दस्तावेज लेखकों ने सरकार का पुतला फूंका

ई-रजिस्ट्री के विरोध में 14वें दिन प्रदर्शन, बर्तन बजाकर जताया विरोध

 मेरठ।   ई-रजिस्ट्री प्रणाली के विरोध में दस्तावेज लेखकों की हड़ताल बुधवार को 14वें दिन भी जारी रही। प्रदर्शनकारियों ने कचहरी परिसर में उत्तर प्रदेश सरकार का पुतला फूंका और बर्तन बजाकर अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने ई-रजिस्ट्री कानून को 'काला कानून' बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।

 काफी संख्या में अधिवक्ता हाथ में प्लेट को बजाते हुए मंडलायुक्त कार्यालय के गेट पर पहुंचे। वहां पर काफी देर तक हंगामा किया। पुलिस नेनारेबाजी कर रहे अधिवक्ताओं को कार्यालय में जाने से रोक दिया । इसके बार अधिवक्ता नारेबाजी करते हुए डीएम कार्यालय पहुंचे। दस्तावेज लेखक कचहरी के गेट पर पुलिस की मौजूदगी में उग्र हो गए। उन्होंने परिसर में घूमते हुए सरकार विरोधी नारे लगाए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में जिले के छह उप-पंजीयक (रजिस्ट्री) कार्यालयों से जुड़े अधिवक्ता और स्टाम्प वेंडर भी शामिल हैं।

दस्तावेज लेखकों का आरोप है कि ई-रजिस्ट्री प्रणाली से संपत्ति संबंधी फर्जीवाड़े बढ़ सकते हैं। उनका कहना है कि शातिर जालसाज असली मालिक की पहचान बदलकर या फर्जी दस्तावेजों के सहारे किसी की भी जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करवा सकते हैं। इससे लोगों की जीवनभर की कमाई विवादों में फंस सकती है और उन्हें अदालती चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।

प्रदर्शनकारियों ने बायोमेट्रिक और आधार से जुड़े धोखाधड़ी की आशंका भी जताई। उनके अनुसार, जालसाज जमीन की रजिस्ट्री के पुराने कागजों या ऑनलाइन पोर्टल से लोगों की निजी जानकारी और उंगलियों के निशान चुरा सकते हैं। इसका उपयोग करके वे आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS) के जरिए बैंक खातों से पैसे निकाल सकते हैं।

अन्य चिंताओं में संपत्ति का कम मूल्यांकन दिखाकर रजिस्ट्री करना शामिल है, जिससे आयकर और राजस्व विभाग की जांच बैठ सकती है और खरीदार पर भारी जुर्माना लग सकता है। इसके अलावा, ठग एक ही संपत्ति को कई फर्जी ई-सर्टिफिकेट और कागजात के जरिए अलग-अलग लोगों को बेचकर करोड़ों रुपये का चूना लगा सकते हैं।दस्तावेज लेखकों, अधिवक्ताओं और स्टाम्प वेंडरों का कहना है कि वे इस ई-रजिस्ट्री प्रणाली का पुरजोर विरोध करते हैं क्योंकि यह जनता के हित में लाभकारी नहीं है और इससे धोखाधड़ी की संभावना बढ़ जाएगी।इस अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण पिछले 13 दिनों से जिले को प्रतिदिन 5-6 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। अब तक यह आंकड़ा 75 80 करोड़ से ज़्यादा पहुंच चुका हैं।

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