सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण मामला
आदेश की सीमा को लेकर असमंजस, व्यापारियों ने मांगी स्थिति स्पष्ट करने की जानकारी मांगी
सेटबैक क्षेत्र पूरी तरह खाली होगा या केवल रैलिंग हटेगी? वीडियोग्राफी के दायरे पर भी उठे सवाल
मेरठ। सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन को लेकर कार्रवाई की सीमा स्पष्ट करने की मांग तेज हो गई है। व्यापारियों और भवन स्वामियों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि न्यायालय के निर्देश के तहत केवल भवनों के बाहर किए गए अस्थायी या बाहरी निर्माण हटाए जाने हैं या फिर अवैध रूप से कब्जाए गए पूरे सेटबैक क्षेत्र को खाली कराया जाना है।
मामले में प्रस्तावित वीडियोग्राफी को लेकर भी व्यापारियों ने स्पष्टता की मांग की है। उनका कहना है कि यह बताया जाना चाहिए कि वीडियोग्राफी केवल भवनों के बाहरी हिस्सों और सेटबैक क्षेत्र तक सीमित रहेगी या इसमें भवनों के अंदरूनी हिस्सों को भी शामिल किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि कई भवन स्वामियों ने सेटबैक छोड़ने की प्रक्रिया के तहत आगे लगी रैलिंग और बाहरी अवरोध हटाए हैं, लेकिन कुछ स्थानों पर वास्तविक रूप से घेरा गया सेटबैक क्षेत्र अभी भी खाली नहीं हुआ है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या केवल रैलिंग हटाना न्यायालय के आदेश का पालन माना जाएगा या निर्धारित सेटबैक क्षेत्र को पूरी तरह मुक्त करना आवश्यक होगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार में कई ऐसे भवन भी हैं, जिन पर न्यायालय के आदेशों के पूर्ण पालन नहीं करने के आरोप हैं। ऐसे भवनों की स्थिति का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति को रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग की जा रही है।
व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की स्पष्ट व्याख्या सार्वजनिक की जाए और कार्रवाई एक समान नीति के आधार पर की जाए। उनका कहना है कि सभी संबंधित भवनों पर समान मानदंड लागू होने चाहिए, ताकि किसी भी पक्ष के साथ भेदभाव की स्थिति न बने और भविष्य में विवाद की संभावना को रोका जा सके।


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