भारत-पाक की 117 हस्तियों ने उठाई 11 बड़ी मांगें
क्या पटरी पर लौटेंगे दोनों देशों के रिश्ते?
नई दिल्ली/इस्लामाबाद: भारत और पाकिस्तान की 117 हस्तियों ने दोनों देशों के रिश्तों में सुधार लाने के लिए पीएम मोदी और शाहबाज शरीफ को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में भारत और पाक की लीडरशिप से टकराव खत्म कर आतंकवाद समेत सभी मुद्दों को बातचीत से सुलझाने की अपील की गई है ताकि दक्षिण एशिया में शांति और विकास का माहौल बन सके। ये चिट्ठी सरहद के दोनों तरफ चर्चा का विषय बनी हुई है। पहले आपके लिए ये जानना जरूरी है कि वो 11 मांगें आखिर क्या हैं जिन्हें इस चिट्ठी में भारत-पाक के रिश्तों को सुधारने का आधार बनाया गया है।
भारत के 61 और पाकिस्तान के 56 (कुल 117) बुद्धिजीवियों, राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को एक खुला पत्र (Open Letter) लिखा है। इसमें कहा गया है कि दोनों देशों में बड़ी युवा आबादी है और लगातार तनाव उनके भविष्य, रोजगार और विकास में बाधा बन रहा है।
पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख नाम
पाठकों की उत्सुकता शांत करने के लिए दोनों पक्षों के बड़े चेहरों को बुलेट पॉइंट्स में लिखें:भारत की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर रूक, कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर, राज्यसभा सांसद मनोज झा और रॉ (RAW) के पूर्व प्रमुख ए.एस. दुलत।पाकिस्तान की तरफ से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी, पूर्व राजनयिक अशरफ जहांगीर काजी और प्रसिद्ध वैज्ञानिक परवेज हूद।
वो 11 बड़ी मांगें कौन सी हैं?
द्विपक्षीय बातचीत की बहाली: दोनों देश कश्मीर सहित सभी मुद्दों पर फिर से आधिकारिक बातचीत शुरू करें।उच्चायुक्तों (High Commissioners) की नियुक्ति: नई दिल्ली और इस्लामाबाद में पूर्णकालिक राजनयिकों की वापसी हो।व्यापार और कनेक्टिविटी: दोनों देशों के बीच सस्पेंड पड़े व्यापार (Trade), हवाई और सड़क कनेक्टिविटी को दोबारा बहाल किया जाए।वीजा नियमों में ढील: नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों, छात्रों और मरीजों के लिए वीजा प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाए।सैन्य तनाव कम करना: सीमाओं पर डि-एस्केलेशन (सैन्य तैनाती कम करना) और सीजफायर को मजबूती से लागू करना।
क्या पटरी पर लौटेंगे दोनों देशों के रिश्ते?
भारत का कड़ा रुख
भारत सरकार का रुख हमेशा से साफ रहा है—"आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।" हालिया सीमा पार तनाव और आतंकी घटनाओं के बीच भारत बिना ठोस सुरक्षा भरोसे के पाकिस्तान से बातचीत की मेज पर आने को तैयार नहीं दिखता।
भारत में शुरू हुआ सियासी घमासान
इस पत्र के सामने आते ही भारत में घरेलू राजनीति भी गरमा गई है। बीजेपी (BJP) ने पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले कश्मीरी नेताओं पर निशाना साधते हुए इसे 'पाकिस्तान का एजेंडा' चलाने की कोशिश बताया है। हालांकि नागरिक समाज (Civil Society) की यह पहल शांति का संदेश देती है, लेकिन जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से पनप रहे आतंकवाद पर कोई ठोस और निर्णायक कार्रवाई नहीं करता, तब तक केवल कूटनीतिक चिट्ठियों के दम पर दोनों देशों के रिश्तों का पटरी पर लौटना बेहद मुश्किल नजर आता है।


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