैनिक जागरण, नई मंडी क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में करीब दो-दो फुट तक पानी भर गया। इससे व्यापारियों और आढ़तियों को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।

कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त, स्वास्थ्य अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के एई, व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता, अनिल अग्रवाल (टी), सुधीर रस्तौगी, अंकित गुप्ता, मनोज गुप्ता प्रधान, नवीन मंडी के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं व्यापारियों के साथ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया।

इस दौरान नवीन मंडी स्थित व्यापारिक प्रतिष्ठानों, परतापुर की ओर जाने वाले नाले, मेवला फाटक अंडरपास, अमर उजाला कार्यालय के बाहर, दैनिक जागरण कार्यालय के बाहर तथा संजय वन से शताब्दी नगर मेट्रो स्टेशन तक जल निकासी व्यवस्था का जायजा लिया गया।

विधायक अमित अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि केवल बारिश के समय राहत कार्य करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नालों की क्षमता, जल निकासी मार्गों और सफाई व्यवस्था की तकनीकी जांच कर प्रभावी योजना बनाई जाए।

उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे भविष्य में व्यापारियों, आढ़तियों और आम नागरिकों को जलभराव के कारण आर्थिक नुकसान और परेशानी का सामना न करना पड़े।

निरीक्षण के दौरान नालों की सफाई, जल प्रवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने और आवश्यक सुधार कार्यों को लेकर अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए।

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