सख्त जवाबदेही जरूरी
राजीव त्यागी
पेपर लीक की समस्या को समाप्त करने के लिए सशक्त और देश में एकसमान कानून की तत्काल जरूरत है। वर्तमान में लागू पब्लिक एग्जामिनेशंस एक्ट में तीन से दस वर्ष की जेल और जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन इसका क्रियान्वयन कमजोर रहा है। नए कानून में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े हर व्यक्ति- प्रश्न सेटर, प्रिंटर, परिवहनकर्ता और केंद्र अधीक्षक—की कड़ी सुरक्षा जांच, डिजिटल ट्रैकिंग और जवाबदेही तय होनी चाहिए।
पेपर तैयार करने से लेकर वितरण तक ब्लॉकचेन या एआई आधारित एन्क्रिप्शन प्रणाली अपनाई जाए। लीक कराने, खरीदने या मध्यस्थता करने वालों के लिए न्यूनतम दस वर्ष की जेल, संपत्ति जब्ती और आजीवन परीक्षा प्रतिबंध जैसी कठोर सजाएं हों। साथ ही व्हाट्सएप, टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए। विकसित देशों में पेपर लीक जैसी घटनाएं अत्यंत दुर्लभ हैं क्योंकि उनकी परीक्षा प्रणाली पारदर्शी, तकनीकी रूप से मजबूत और जवाबदेह है। अमेरिका में चीटिंग को गंभीर नैतिक उल्लंघन माना जाता है, जिसके परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय से निष्कासन या डिग्री रद्द हो सकती है।
यूरोपीय देशों जैसे फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन में भी स्थिति बेहतर है। फ्रांस में बैकलॉरिएट परीक्षा में चीटिंग पर तीन वर्ष तक की जेल हो सकती है। ब्रिटेन की कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड जैसी परीक्षाओं में लीक की घटनाएं लगभग नहीं होतीं। भारत में सुधार के लिए बहुआयामी रणनीति अपनानी होगी। पूरी परीक्षा प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जाए, जिसमें प्रश्न बैंक से रैंडम प्रश्न चुने जाएं और हर छात्र को अलग सेट मिले। एनटीए जैसी संस्थाओं को स्वायत्त लेकिन सख्त जवाबदेही के दायरे में लाया जाए तथा स्वतंत्र बोर्ड द्वारा नियमित ऑडिट किया जाए।
बड़े कोचिंग संस्थानों पर वित्तीय निगरानी और छापेमारी बढ़ाई जाए। स्कूल स्तर से नैतिक शिक्षा और जागरूकता अभियान चलाएं। भारत एक युवा राष्ट्र है। यदि इन युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास टूट गया तो देश की विकास क्षमता प्रभावित होगी। निष्पक्ष परीक्षाएं ही प्रतिभा को सही दिशा दे सकती हैं और कौशल-आधारित समाज का निर्माण कर सकती हैं। सरकार को राजनीतिक लाभ से ऊपर उठकर इस मुद्दे को प्राथमिकता देनी चाहिए।




No comments:
Post a Comment