विवि में आमरण अनशन पर बैठे कर्मचारी ने लगाए भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के आरोप
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में एक बार फिर विवाद गहरा गया है। विश्वविद्यालय के तृतीय श्रेणी कर्मचारी शंकर सिंह नेगी ने सांख्यिकी विभाग के शिक्षक प्रो. हरेकृष्णा और कुछ अन्य अधिकारियों पर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग, मानसिक उत्पीड़न और फर्जी नियुक्तियों जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए कुलसचिव को चार सूत्रीय मांग पत्र सौंपा।
शिकायत पर कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए नेगी आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। वहीं प्रो. हरेकृष्णा ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इन्हें व्यक्तिगत द्वेष और चर्चा में आने का प्रयास करार दिया है।
शंकर सिंह नेगी का आरोप है कि प्रो. हरेकृष्णा ने अपने निजी वाहन चालक दीपक और उसके परिवार की सदस्य पूजा को आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से विश्वविद्यालय में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दर्शाकर पिछले करीब दो वर्षों से विश्वविद्यालय के फंड से वेतन दिलवाया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित धनराशि की वसूली करने की मांग की है।नेगी ने आरोप लगाया कि प्रो. हरेकृष्णा पिछले करीब 20 वर्षों से यूएफएम (अनुचित साधन) और स्क्रूटनी विभाग का प्रभार संभाल रहे हैं। उन्होंने पिछले पांच वर्षों के यूएफएम और स्क्रूटनी कार्यों की स्वतंत्र जांच कराने और संबंधित अभिलेखों की समीक्षा की मांग की है।
फर्जी दस्तावेज और जान का खतरा होने का दावा
शिकायत में नेगी ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय में कुछ अधिकारी और कर्मचारी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उच्च पदों पर कार्यरत हैं और मनचाहा वेतन प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों के शैक्षणिक दस्तावेजों और संपत्ति की जांच कराने की मांग की है।साथ ही दावा किया है कि विश्वविद्यालय की कथित अनियमितताओं को उजागर करने के कारण उन पर दो बार जानलेवा हमला हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में उनके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी उन्हीं लोगों की होगी, जिनके नाम उन्होंने शिकायत में दर्ज किए हैं।
मानवाधिकार संगठन ने भी भेजा पत्र
नेगी का कहना है कि वह इससे पहले भी दो बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा परिषद के जिला सचिव डॉ. मनजीत सिंह भाटी ने भी कुलसचिव को पत्र भेजकर मामले में निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।
संगठन ने आरोप लगाया है कि नेगी के साथ अभद्र व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न किया गया और चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं होने पर संगठन अपने स्तर पर आगे की पहल करेगा। पत्र की प्रति राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी भेजे जाने का दावा किया गया है।
आमरण अनशन पर बैठे कर्मचारी
शंकर सिंह नेगी विश्वविद्यालय परिसर में तख्ती लेकर आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी अपने आरोप सार्वजनिक किए हैं। उनका दावा है कि उनके साथ अब तक तीन दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और यदि भविष्य में कोई अनहोनी होती है तो उसके लिए प्रो. हरे कृष्णा जिम्मेदार होंगे।
प्रो. हरे कृष्णा बोले- आरोप पूरी तरह निराधार
उधर, प्रो. हरेकृष्णा ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि शंकर सिंह नेगी मानसिक रूप से परेशान हैं और बिना किसी साक्ष्य के आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि एक क्लर्क के धरने से किसी का ध्यान नहीं जाता, इसलिए उन्होंने एक प्रोफेसर को निशाना बनाया है।
प्रो. हरेकृष्णा के अनुसार, नेगी पहले विश्वविद्यालय के जनरल सेक्शन में कार्यरत थे, लेकिन कथित अनियमितताओं के कारण उनका तबादला कला संकाय के डीन कार्यालय में कर दिया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि नेगी के खिलाफ विभागीय जांच भी चल रही है और उसी से परेशान होकर वे इस प्रकार के आरोप लगा रहे हैं।
प्रो. हरेकृष्णा ने कहा कि शंकर सिंह नेगी का व्यवहार कर्मचारियों के साथ विवादित रहा है और इसी कारण विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ भी उनके अनशन का समर्थन नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि बिना प्रमाण लगाए गए आरोप विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने का प्रयास हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने मानहानि की कार्रवाई पर भी विचार किया था, लेकिन कर्मचारी की स्थिति को देखते हुए ऐसा नहीं किया।
प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मामले में कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। ऐसे में अब सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली कार्रवाई और संभावित जांच पर टिकी हुई है।


No comments:
Post a Comment