स्वर्ण पदक जीतकर लौट रहे पैरा एथलीट की हत्या 

चेहरा कुचला , महिला दोस्त ने फोन से पहचान की 

घर में चल रही थी स्वागत की तैयारी , साथी एथलीट को पुलिस ने लिया हिरासत में 

गाजियाबाद । राजधानी से सटे गाजियाबाद में एक सनसनी खेज मामला प्रकाश में आया है। जहां पर स्वर्ण पदक जीत कर लौट रहे पैरा एथलीट की गोली मारकर हत्या कर दी गयी। इतना ही नहीं पहचान न हो पाए उसका चेहरा कुचल दिया गया। पैरा खिलाड़ी का शव गाजियाबाद के साईउपवन में मिला है। घर में राष्ट्रीय पदक विजेता के स्वागत की तैयारी चल रही थी। इस मामले में पुृलिस साथी एथलीट को हिरासत में लिया है। 

बंगलूरू में 8वीं इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में स्वर्ण व रजत पदक जीत घर लौट रहे अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट चिराग त्यागी (24) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। गाजियाबाद के साईं उपवन में शनिवार दोपहर उनका शव मिला। हत्या के आरोप में साथी पैरा एथलीट यश खटीक को हिरासत में लिया गया है। डीसीपी धवल जायसवाल के अनुसार, चिराग को पीठ में गोली मारने के बाद उसका चेहरा बुरी तरह कुचल दिया गया था। मौके से चिराग का एक मोबाइल फोन मिला, जबकि दूसरा फोन गायब था। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर यश खटीक को हिरासत में लिया गया। 

 क्वालीफाइन रद होने पर दोस्त ने दिया घटना को अंजाम 

पूछताछ में उसने बताया कि दोनों ने ब्लाइंड श्रेणी में प्रतियोगिता में साथ में हिस्सा लिया था। चिराग 100 व 400 मीटर दौड़ में हिस्सा लेते थे। दस्तावेज सत्यापन के दौरान चिराग ने एक बार यश की शिकायत कर दी थी। तब यश का क्वालिफिकेशन रद्द कर दिया गया था। 

इसका बदला लेने के लिए उसने इस वारदात को अंजाम दिया। उसकी निशानदेही पर पुलिस पिस्टल की बरामदगी में जुटी है। पुलिस ने मुरादनगर के वसंतपुर सैथली निवासी चिराग का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने चिराग के पिता मनोज की तहरीर पर केस दर्ज किया है।

घर में चल रही थी राष्ट्रीय पदक विजेता के स्वागत की तैयारी, पसरा मातम

चिराग जब भी प्रतियोगिताओं और कैंप से लौटते तो केक काटकर उनका स्वागत होता। इस बार साथ में दो पदक और एशियन प्रतियोगिता का चयन भी था तो तैयारी उसके अनुसार ही थी। उनके घर पहुंचने की सूचना से पहले गाजियाबाद के बंसतपुर सैथली गांव के लोग उनके घर पर इंतजार कर रहे, लेकिन एक कॉल ने खुशियों को गम बदल दिया।

चिराग के चाचा ने बताया कि उनका पूरा परिवार साथ रहता है। चिराग के पदक जितने पर बुआ और दूसरे रिश्तेदार घर पर आ रहे थे। उन्होंने बताया कि चिराग की 70 वर्षीय दादा शीला देवी और मां निशा देवी को इस घटना के बाद संभालना मुश्किल हो रहा है।

हादसे के बाद बने अंतरराष्ट्रीय एथलीट

चिराग के चचेरे भाई अंकुर त्यागी ने बताया कि चिराग को दिखने में दिक्कत थी, लेकिन परिवार की मेहनत और उसकी लगन ने ट्रैक पर फर्राटा भरना सिखाया। उन्होंने बताया कि भाई की हिम्मत का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि दो साल पहले 200 किलो से स्क्वाट लगाते हुए फिसलने से हादसे में उसके पैर में गंभीर चोट आई। इसके बाद भी उसने न हिम्मत हारी और न को छोड़ा। उसने दो साल में दर्द से उबरकर ट्रैक पर वापसी और कई पदक अपने नाम करने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में नाम रोशन किया। 

