जिस देश में एक ठेले वाले को भी पंजीकरण कराना पड़ता है, वहां आरएसएस को छूट कैसे ?, गृहमंत्री ने माँगा जवाब तो मच गया हड़कंप

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे का आरएसएस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला, संघ में रहते पीएम की 14 विदेश सेवा का खर्च किसने किया , इस पर भी उठाये सवाल

बेगलुरु। "जिस देश में एक अदना सा ठेला या रेहड़ी-पटरी लगाने वाला गरीब भी अपनी आजीविका चलाने के लिए पंजीकरण कराने को बाध्य है, वहां आरएसएस जैसा विशालकाय संगठन कानून से ऊपर कैसे हो सकता है?" कर्नाटक के नवनियुक्त गृह मंत्री प्रियांक खड़गे के इस तीखे और सीधे सवाल ने देश के राजनीतिक गलियारों में एक नया भूचाल ला दिया है। जून 2026 के इस सबसे बड़े राजनीतिक विवाद में गृह मंत्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कानूनी स्थिति, उसके चंदे और कार्यप्रणाली पर ऐसे सवाल दागे हैं, जिसने सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक हड़कंप मचा दिया है। खड़गे ने आरएसएस को "बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स" (व्यक्तियों का समूह) की आड़ छोड़ एक पंजीकृत संस्था के रूप में सामने आने और अपने रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज तैयार रखने की खुली चुनौती दी है।

पद संभालते ही भाजपा-आरएसएस पर बरसे खड़गे: '48 घंटे में दिखने लगा आपका डर'

दरअसल, यह पूरा विवाद तब और गर्मा गया जब गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने एक सोशल मीडिया यूजर की पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर सीधा पलटवार किया। खड़गे ने बेहद आक्रामक अंदाज में लिखा, "बीजेपी कर्नाटक, आप इतने परेशान क्यों हैं? मुझे गृह मंत्री का पद संभाले अभी 48 घंटे भी नहीं हुए हैं, और आपका डर, आपकी बेचैनी और आपका गुस्सा साफ दिख रहा है। आप अभी से ही आरएसएस का इस्तेमाल करके मुझे गाली दे रहे हैं और मेरी जान लेने की धमकी दे रहे हैं। आप जो कर सकते हैं, कर लें।" उन्होंने आगे तंज कसते हुए लिखा कि सबसे जरूरी बात, कृपया अपने लोगों के समूह (आरएसएस) तक मेरा नमस्कार पहुंचाएं और उनसे कहें कि वे अपनी संस्था और राजनीतिक विंग के रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी दस्तावेज तैयार रखें।

सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीति में आने से पहले की विदेश यात्राओं पर भी सवाल उठाए. उन्होंने लिखा, ‘जब मोदीजी स्वयं को ‘फकीर’ कहते थे और आरएसएस प्रचारक थे, तब उन्होंने अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, गुयाना, कनाडा, मलेशिया और फ्रांस सहित 14 से अधिक देशों की यात्रा की थी. उन यात्राओं का खर्च किसने उठाया? क्या इसके लिए आरएसएस, यानी तथाकथित रजिस्ट्रेशन वाले ‘एनजीओ’ ने पैसे दिए थे?’ खरगे ने कहा कि ‘ऐसे देश में जहां सड़क पर सामान बेचने वाले को भी पंजीकरण कराना पड़ता है, मंदिरों और देवताओं तक को प्राप्त प्रत्येक दान का हिसाब देना पड़ता है और नागरिकों को आयकर रिटर्न दाखिल करना पड़ता है, वहां आरएसएस को छूट नहीं मिल सकती.’ 

कानून से ऊपर कैसे है संगठन? जवाबदेही की मांग

प्रियांक खड़गे ने व्यवस्था की पारदर्शिता पर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि वे संगठन पर किसी तरह के तत्काल प्रतिबंध की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे सिर्फ नियम, जवाबदेही और पारदर्शिता चाहते हैं। उन्होंने आरएसएस के धन के स्रोतों, मिलने वाले भारी-भरकम चंदे और देश-विदेश में संचालित उनके 2,500 से अधिक संबद्ध संगठनों की कार्यप्रणाली पर गंभीर उंगली उठाई। उन्होंने पूछा कि आखिर किस कानून के तहत आरएसएस को सरकार और जनता के प्रति जवाबदेह होने से इतनी बड़ी छूट मिली हुई है?

मुख्यालय बुलाएं या मेरे दफ्तर आएं, दस्तावेज दिखाएं: गृह मंत्री

आरएसएस नेताओं को सीधे चुनौती देते हुए कर्नाटक के गृह मंत्री ने कहा, "आरएसएस के नेता मुझे अपने 'केशव कृपा' (बेंगलुरु स्थित संघ मुख्यालय) बुलाएं और मुझे वह कानून दिखाएं जिसके तहत उन्हें इस देश में जवाबदेही से छूट मिली है। या फिर वे खुद ये सारे दस्तावेज लेकर मेरे सरकारी कार्यालय आएं।" खड़गे ने दो टूक कहा कि अगर वे इस मामले में कानूनी रूप से गलत साबित हुए तो सार्वजनिक रूप से माफी मांग लेंगे, अन्यथा संघ को अपनी यह ऐतिहासिक गलती सुधारनी ही होगी।

बता दे कि आरएसएस का कोई पंजीकरण किसी संस्था के रूप में नहीं है और उसके बाबजूद भी संस्था हर महीने करोडो रुपये देशभर में अपने कार्यालय चलाने और गतिविधि पर खर्च करती है जिसकी कोई रिपोर्ट,आय व्यय का विवरण किसी संस्था को नहीं दिया जाता है , गृहमंत्री ने इसी पर सवाल उठाये है। 

मोहन भागवत के दावे पर पलटवार और गरमाई सियासत

गौरतलब है कि इस कानूनी स्थिति पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पहले ही कह चुके हैं कि संगठन "व्यक्तियों के समूह" के रूप में काम करता है और मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत उसे पूरी मान्यता प्राप्त है। इस दावे को खारिज करते हुए खड़गे ने तीखा उदाहरण दिया कि 'बेंगलुरु क्लब' भी महज "लोगों का एक समूह" है, लेकिन उसे भी कानून और नियमों के दायरे में रहकर काम करना पड़ता है।

जहां राज्य के कई अन्य मंत्रियों ने खड़गे के इस कड़े रुख का पुरजोर समर्थन किया है, वहीं भाजपा नेता सीटी रवि ने इसे पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि पहले भी कई सरकारों ने संघ पर प्रतिबंध लगाने और उसे दबाने की कोशिश की, लेकिन वे हमेशा असफल रहीं। अपने पिता और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की तरह ही आरएसएस के कट्टर आलोचक माने जाने वाले प्रियांक खड़गे के इस हमले के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या संघ इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करेगा।

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