सहफसली खेती और प्राकृतिक कृषि से बढ़ेगी किसानों की आय: सूर्य प्रताप शाही
- कृषि मंत्री ने एसवीपी कृषि विश्वविद्यालय का किया निरीक्षण, हॉर्टिकल्चर रिसर्च सेंटर में ड्रैगन फ्रूट समेत विभिन्न फसलों की सराहना
मेरठ। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक आय के लिए कृषि की नवीनतम तकनीकों को अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि गन्ने की खेती के साथ सहफसली खेती के रूप में गेहूं, सरसों, मूंग और उड़द जैसी फसलों को शामिल करने से उत्पादन बढ़ेगा तथा किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार सहफसली खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न फसलों के मिनीकिट किसानों को उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र एवं प्रदेश सरकार समय-समय पर अनेक योजनाएं संचालित कर रही हैं, जिनका सीधा लाभ कृषकों को मिल रहा है। उन्होंने किसानों से मई और जून माह में खेतों में हरी खाद उगाने की अपील करते हुए कहा कि इससे भूमि की उर्वरा शक्ति में सुधार होगा और आगामी फसल के लिए प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि मल्टी क्रॉप प्रोडक्शन खाद्य सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने का प्रभावी माध्यम है। दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने पर बल देते हुए उन्होंने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने के साथ मूंगफली की सहफसली खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे किसानों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश में 5 जून से 21 जून तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत खेत बचाओ अभियान, प्राकृतिक कृषि मिशन तथा जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वैज्ञानिक और कृषि अधिकारी किसानों के खेतों पर पहुंचकर उन्हें उन्नत कृषि तकनीकों और प्राकृतिक खेती के उपायों की जानकारी देंगे। इससे पूर्व कृषि मंत्री ने विश्वविद्यालय के हॉर्टिकल्चर रिसर्च सेंटर का भ्रमण किया और वहां उगाए जा रहे ड्रैगन फ्रूट, आम, नाशपाती, आड़ू, अंजीर, हल्दी तथा औषधीय पौधों की खेती का अवलोकन किया। उन्होंने बागवानी गतिविधियों की सराहना करते हुए अधिक से अधिक पौधरोपण करने का सुझाव दिया।
विश्वविद्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने आगामी खरीफ सीजन के लिए दलहनी फसलों के साथ प्राकृतिक खेती के डेमोंस्ट्रेशन ट्रायल अधिक संख्या में लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विकासखंड स्तर पर प्राकृतिक कृषि मिशन के अंतर्गत सेमिनार और बैठकों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें किसानों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने यूपीपीसीएल एवं अन्य निर्माण एजेंसियों के अधिकारियों को समयबद्ध ढंग से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रत्येक कृषि विज्ञान केंद्र में एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्राकृतिक खेती का प्रदर्शन प्लॉट विकसित करने के निर्देश भी दिए।
मंत्री ने विश्वविद्यालय में भदावरी और मुर्रा नस्ल की भैंसों तथा साहिवाल गायों से संबंधित परियोजनाओं को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को नई दिशा मिलेगी और पशुपालन के क्षेत्र में किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त होंगे।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने विश्वविद्यालय में संचालित विकास कार्यों, योजनाओं एवं अनुसंधान परियोजनाओं की जानकारी दी। कृषि मंत्री ने विश्वविद्यालय परिसर, छात्रावासों तथा स्वच्छता व्यवस्था की सराहना की। इस अवसर पर उप सचिव डॉ. वी.पी. सिंह, वित्त नियंत्रक पंकज चतुर्वेदी, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, निदेशक, विभागाध्यक्ष एवं बड़ी संख्या में वैज्ञानिक और अधिकारी उपस्थित रहे।


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