ड्रोन टेक्नोलॉजी में करियर की ऊंची उड़ान

कुछ वर्ष पहले तक ड्रोन केवल युद्ध और सुरक्षा से जुड़ी तकनीक माने जाते थे, लेकिन आज यह कृषि, उद्योग, फिल्म निर्माण, पत्रकारिता, आपदा प्रबंधन, चिकित्सा सेवाओं, ई-कॉमर्स और आधारभूत संरचना के विकास का महत्वपूर्ण उपकरण बन चुके हैं। भारत में भी ड्रोन तकनीक तेजी से विस्तार कर रही है और इसके साथ ही प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में ड्रोन टेक्नोलॉजी युवाओं के लिए सबसे आकर्षक कैरियर क्षेत्रों में से एक बन सकती है।

ड्रोन का इतिहास

ड्रोन, जिसे अनमैन्ड एरियल व्हीकल कहा जाता है, ऐसा विमान है जिसे पायलट के बिना दूर से नियंत्रित किया जाता है या जो तय निर्देशों के अनुसार स्वतः उड़ान भर सकता है। ड्रोन के विकास के पीछे अनेक वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का लगभग एक शताब्दी लंबा शोध और तकनीकी विकास रहा है। साल 1918 में अमेरिका ने ‘केटरिंग बग’ नामक स्वचालित उड़ान यान बनाया, जिसे आधुनिक ड्रोन का प्रारंभिक स्वरूप माना जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इनका उपयोग मुख्यतः सैन्य अभ्यास और निगरानी के लिए किया गया। बाद में कंप्यूटर, जीपीएस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेंसर और कैमरा तकनीक के विकास ने ड्रोन को नई पहचान दी। आज छोटे कैमरा ड्रोन से लेकर सैकड़ों किलोग्राम भार उठाने वाले औद्योगिक ड्रोन तक विकसित हो चुके हैं।

भारत में बढ़ती ड्रोन क्रांति
भारत सरकार ने ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। कृषि में ड्रोन से कीटनाशकों और उर्वरकों का छिड़काव किया जा रहा है। गांवों का डिजिटल सर्वेक्षण, रेलवे ट्रैक और बिजली लाइनों का निरीक्षण, पुलों और सड़कों की निगरानी, आपदा राहत तथा चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति जैसे कार्य अब ड्रोन से किए जा रहे हैं।‘ड्रोन शक्ति’ पहल और ड्रोन निर्माण प्रोत्साहन देने वाली नीतियों के कारण भारत वैश्विक ड्रोन उद्योग में पहचान बना रहा है।

कहां-कहां उपयोगी हैं ड्रोन
ड्रोन का उपयोग आज कृषि और स्मार्ट फार्मिंग,रक्षा एवं सीमा सुरक्षा,फिल्म एवं टीवी शूटिंग,पत्रकारिता और लाइव कवरेज,भूमि सर्वेक्षण एवं मैपिंग,निर्माण कार्यों की निगरानी,बिजली एवं तेल-गैस पाइपलाइन निरीक्षण,आपदा प्रबंधन और राहत कार्य,चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति,ई-कॉमर्स डिलीवरी,वन एवं वन्यजीव संरक्षण तथा खनन और पर्यावरण अध्ययन जैसे अनेक क्षेत्रों में किया जा रहा है।

ड्रोन टेक्नोलॉजी में कैरियर
ड्रोन उद्योग के विस्तार के साथ प्रशिक्षित युवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस क्षेत्र में ड्रोन पायलट, ड्रोन प्रशिक्षक, ड्रोन डिजाइन इंजीनियर, एयरोनॉटिकल इंजीनियर, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर, ड्रोन सॉफ्टवेयर डेवलपर, एआई एवं ऑटोमेशन विशेषज्ञ, जीआईएस एवं मैपिंग विशेषज्ञ, सर्वे इंजीनियर, ड्रोन मेंटेनेंस इंजीनियर, ड्रोन डेटा विश्लेषक तथा कृषि ड्रोन विशेषज्ञ जैसे पदों पर रोजगार के अनेक अवसर उपलब्ध हैं।

आवश्यक योग्यता
ड्रोन क्षेत्र में प्रवेश के लिए 12वीं (विज्ञान) के बाद विभिन्न डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, कंप्यूटर साइंस, एयरोस्पेस, रोबोटिक्स तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह क्षेत्र विशेष रूप से उपयुक्त है। ड्रोन पायलट बनने के लिए मान्यता प्राप्त संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त करना आवश्यक होता है।

प्रमुख शिक्षण संस्थान
भारत में ड्रोन तकनीक एवं ड्रोन पायलट प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहे हैं। इनमें प्रमुख हैं-
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी, फुरसतगंज, उत्तर प्रदेश
- आईआईटी कानपुर
- आईआईटी बॉम्बे
- आईआईटी मद्रास
- भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु
- बिरला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान, पिलानी।
- भारतीय ड्रोन संस्थान, नई दिल्ली
- फॉर इंस्टीट्यूट ऑफ ड्रोन टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च, नई दिल्ली आदि।

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