दीक्षांत  समारोह में बोली राज्यपाल नौकरी खोजने के बजाय रोजगार सृजन पर जोर दें 

 किसी भी राज्य का भविष्य उसकी कक्षाओं में लिखा जाता है- आंनदीबेन पटेल 

 युवाओं से देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की

199 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक दिए गए

मेरठ, 22 जुलाई। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के 38वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति  आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा केवल नौकरी पाने की सोच तक सीमित न रहें, बल्कि कौशल, नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से रोजगार देने वाले बनें।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि किसी भी राज्य का भविष्य उसकी कक्षाओं में लिखा जाता है। भारत में इंजीनियरिंग, डिजाइन और तकनीकी क्षमता की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल युवाओं की प्रतिभा को सही दिशा देने की है। उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके शस्त्रागारों में नहीं, बल्कि उसकी प्रयोगशालाओं, युवा प्रतिभा, जिज्ञासा और वैज्ञानिक सोच में निहित होती है।

उन्होंने भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास पर बल देते हुए बताया कि केंद्र सरकार 15 हजार माध्यमिक विद्यालयों में चलचित्र निर्माण, दृश्य प्रभाव (वीएफएक्स), खेल निर्माण और चित्रकथा जैसे आधुनिक क्षेत्रों से जुड़े प्रशिक्षण केंद्र विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। वर्ष 2030 तक इन क्षेत्रों में लगभग 20 लाख रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।



राज्यपाल ने शिक्षा को रोजगार एवं उद्योग से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए बताया कि इस उद्देश्य से ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यम’ विषय पर उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ रोजगार और उद्यमिता के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही चिकित्सा शिक्षा, शोध एवं स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए निजी क्षेत्र के सहयोग से आठ क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र स्थापित किए जाने की योजना की भी जानकारी दी।

उन्होंने विद्यार्थियों से विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत जैव प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। गगनयान मिशन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिक देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं और युवाओं को इस विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार बनना चाहिए।

नशा करना कभी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता

 अपने संबोधन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल  ने कहा- मैंने लगभग 15 यूनिवर्सिटी के हॉस्टलों को देखा है। वहां बाहर शराब की बोतलें पड़ीं मिलीं।हॉस्टल में बाहर से जो खाना आ रहा है। उसमें ड्रग्स आ रहा है। मैंने हॉस्टल प्रबंधन और कुलपति को फोटो तक दिखाए हैं। हम तो 4 पीढ़ी से चाय नहीं पी रहे और आप ड्रग्स के आदी हो गए। छोड़िए इसे। नशा करना कभी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। नशा धीरे-धीरे व्यक्ति के सपनों, प्रतिभा, स्वास्थ और परिवार की आशाओं को नष्ट कर देता है।उन्होंने कहा कि किसी भी देश का भविष्य उसकी सीमाओं में नहीं बल्कि कक्षाओं में लिखा जाता है। किसी भी देश की वास्तविक शक्ति उसके शस्त्रागारों में नहीं है। उसके विवि की प्रयोगशाला में जन्म लेती है।किसी राष्ट्र की सबसे पड़ी संपदा उसके खनिज भंडार में नहीं है। बल्कि उसकी युवा प्रतिभा, उसकी जिज्ञासा, उसकी ज्ञान पिपासा में होती है। हमारी प्रतिभा हमारे घरों में बैठी है। हमारी क्लासों में बैठी है।हम रिसर्च में सबसे पीछे हैं। रिसर्च ही नहीं होता है। हम आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।


नालंदा विश्वविद्यालय का उदाहरण देकर राज्यपाल ने सतत विकास का दिया संदेश

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के 38वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति  आनंदीबेन पटेल ने बिहार स्थित नालंदा विश्वविद्यालय के पुनर्निर्माण का उदाहरण देते हुए पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के प्रभावी उपयोग का संदेश दिया।राज्यपाल ने बताया कि नालंदा विश्वविद्यालय के निर्माण में संसाधनों के समुचित उपयोग का अनूठा प्रयोग किया गया। परिसर की जमीन से लगभग चार फीट तक मिट्टी निकालकर उसका उपयोग हरित क्षेत्र विकसित करने और ईंट निर्माण में किया गया। वहीं, खुदाई से बने स्थानों पर तालाब तैयार किए गए, जिनके माध्यम से विश्वविद्यालय में जलापूर्ति की व्यवस्था की गई है।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में सौर ऊर्जा आधारित बिजली व्यवस्था स्थापित की गई है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ हर वर्ष करोड़ों रुपये की बचत भी संभव हो रही है। राज्यपाल ने शिक्षण संस्थानों से ऐसे नवाचार अपनाकर सतत विकास और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया।




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