ड्रिप इरिगेशन पर जिले में दस करोड़ खर्च करेगी योगी सरकार 

- 1365 हेक्टेयर क्षेत्रफल को सिंचित करने का रखा गया है लक्ष्य

- दो वर्षों में 2128 किसानों के माध्मम से 2211 हेक्टेयर में बढ़ाया गया फसल उत्पादन

- इस वर्ष छोटे किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान राशि प्रदान की जाएगी

मेरठ। प्रदेश सरकार ने खेतों में सिंचाई के लिए प्रयोग की जाने वाली ड्रिप इरिगेशन पद्वति को जिले में बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। चालू वित्त वर्ष में इस योजना पर 10 करोड़ 32 लाख 16 हजार रूपये की धनराशि खर्च की जाएगी। ड्रिप इरिगेशन योजना किसानों को इसलिए भी पसंद आ रही है कि इसके लागू किए जाने से फसल की पैदावार में 20 से 30 प्रतिशत तक का इजाफा हो रहा है। 

उद्यान विभाग की ओर से फसलों की उत्पादन लागत को कम करने और पैदावार को बढ़ाने के लिए कई योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। ड्रिप इरिगेशन योजना के तहत खेतों में बूंद-बूंद पानी अर्थात टपक विधि से सिंचाई की जा रही है। इस योजना के लिए लघु सीमांत किसानों (2 हेक्टेयर तक जोत वाले) को 90 प्रतिशत और सामान्य कृषकों को 80 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जा रही है। नई व्यवस्था के तहत सब्सिडी की राशि किसानों को न देकर खेतों में ड्रिप इरिगेशन व्यवस्था प्रदान करने वाली कंपनी को दी जाएगी। पिछले दो वर्षों में मेरठ जिले में 2128 किसानों ने ड्रिप इरिगेशन पद्वति को अपनाया है। इन दो वर्षों में जिले का ड्रिप इरिगेशन पद्वति से सिंचित क्षेत्र 2211.75 हेक्टेयर हो गया है। इस योजना पर प्रदेश सरकार की तरफ से वर्ष 2024-25 में 1380.63 लाख और वर्ष 2025-26 में 1334 लाख रूपये खर्च किए गए थे। 

30 प्रतिशत तक पैदावार वृद्वि

जिला उद्यान अधिकारी अरूण कुमार ने बताया कि इस योजना को अपनाने से पानी की बर्बादी कम हो जाती है। जिससे ंिसंचाई में प्रयोग की जाने वाली विद्युत और विद्युत व्यय दोनों ही कम हो जाते हैं। इससे फसल उत्पादन में व्यय भी कम हो जाता है। ड्रिप इरिगेशन विधि में क्योंकि पानी की हर बूंद पौधे की जड़ में पहुंचती है। इस कारण फसल उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक की वृद्वि हो जाती है। 

खरपतवार की पैदावार नहीं

वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक संजय सिंह ने कहा कि इस वर्ष योजना का लाभ देने के लिए किसानों को चिन्हित करने का कार्य शुरू हो गया है। इस योजना में फसल को दिए जाने वाले पोषक तत्व सीधे पौधे की जड़ में पहुंचते हैं, जिस कारण फसल में खरपतवार पैदा नहीं हो पाती है। ऐसे में किसानों द्वारा श्रमिकों की मजदूरी पर दिए जाने वाला व्यय  कम हो जाता है। जिससे यह योजना किसानों को काफी रास आ रही है।

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