जनगणना ट्रेनिंग में बदइंतजामी

 200 की जगह मिला 30 रुपये का खाना; कर्मियों ने किया प्रशिक्षण का बहिष्कार

खराब भोजन व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर भड़के सुपरवाइजर व प्रगणक 

इस दौरान प्रशिक्षण व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित रही और हंगामा होता रहा

 मेरठ। सरधना कस्बे के बीआरसी केंद्र पर मंगलवार को जनगणना प्रशिक्षण के पहले ही दिन अव्यवस्थाओं को लेकर प्रगणक और सुपरवाइजरों का गुस्सा फूट पड़ा।

भीषण गर्मी, खराब भोजन व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही से नाराज सुपरवाइजर व प्रगणक ने हंगामा करते हुए प्रशिक्षण का बहिष्कार कर दिया। इस दौरान तहसीलदार पर फोन ना उठाने व भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए गए।

मंगलवार को बीआरसी केंद्र में जनगणना प्रशिक्षण का प्रथम दिन था। जिसमें बड़ी संख्या में प्रगणक और सुपरवाइजर पहुंचे थे। आरोप है कि शासन की ओर से प्रति कर्मचारी भोजन के लिए करीब 200 रुपये का बजट निर्धारित होने के बावजूद कर्मचारियों को मात्र 30 रुपये कीमत का खाना उपलब्ध कराया गया।

भोजन की गुणवत्ता पर लगाया सवालिया निशान 

करीब सवा बजे भोजन के समय पाॅलीथिन में पैक छोले-भटूरे और सलाद सहित अन्य सामान पहुंचा। भोजन की गुणवत्ता और व्यवस्था देखकर सुपरवाइजर व प्रगणक भड़क उठे और हंगामा शुरू कर दिया।

स्थिति बिगड़ती देख ट्रेनर ने तहसीलदार ज्योति को कई बार फोन कर मामले की जानकारी देने का प्रयास किया। आरोप है कि उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इससे कर्मचारियों का आक्रोश और बढ़ गया। प्रगणक और सुपरवाइजरों ने आरोप लगाया कि भोजन व्यवस्था में भ्रष्टाचार किया जा रहा है और कर्मचारियों के साथ खानापूर्ति की जा रही है।

वहीं भीषण गर्मी और उमस के बीच प्रशिक्षण केंद्र पर कूलर ना होने और पर्याप्त पंखों की व्यवस्था न होने से कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई कर्मचारी हाथ के पंखों और कागज की प्लेट से हवा करते नजर आए।

'सम्मान के साथ जगह व भोजन नहीं दिया' 

सुपरवाइजर संजय कुमार ने आरोप लगाते हुए बताया कि जनगणना प्रशिक्षण के लिए प्रशासन ने खानापूर्ति कर जगह उपलब्ध करा दी। बताया कि जब तक उन्हें सम्मान के साथ जगह व भोजन नहीं दिया जाएगा। तब तक वह प्रशिक्षण नहीं लेंगे। जबकि दौराला में उचित व्यवस्था है। पैसो का गमन करने का भी आरोप लगाया।

डेढ़ बजे तक नहीं लगी उपस्थिति

कर्मचारियों ने प्रशासनिक लापरवाही पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि सरकार जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य को लेकर गंभीर है और इसके लिए पर्याप्त बजट भी जारी किया गया है। लेकिन स्थानीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते दोपहर डेढ़ बजे तक भी उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं की गई थी।

इससे प्रशिक्षण व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित नजर आई और हंगामा होता रहा। जब इस मामले में तहसीलदार ज्योति से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया तो उनका नंबर नहीं मिला। इसके बाद मैसेज का भी कोई जवाब नहीं आया।

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