सड़क असुरक्षा एक गंभीर चुनौती


- प्रो. नंदलाल
आये दिन या कहिये रोज रोज सड़कों पर जो दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनको हम समाचार पत्रों और समाचार प्लेटफार्मों पर पढ़ते और सुनते हैं, वह व्यक्ति, समाज तथा देश के लिए एक गंभीर खतरा बन चुका है। हम लोग पढ़ लेते हैं, सुन लेते हैं और उसकी इति श्री हो जाती है जबकि उसके पीछे करुण क्रंदन, वेदना छिपी होती है। परिवार के परिवार उजड़ जा रहे हैं, फिर भी सरकारें उनका अनदेखी कर रही हैं।

सड़क पर होने वाली दुर्घटनाएं कुछ व्यक्तिगत कारणों से भले हों पर यह दायित्व तो शासन और प्रशासन का ही है कि इस पर रोकथाम के लिए कुछ उपाय किए जाय। सिर्फ टोल टैक्स, पंजीयन शुल्क और चालान कर देने से समस्या का समाधान संभव नहीं है। हम देश में अच्छी अच्छी सड़के बनाने के लिए प्रयासरत तो हैं और यह भी चाहते हैं कि यातायात व्यवस्था अच्छी और सुगम हो पर सुरक्षा के उपायों पर उदासीनता दिखती है। मात्र यह निर्देश दे देने भर से काम चलने वाला नहीं है कि हेलमेट पहन कर गाड़ी चलाएं या सीट बेल्ट बांधकर वाहन चलाएं।लोग हेलमेट भी पहन रहे हैं, सीट बेल्ट भी बांध रहे हैं, यहां तक कि गाड़ी निर्माता भी तरह तरह की एडवांस टेक्नोलॉजी गाड़ियों के निर्माण में उपयोग कर रही हैं फिर भी दुर्घटनाओं का अनुपात बढ़ता ही जा रहा है।

क्या हम आँख मूंदकर इसलिए तो नहीं बैठ जाते हैं कि चलो इसी बहाने कुछ जनसंख्या कम हो रही है। यह बात अच्छी नहीं है। सड़क प्रबंधन पर ध्यान नहीं दिया जाएगा तो ये घटनाएं और बढ़ेंगी। सरकारें एडवांस टेक्नोलॉजी और बेहतर ढंग से एक्सप्रेसवे बनवा रही हैं कि लोगों को आवागमन शीघ्रता और सुगमता से हो पर ऐसा हो नहीं रहा है। अभी कल ही दिल्ली के पास मोरबी हलवद हाईवे के पास एक बाइक पलटने से घायल एक लड़के को अस्पताल ले जाते समय एक डंपर ने गाड़ी में सवार पांच लोगों को कुचल दिया।घटना स्थल पर ही उनकी जान चली गई।नेकी करने निकले लोगों की जान डंपर ने ले ली।
           इस तरह की घटनाएं आम हो गई हैं। हर हाईवे से लेकर किसी भी सड़क पर सुरक्षा संदेहास्पद बन गई है।सुबह व्यक्ति घर से निकलता है कि अपना काम पूरा करके समय से लौट आयेंगे पर डंपरों,ट्रकों,और लोडरों को चला रहे यमराजों पर किसी की नकेल नहीं है।बेखौफ ये गाड़ी चलाते हैं।अधिक रफ्तार से चलते है, ओवरलोडिंग करते हैं और भरपूर दारू पीकर गाड़ी चलाते हैं। उन्हें न तो अपना होश है न ही सामने वाले के बारे में ये यमराज सोचते हैं। इनकी रफ्तार पर नियंत्रण किसी का नहीं है। सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हो गई है। जिसकी जान चली गई और जिसने ली उनके खिलाफ मात्र छोटी मोटी जांच और कुछ पैसे का लेन देन करके मामला भुला दिया जाता है। इस पर विचार और चिंतन नहीं किया जाता न ही भविष्य के लिए कोई योजना बनाई जाती है।यदि ऐसा होता तो दुर्घटनाओं में कमी आती पर ऐसा कुछ भी देखने में नहीं आता।विचार करना होगा कि ऐसी घटनाएं प्रतिदिन क्यों घटित हो रही हैं जहां परिवार के परिवार उजड़ जा रहे हैं।
       
यदि इस पर गौर किया जाये तो इसके स्पष्ट कारण नजर आयेंगे। सबसे पहले तो यह स्वीकारना होगा कि अधिकतर दुर्घटनाएं डंपर, ओवरलोडेड ट्रक और मालवाहक गाड़ियों के द्वारा ही की जा रही हैं। तेज रफ्तार, शराबखोरी, नशा व्यसन, रात दिन जगकर गाड़ी चलाना, किसी ढाबे पर बैठकर गलत खान पान करके गाड़ी चलाना दूसरों के जान और प्राण ले रहे हैं। अवैध वसूली से बचने के लिए ड्राइवरों द्वारा तेज गति से भागना घटनाओं के लिए जिम्मेदार है। हर दो सौ किलोमीटर गाड़ी चलने के बाद ड्राइवरों को पुलिस द्वारा चेक करना कि वे नशा करके तो गाड़ी नहीं चला रहे।

ड्राइवरों के द्वारा किए जा रहे नशे को यदि गंभीरता से नहीं लिया गया तो आए दिन इस प्रकार की घटनाओं में वृद्धि दर्ज होती रहेगी। इसका शिकार सही लोग हो जाते हैं जो अपनी लाइन,और गति पर नियंत्रण करके चलते हैं।यानि दूसरे की गलती से निर्दोषों की जाने जा रही हैं। छोटे वाहनों को चलाने वाले लोग भी इसके लिए 09 पता पता जिम्मेदार होते हैं क्योंकि उनमें से भी कई लोग शौकिया पी कर गाड़ी चलाते हैं। इस पर भी विचार होना चाहिए कि रात्रि एक बजे से भोर चार बजे तक किसी भी वाहन के चलने पर प्रतिबंध आवश्यक किया जाय क्योंकि अधिकांश घटनाएं इसी बीच होती हैं।सबसे जरूरी है हाईवेज पर प्रत्येक सौ किलोमीटर की दूरी पर चेकपोस्ट होना चाहिए जो ड्राइवरों को चेक कर सके कि वह नशे की हालत में तो गाड़ी नहीं चला रहा है।यह बात अलग है कि चेक करने वाले खुद ही पीने लगें तो क्या होगा।इसके अलावा जगह जगह ट्रामा सेंटर भी खोले जाय ताकि इमरजेंसी की हालत में लोगों को त्वरित उपचार मिल सके।

समय समय पर ड्राइवरों का रूटीन चेक अप  भी होना चाहिए ताकि उनके मानसिक हालात का जायजा लिया जा सके।यह रूटीन चेक अप गाड़ी चलाते समय अचानक होना चाहिए ताकि नशे की स्थिति का स्पष्ट पता चल सके।जो लोग नशे में होकर गाड़ी ड्राइव करते हैं वे तो इसके शिकार होते ही हैं, वे भी शिकार हो जाते हैं जो नशा नहीं किए होते।गलत लोगो के गलत तरीके से गाड़ी चलाने के कारण बेगुनाहों और निर्दोष लोगों की जाने जा रही हैं।सरकारों को इस पर तुरंत कोई गंभीर योजना बनानी चाहिए वरना सड़क असुरक्षा में मरने वालों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि होती चली जाएगी और लोग अपना दुख जताते रहेंगे।
(शोध विवेचक, चित्रकूट)

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