*अर्थ व्यवस्था का संकट*
इलमा अज़ीम
भारतीय अर्थ व्यवस्था को लेकर सरकार लगातार तेज विकास, बढ़ते बुनियादी ढांचे और विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का दावा करती रही है। अब इस दावे की पोल खुलती चली जा रही है । इस समय भारत की अर्थव्यवस्था दो हिस्सों में बंट चुकी है। एक संगठित क्षेत्र, जो कॉरपोरेट और शेयर बाजार की वृद्धि को दिखाता है, दूसरा असंगठित क्षेत्र, जहां देश की लगभग 94 प्रतिशत कार्यशक्ति काम करती है, जो लगातार संकट में है। उसकी वास्तविकता सरकार उजागर नहीं करती है। प्रो. अरुण कुमार के अनुसार सबसे बड़ा संकट मांग में कमी आने का है। जब आम लोगों की आय घटती है, रोजगार कम होता है, उस समय सबसे पहले ग्रामीण अर्थव्यवस्था और असंगठित क्षेत्र कमजोर होता है। बाजार में मांग घटती है। इसका सीधा असर उद्योगों के उत्पादन, कारोबार और निवेश पर पड़ता है। यही कारण है कि ऊंची जीडीपी वृद्धि के बावजूद देश मे रोजगार का सृजन नहीं हो रहा है।
अर्थव्यवस्था में दिखाता है, दूसरा असंगठित क्षेत्र, जहां देश की लगभग 94 प्रतिशत कार्यशक्ति काम करती है, जो लगातार संकट में है। उसकी वास्तविकता सरकार उजागर नहीं करती है। प्रो. अरुण कुमार के अनुसार सबसे बड़ा संकट मांग मे कमी आने का है। जब आम लोगों की आय घटती है, रोजगार कम होता है, उस समय सबसे पहले ग्रामीण अर्थव्यवस्था और असंगठित क्षेत्र कमजोर होता है। बाजार में मांग घटती है। इसका सीधा असर उद्योगों के उत्पादन, कारोबार और वि निवेश पर पड़ता है।
यही कारण है कि ऊंची जीडीपी वृद्धि के बावजूद देश मे रोजगार का सृजन नहीं हो रहा। उल्टे नौकरियां जा रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत में बढ़ती बेरोजगारी और से असमानता को लेकर कई वर्षों से चिंता जताई जा रही है। अर्थशास्त्री नोटबंदी, जीएसटी और १ कोरोना महामारी के बाद असंगठित क्षेत्र को जो नुकसान हुआ है उसके बारे में कई बार अपनी चिंता पिछले वर्षों में व्यक्त कर चुके हैं।
सरकार ने इस पर विशेष ध्यान नहीं दिया। छोटे व्यापारी, कुटीर उद्योग, किसान और दिहाड़ी मजदूर सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। प्रो. अरुण कुमार का दावा है, सरकारी आंकड़े इस वास्तविक स्थिति को छुपाने का काम करते हैं। आंकड़ों को बदल देते हैं। सही मायने में कहा जाए तो सरकार आंख बंद करके जीडीपी और अर्थव्यवस्था को बेहतर बताकर अपनी पीठ थपथपाने में लगी हुई है। सरकार ने जीडीपी मापन की वर्तमान प्रणाली में असंगठित क्षेत्र की गिरावट को सही ढंग से वास्तविक स्थिति को शामिल नहीं किया है। जिसके कारण देश की आर्थिक स्थिति कागजों में कुछ और है, और वास्तविक स्थिति कुछ और है।
वर्तमान स्थिति यह है, शेयर बाजार रिकॉर्ड स्तर पर है। बेरोजगारी लगातार बढ़ती चली जा रही हैं। अर्थव्यवस्था में जो बदलाव आए हैं उसके कारण भारत सहित वैश्विक स्तर पर लोगों की नौकरियां जा रही हैं। भारत के लगभग 80 करोड लोग मुफ्त राशन पर निर्भर हैं। भारत की अर्थव्यवस्था वास्तव में मजबूत होती, तो रोजगार और लोगों की आय में यह परिवर्तन दिखाई देता। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है।





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