अंकित शर्मा हत्याकांड: पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 दोषी करार

 दिल्ली दंगों के दौरान नाले में मिला था आईबी अधिकारी का शव

नई दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में साल 2020 में हुए दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या के मामले में सोमवार को कड़कड़डूमा कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 आरोपियों को हत्या और दंगा भड़काने का दोषी करार दिया है। हालांकि, कोर्ट ने इन्हें आपराधिक साजिश (120B) के आरोपों से बरी कर दिया है। दोषियों की सजा की अवधि पर बहस की तारीख जल्द तय की जाएगी।

इन धाराओं में ठहराया गया दोषी, कोर्ट में रो पड़ा ताहिर

कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशन जज प्रवीण सिंह ने सोमवार (13 जुलाई, 2026) को यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 365 (अपहरण), 147, 148, 149 (दंगा और गैरकानूनी जमावड़ा), 153A (धर्म के आधार पर दुश्मनी बढ़ावा देना) और 188 के तहत दोषी पाया गया है। अदालत कक्ष में जैसे ही जज ने फैसला पढ़ा, पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन फूट-फूटकर रोने लगा।

चार अन्य भी दोषी, छह आरोपी सबूतों के अभाव में बरी

अदालत ने इस हत्याकांड में ताहिर हुसैन के अलावा चार अन्य आरोपियों—जावेद, अनस, नाजिम और कासिम को भी दोषी ठहराया है। वहीं, मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने उचित साक्ष्यों के अभाव में 6 अन्य सह-आरोपियों को बरी कर दिया। यह पूरा मामला दयालपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR संख्या 65/2020 से जुड़ा है। गौरतलब है कि ताहिर हुसैन की जमानत अर्जी को पिछले साल सितंबर में हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था।

चांद बाग के नाले में मिला था शव: फरवरी 2020 में संशोधित नागरिकता कानून (CAA) को लेकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भयंकर सांप्रदायिक हिंसा भड़की थी। इसी दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा लापता हो गए थे और बाद में उनका क्षत-विक्षत शव चांद बाग इलाके के एक नाले से बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर चाकुओं के दर्जनों गहरे घाव मिले थे, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।

दिल्ली दंगों का सबसे बड़ा और प्रमुख फैसला

अंकित शर्मा के पिता की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन के घर को केंद्र मानकर जांच की थी। जांच एजेंसी ने कोर्ट में पुख्ता गवाह, डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज़ पेश करते हुए साबित किया कि ताहिर के घर की छत का इस्तेमाल दंगाइयों ने पथराव और तेजाब फेंकने के लिए किया था। कड़कड़डूमा कोर्ट के इस फैसले को दिल्ली दंगों से जुड़े मुकदमों में अब तक की सबसे बड़ी कानूनी सफलता माना जा रहा है। मंगलवार को लिखित आदेश जारी होने के बाद सजा पर जिरह शुरू होगी।

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