चिराग से थी एशियन गेम्स में गोल्ड की उम्मीद

चिराग की हत्या की सूचना के बाद पैरा पावरलिफ्टिंग चेयरमैन जीपी सिंह गाजियाबाद पहुंचे। उन्होंने इस मामले की जानकारी पुलिस से ली। उन्होंने बताया कि चिराग आने वाले समय में देश का एक बड़ा पैरा एथलीट बनने वाला था।

उसकी अभी ही टी-12 (दृष्टिबाधित श्रेणी) में अच्छी रैंक रही थी। वह लगातार खुद को बेहतर कर रहा था। एशियन पैरा गेम्स में पदक जीतने की उम्मीद थी, लेकिन देश का चिराग बुझ गया। बंगलूरू में चिराग ने 49.69 सेकंड में 400 मीटर की दौड़ को पूरा किया था। दावा है कि उन्होंने हाल में एशियन रिकॉर्ड बनाया था।

महिला मित्र के फोन से हुई पहचान

एसीपी कोतवाली उपासना पांडेय ने बताया कि पैरा एथलीट चिराग त्यागी की पहचान इंदौर में रहने वाली उसकी महिला मित्र के फोन कॉल के आधार पर हुई। वह अमृतसर एक्सप्रेस से शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे गाजियाबाद पहुंची। सुबह उसकी चिराग से बात हुई थी, लेकिन गाजियाबाद पहुंचने के बाद उससे संपर्क नहीं हो सका। वह लगातार फोन कर रही थी। जब पुलिस साईं उपवन पहुंची, तो चिराग के मोबाइल फोन पर फिर कॉल आई। 

पुलिस ने फोन उठाया, तो महिला को हत्या की जानकारी दी। महिला से बातचीत पर पता चला कि जिसकी हत्या हुई है, वह पैरा एथलीट चिराग है। पुलिस उससे पूछताछ में जुटी है। महिला मित्र ने पुलिस को बताया कि चिराग से उसकी पहचान इंस्टाग्राम के माध्यम से हुई थी। दोनों नियमित रूप से बातचीत करते थे और गहरी दोस्ती हो गई थी। प्रतियोगिता से पहले वह चिराग से मिलने बेंगलूरू भी गई थी। इसके बाद दोनों ने गाजियाबाद में मिलने की योजना बनाई थी।

दिल्ली में सुबह 9:12 बजे पैदल जाते दिखे

एसीपी ने बताया कि चिराग दिल्ली से गाजियाबाद तक कैसे पहुंचे, इसकी जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। दिल्ली में हॉस्टल के पास लगे एक सीसीटीवी कैमरे में वह सुबह 9:12 बजे पैदल जाते दिखाई दिए हैं। पुलिस मेट्रो स्टेशनों और आसपास के अन्य सीसीटीवी कैमरों की भी जांच कर रही है। साथ ही मोबाइल डेटा और कैब बुकिंग संबंधी जानकारी भी जुटाई जा रही है।

कोच और साथी खिलाड़ी बोले, देश के लिए गोल्ड लाने वाला था चिराग

एथलीट चिराग त्यागी की मौत से कोच और साथी खिलाड़ी सदमे में हैं। कोच गजेंद्र और खिलाड़ी अखिल का कहना है कि ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड लाने के लिए चिराग पूरी तरह से तैयार थे। एशिया में उनसे तेज दौड़ने वाला पैरा एथलीट शायद ही कोई होगा। चिराग के कोच गजेंद्र ने बताया कि शनिवार सुबह करीब सवा नौ बजे नाश्ता करने के बाद दिल्ली स्थित जवाहर लाल लाल नेहरू स्टेडियम से वह घर के लिए निकले थे। 

 

उन्होंने बताया कि चिराग कई वर्षों से जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में अभ्यास कर रहे थे। स्टेडियम के हॉस्टल में कोच के सामने वाले कमरे में ही चिराग रहते थे। कोच ने बताया कि चिराग अपना अधिकतर समय अभ्यास में व्यतीत करते थे। ओलंपिक में गोल्ड लाने के लिए वह निरंतर अभ्यास कर रहे थे, लेकिन इससे पहले ही यह दुखद सूचना आ गई। उनके गांव बसंतपुर सैंथली के ही एक खिलाड़ी अखिल ने बताया कि वह अक्सर चिराग के साथ ही घर जाते थे। बताया कि चिराग के लिए खेल ही सब कुछ था।

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