दयाल ग्रुप को 30 साल के लिए जमीन लीज पर मामले जांच करेगी दिशा कमेटी
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का जिलाधिकारी वाराणसी को आदेश दिया
वाराणसी । वाराणसी के कमच्छा स्थित 150 साल पुराने ‘थियोसोफिकल सोसाइटी’ की एक प्रॉपर्टी को दयाल ग्रुप को लीज पर दिए जाने के मामले की जांच अब दिशा कमेटी करेगी। दिशा कमेटी की बैठक में चंदौली से समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने इस मुद्दे को उठाया। वीरेंद्र सिंह ने कहा कि काशी में शिक्षा और आध्यात्म की अलख जगाने के लिए जिन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, जिनकी वजह से बीएचयू (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) की स्थापना हो सकी, उनकी संस्था को एक होटल कारोबारी को दिया जा रहा है। वो भी नियम कानून को ताक पर रख कर।
सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने बताया कि 30 साल की लीज के लिए डिस्ट्रिक्ट जज की अनुमति लेनी पड़ती है। क्या ये अनुमति ली गई?थियोसोफिकल सोसाइटी की कमेटी क्या ऐसा करने के लिए अधिकृत थी? ऐसे तमाम मुद्दे हैं जिनकी जांच होनी जरूरी है। इसके साथ ही डीएलडब्लू स्थित गोल्फ कोर्ट का मामला और वरुणा कॉरिडोर परियोजना का मुद्दा भी सांसद वीरेंद्र सिंह ने उठाया।
दिशा कमेटी के अध्यक्ष केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने वाराणसी के जिलाधिकारी को तीनों मामले की जांच और अध्ययन कर के एक महीने के अंदर सांसद वीरेंद्र सिंह को जानकारी देने का निर्देश दिया। दिशा (जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति) की बैठक सोमवार को सर्किट हाउस सभागार में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में विभिन्न विभागों की विकास योजनाओं एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई. बैठक के दौरान सड़क, पेयजल, विद्युत, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं स्वच्छता से संबंधित योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
क्या था थियोसोफिकल सोसायटी विवाद?
वाराणसी के कमच्छा स्थित थियोसोफिकल सोसायटी ट्रस्ट ने संस्था की 26 बिस्वा जमीन दयाल ग्रुप को 30 साल की लीज पर दी थी। दयाल प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से 65 कमरों वाला ये थ्री स्टार होटल पिछले साल भर से यहां बन रहा है। इस फैसले को लेकर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ पदाधिकारी डॉक्टर सूबेदार सिंह के नेतृत्व में पूर्व छात्रों ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया था।
पूर्व छात्र और अधिवक्ता एडवोकेट शम्मी कुमार सिंह ने कहा कि थियोसोफिकल सोसायटी का गठन हुआ था युवाओं में शिक्षा, आध्यात्म और दर्शन के प्रति अभिरूचि पैदा हो और आज इसकी प्रॉपर्टी दी जा रही है होटल और पब बनाने के लिए? जो लोग इसे दयाल ग्रुप को लीज पर दे रहे हैं, क्या वो इसके लिए ऑथराइज हैं? क्या सोसायटी के इस ट्रस्ट का रिनीवल हुआ है? ऐसे बहुत से तथ्य हैं, जिसकी जांच होनी चाहिए।
ये संस्था फिलहाल 4 शैक्षणिक संस्था और लड़कियों के लिए हॉस्टल चला रही है…
बसंत कन्या महाविद्याल.
बसंत कन्या इंटर कॉलेज.
बीटीएस हायर सेकेंडरी स्कूल.
एनी बेसेंट स्कूल (एबीएस).
बसंत बालिका विहार (8 हॉस्टल).
‘कुछ भी अनुचित और नियम के विरुद्ध नहीं हो रहा’
वहीं सोसाइटी के सेक्रेटरी शशिनंदन राजदर ने बताया था कि जिस प्रॉपर्टी पर होटल का निर्माण हो रहा है, वो संस्था की प्रॉपर्टी है और नियमानुसार उसको 30 साल की लीज पर होटल व्यवसायी को दिया गया है। पूर्व में भी यहां व्यावसायिक गतिविधियां होती रही हैं। पहले डाकघर और फिर प्रिंटिंग प्रेस के लिए ये प्रॉपर्टी दी गई है। हमारी संस्था फिलहाल चार शैक्षणिक संस्था और लड़कियों के लिए हॉस्टल चला रही है।
इस निर्माणाधीन होटल का किसी शैक्षणिक संस्था और हॉस्टल से कोई लेना-देना नहीं होगा. सबका अपना दायरा होगा। थियोसोफिकल सोसायटी की तरफ से कहा गया था कि संस्था को अतिरिक्त आय हो सके और हम अन्य शैक्षणिक और आध्यात्मिक गतिविधियां सुचारु रूप से चला सकें। इसलिए इस प्रॉपर्टी को हमने लीज पर दिया है। प्रॉपर्टी हमारी ही रहेगी। हमने रोप वे स्टेशन के लिए भी अपनी प्रॉपर्टी दी है। क्योंकि ये वाराणसी के हित में था और होटल के लिए भी अपनी प्रॉपर्टी लीज पर दी है, क्योंकि हमें आय का स्रोत बढ़ाना था, ताकी संस्था अपनी गतिविधियां निर्बाध तरीके से चला सके।


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