11 साल से जेल में बंद अशफाक को हाईकोर्ट से भी नहीं मिली जमानत

आईएसआई एजेंट को शरण देने और गोपनीय सैन्य सूचनाएं भेजने में सहयोग का है आरोप

मेरठ। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (आईएसआई) के कथित एजेंट को शरण देने और भारतीय सेना एवं वायुसेना से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं पाकिस्तान भेजने में सहयोग करने के आरोपी मेरठ निवासी मोहम्मद अशफाक अंसारी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से अधिक महत्व देश की सुरक्षा का है।

न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की एकल पीठ ने यह आदेश सुनाते हुए कहा कि अशफाक पर आरोप है कि उसने एक पाकिस्तानी नागरिक और कथित आईएसआई एजेंट को करीब 20 महीने तक अपने घर में शरण दी। इस दौरान उसने उसे हिंदी, फोटोग्राफी और वीडियो एडिटिंग सीखने में मदद की तथा भारतीय सेना और वायुसेना से संबंधित संवेदनशील सूचनाएं ईमेल के माध्यम से पाकिस्तान और बांग्लादेश में सक्रिय आईएसआई नेटवर्क तक पहुंचाने में सहयोग किया। जांच एजेंसियों के अनुसार कथित एजेंट के पास से कई गोपनीय सैन्य दस्तावेज भी बरामद हुए थे।

बचाव पक्ष ने दलील दी कि मोहम्मद अशफाक वर्ष 2015 से जेल में बंद है और अब तक 31 अभियोजन गवाहों में से एक का भी बयान दर्ज नहीं हो सका है। अदालत ने माना कि 10 वर्ष से अधिक समय तक विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रहना चिंता का विषय है, लेकिन मामले की गंभीरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आरोपों को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं होगा।

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि मामले की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर करते हुए छह माह के भीतर ट्रायल पूरा किया जाए।

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