केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, ईडी में बड़े स्तर पर पद बढ़ाए जाएंगे, होगी नई भर्तियां

नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) में बड़े स्तर पर पद बढ़ाने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग की तरफ से जारी आदेश में ईडी के अलग-अलग विभागों में नई भर्तियों और पदों की मंजूरी दी गई है। आदेश के मुताबिक, ईडी के जांच वाले विभाग में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की गई है। एडिशनल डायरेक्टर के पद 10 से बढ़ाकर 24 किये गये है। 

इसके साथ ही ज्वाइंट डायरेक्टर 28 से 49, डिप्टी डायरेक्टर 148 से बढ़ाकर 267, असिस्टेंट डायरेक्टर के पद 255 से बढ़ाकर 531 कर दिए गए हैं। वहीं, एनफोर्समेंट ऑफिसर के पद 355 से बढ़ाकर 606 और असिस्टेंट एनफोर्समेंट ऑफिसर के पद 425 से बढ़ाकर 803 कर दिए गए हैं। इसके अलावा जॉइंट डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर और एडिशनल डायरेक्टर जैसे बड़े पदों की संख्या भी बढ़ाई गई है। कानूनी विभाग में भी नए पद जोड़े गए हैं ताकि मामलों की सुनवाई और कानूनी काम तेजी से हो सके। 

लीगल कैडर में भी बढ़ेंगे पद

आदेश में एडजुडिकेशन विंग, सिस्टम विभाग, मंत्रालयी स्टाफ और सुरक्षा विभाग में भी कई नए पद बनाने की मंजूरी दी गई है। सुरक्षा विभाग में सीनियर सिपाही के पद 209 से बढ़ाकर 273 कर दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि बढ़ते मामलों और जांच के काम को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। नए पद बनने से ईडी की जांच क्षमता मजबूत होगी और मामलों की जांच में तेजी आएगी।

 लीगल कैडर में, एडिशनल डायरेक्टर (प्रॉसिक्यूशन) की संख्या एक से बढ़ाकर सात कर दी गई है। डिप्टी लीगल एडवाइज़र सात से बढ़कर 18 हो जाएंगे, जबकि असिस्टेंट लीगल एडवाइज़र 18 से बढ़कर 36 हो जाएंगे। एडजुडिकेशन विंग में भी विस्तार देखने को मिलेगा, जिसमें नए पद बनाए जाएंगे। एडिशनल डायरेक्टर (एडजुडिकेशन) के पद शून्य से बढ़कर दो हो जाएंगे, जॉइंट डायरेक्टर शून्य से बढ़कर तीन, डिप्टी डायरेक्टर शून्य से बढ़कर पाँच और असिस्टेंट डायरेक्टर शून्य से बढ़कर दस हो जाएंगे, जबकि स्पेशल डायरेक्टर (एडजुडिकेशन) का पद एक पर अपरिवर्तित रहेगा। 

मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में आएगी तेजी

वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के बढ़ते मामलों को देखते हुए ईडी के कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने का सरकार का यह कदम बहुत महत्वपूर्ण है। ज़्यादा कर्मचारियों के होने से, एजेंसी जांच और मुकदमों में होने वाली देरी को कम कर सकती है, जिससे अभियोजन शिकायतें या चार्जशीट तेज़ी से दायर की जा सकेंगी और हाई-प्रोफाइल मामलों में तेज़ी से प्रगति होगी।

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