रवींद्र जडेजा जडेजा ने खोले सफलता के राज
एसजी कंपनी मेरठ में पहुंचे भारतीय क्रिकेटर
मेरठ। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार आलराउंडर रवींद्र जडेजा क्रिकेट उपकरण निर्माता कंपनी एसजी में पहुंचे जहां पर उन्होने अपने क्रिकेट करियर के संघर्ष, सफलता, फिटनेस, मानसिकता और रिश्तों के कई अनछुए पहलुओं को साझा किया।
एसजी के सीईओ पारस आनंद के साथ हुई बातचीत में जडेजा ने बताया कि बचपन में क्रिकेट खेलने का सबसे बड़ा संघर्ष खेल का सामान जुटाना था, क्योंकि आर्थिक परिस्थितियां इतनी मजबूत नहीं थीं कि आसानी से किट खरीदी जा सके। जडेजा ने कहा कि बचपन में वे टीवी पर सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गजों को देखकर प्रेरित होते थे और मन में यही सोचते थे कि एक दिन उन्हें भी इसी स्तर पर पहुंचना है।
150 खिलाड़ियों में चयन ने बदल दी जिंदगी
जडेजा ने अपने करियर के पहले बड़े मौके को याद करते हुए बताया कि पुणे में इंडिया अंडर-19 नेट सिलेक्शन उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट था। वहां करीब 150 खिलाड़ियों में से सिर्फ 15 का चयन होना था। उस समय उनकी उम्र करीब साढ़े 17 साल थी।
उन्होंने बताया कि एक प्रैक्टिस मैच में 50 रन बनाने के बाद उन्हें पहली बार यह भरोसा हुआ कि वे भारत की जूनियर टीम का हिस्सा बन सकते हैं। इसके बाद 2005 में उनका चयन अंडर-19 एशिया कप के लिए हुआ और फिर 2006 के अंडर-19 विश्व कप में भारतीय टीम का हिस्सा बने। उस टूर्नामेंट में भारत फाइनल तक पहुंचा था।
कोच ने कभी शार्टकट नहीं लेने दिया
जडेजा ने अपनी सफलता का बड़ा श्रेय अपने बचपन के कोच महेंद्र सिंह चौहान को दिया। उन्होंने कहा कि उनके कोच को तब से उनके टैलेंट पर भरोसा था, जब वे सिर्फ आठ साल के थे। जडेजा ने कहा कि उनकी बेहतरीन फिटनेस और फील्डिंग के पीछे भी कोच की कड़ी ट्रेनिंग का बड़ा योगदान है। जडेजा ने मुस्कुराते हुए कहा कि कोच मैदान पर इतना दौड़ाते थे कि आज उसकी कीमत समझ आती है।
रणजी का प्रदर्शन बना टीम इंडिया का टिकट
भारतीय टीम में चयन का किस्सा साझा करते हुए जडेजा ने बताया कि 2008 के शानदार रणजी सीजन में उन्होंने करीब 750 रन बनाए और 40 से ज्यादा विकेट लिए। इसके बाद श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टीम में जगह मिली। दिलचस्प बात यह रही कि टीम में चयन की जानकारी उन्हें मीडिया के फोन काल से मिली। बताया कि, पहले तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ। काफी नर्वस हो गए थे।
वनडे और टेस्ट दोनों कैप सचिन तेंदुलकर के हाथों से मिलीं
टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम का पहला अनुभव याद करते हुए जडेजा ने कहा कि जब उन्होंने पहली बार सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, महेंद्र सिंह धोनी, जहीर खान और युवराज सिंह को साथ देखा तो वे एकदम चुप हो गए थे। उन्होंने बताया कि अपने पहले वनडे मैच में उन्होंने नाबाद 62 रन बनाए थे। खास बात यह रही कि उन्हें वनडे और टेस्ट दोनों कैप सचिन तेंदुलकर के हाथों से मिलीं। कहा कि जिस खिलाड़ी को टीवी पर देखकर बड़ा हुआ, उसी के हाथों कैप मिलना सपने जैसा था।
फिटनेस दिखनी चाहिए मैदान पर, सोशल मीडिया पर नहीं
फिटनेस को लेकर जडेजा का नजरिया बेहद स्पष्ट दिखा। उन्होंने कहा कि फिटनेस का असली मतलब मैदान पर प्रदर्शन है, न कि सोशल मीडिया पर कुछ सेकंड के वर्कआउट वीडियो। बोले, अगर आप फिट हैं तो वह आपके खेल में दिखना चाहिए। घुटने की गंभीर सर्जरी के बाद पांच-छह महीने क्रिकेट से दूर रहने का दौर उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा। लेकिन उन्होंने घरेलू क्रिकेट में तमिलनाडु के खिलाफ रणजी मैच में सात विकेट लेकर जोरदार वापसी की। इसके बाद आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में गेंद और बल्ले दोनों से शानदार प्रदर्शन कर आत्मविश्वास वापस पाया।
खराब दौर में भी प्रक्रिया नहीं बदलता
जडेजा ने अपनी मानसिकता पर खुलकर बात करते हुए कहा कि वे केवल अपनी प्रक्रिया पर ध्यान देते हैं। कहा कि ट्रेनिंग, फिटनेस और प्रैक्टिस मेरे नियंत्रण में हैं। नतीजे मेरे हाथ में नहीं। इसलिए परिणाम को नियति पर छोड़ देता हूं। उन्होंने कहा कि खराब फार्म के दौरान भी वे अपने रूटीन में कोई शार्टकट नहीं अपनाते, क्योंकि उन्हें अपनी मेहनत पर पूरा भरोसा है।
इसलिए खिंचवाते हैं फैंस के साथ फोटो...
फैंस के साथ रिश्ते पर जडेजा ने बेहद भावुक बात कही। उन्होंने माना कि स्टारडम के कारण निजी आजादी कम हो जाती है, लेकिन फिर भी वे फैंस के साथ फोटो खिंचवाने की कोशिश करते हैं। कहा कि एक फोटो उनके लिए जिंदगीभर की याद हो सकती है। मैं खुद अंडर-14 के दिनों में वीवीएस लक्ष्मण, जहीर खान और युवराज सिंह के साथ फोटो खिंचवाकर बेहद खुश हुआ था। बताया कि आज भी वे तस्वीरें उनके पास हैं।
सुरेश रैना ने शुरुआती दिनों में खूब की मदद
जडेजा ने अपने करीबी दोस्त सुरेश रैना का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय टीम में शुरुआती दिनों में रैना ने उनकी बहुत मदद की। दोनों लंबे समय तक रूममेट भी रहे। उन्होंने बताया कि 2006 अंडर-19 विश्व कप में उन्होंने एसजी बैट का इस्तेमाल किया था। बाद में कुछ समय दूसरे ब्रांड्स के साथ जुड़े, लेकिन फिर एसजी परिवार में लौट आए। जडेजा ने यह भी बताया कि रैना उस दौर में सिर्फ उनकी ही नहीं, बल्कि 50-60 युवा खिलाड़ियों की भी बैट देकर मदद करते थे।
क्रिकेट से कोई शिकायत नहीं
भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर जडेजा ने बेहद संतुलित जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे भविष्य की ज्यादा चिंता नहीं करते। 17-18 साल इतने बड़े देश का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में सौभाग्य है। भगवान ने बहुत कुछ दिया है। कहा कि क्रिकेट से यू हैं कोई शिकायत नहीं। जडेजा ने युवा क्रिकेटरों को संदेश दिया कि संघर्ष चाहे जितना हो, अनुशासन, मेहनत और सही मानसिकता से शिखर तक पहुंचा जा सकता है।


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