देश में जल्द आ सकते हैं ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोट, ट्रायल के लिए छपेंगे 200 करोड़ नोट
कागजी नोट बंद नहीं होंगे, पॉलीमर और पेपर करेंसी साथ-साथ चलने की संभावना
नई दिल्ली, 28 जुलाई। भारत में जल्द ही ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के पॉलीमर यानी प्लास्टिक से बने बैंक नोट देखने को मिल सकते हैं। सरकार ने इन नोटों के पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इसके तहत ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के 100-100 करोड़ यानी कुल 200 करोड़ पॉलीमर नोट छापे जाने की योजना है। हालांकि, ट्रायल शुरू होने की निश्चित तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में इसकी जानकारी दी। प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य पॉलीमर बैंकनोट की उपयोगिता, टिकाऊपन और सुरक्षा जैसे पहलुओं का आकलन करना है। यदि परीक्षण सफल रहता है तो भविष्य में अन्य मूल्यवर्ग के नोटों के लिए भी पॉलीमर तकनीक पर विचार किया जा सकता है।
कागजी नोट भी चलते रहेंगे
पॉलीमर नोटों के संभावित प्रचलन के बावजूद मौजूदा कागजी ₹10 और ₹20 के नोट बंद नहीं होंगे। दोनों प्रकार के नोटों के एक साथ चलन में रहने की संभावना है। यह बदलाव चरणबद्ध तरीके से किया जा सकता है और पुराने कागजी नोट तब तक वैध रहेंगे, जब तक रिजर्व बैंक की ओर से उनके संबंध में कोई अलग निर्णय नहीं लिया जाता।
क्या होते हैं पॉलीमर नोट?
पॉलीमर बैंकनोट कागज के बजाय विशेष प्रकार के प्लास्टिक मटेरियल यानी पॉलीमर सब्सट्रेट पर बनाए जाते हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत इनका टिकाऊपन माना जाता है। ये पानी, धूल और गंदगी से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होते हैं और सामान्य कागजी नोटों की तुलना में लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
पॉलीमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल करने की भी अधिक संभावनाएं होती हैं। इससे नकली नोटों की नकल को मुश्किल बनाने में मदद मिल सकती है। लंबे समय तक चलने के कारण इनसे नोटों की बार-बार छपाई और बदलने की लागत को कम करने की उम्मीद भी की जाती है।
RBI ने जारी किया ग्लोबल टेंडर
पॉलीमर नोटों के प्रस्तावित ट्रायल के लिए रिजर्व बैंक की नोट-प्रिंटिंग इकाई ने विशेष पॉलीमर सब्सट्रेट शीट की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई के लिए वैश्विक स्तर पर एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया में योग्य और अनुभवी कंपनियों से पॉलीमर सब्सट्रेट की आपूर्ति के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। बोलियां जमा करने की अंतिम तारीख 18 अगस्त बताई गई है।
टेंडर प्रक्रिया पूरी होने, आवश्यक सामग्री की आपूर्ति और नोटों की छपाई के बाद ही पायलट प्रोजेक्ट के तहत पॉलीमर नोट बाजार में आने की प्रक्रिया शुरू होगी।
भारत में पहले भी हो चुका है पॉलीमर नोट का परीक्षण
भारत में नोटों की उम्र बढ़ाने और उनकी सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से पॉलीमर बैंकनोट पर पहले भी विचार किया जा चुका है। हालांकि, विभिन्न तकनीकी और व्यावहारिक कारणों से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट के जरिए एक बार फिर पॉलीमर करेंसी की व्यवहारिकता का परीक्षण किया जाएगा।
दुनिया के कई देशों में चल रहे हैं पॉलीमर नोट
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड समेत दुनिया के कई देशों में पॉलीमर बैंकनोट का इस्तेमाल किया जाता है। इन देशों में पॉलीमर नोटों को उनकी बेहतर टिकाऊ क्षमता और आधुनिक सुरक्षा फीचर्स के कारण अपनाया गया है।
भारत में यदि प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो पॉलीमर नोटों के इस्तेमाल को लेकर भविष्य में व्यापक स्तर पर निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि, फिलहाल यह केवल ₹10 और ₹20 के नोटों तक सीमित परीक्षण के रूप में देखा जा रहा है।


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