एयरफोर्स ने 2 बच्चों को एमआई-17 हेलिकॉप्टर से बचाया
पानी टंकी पर 5 बच्चे रील बनाने चढ़े थे; सीढ़ी टूटने से 3 नीचे गिरे, एक की मौत
सिद्धार्थनगर। रील बनाना एक शगल बना गया है। युवा अपनी जान को जोखिम में डालने से नहीं कतरा रही है। इसका नमुना सिद्धार्थ नगर में देखने को मिला। जहां रील बनाने के पांच बच्चे पानी के टंकी पर चढ़ गये। तरते वक्त सीढ़ी टूट गई। 3 बच्चे नीचे गिर गए। इनमें से 1 की मौत हो गई, जबकि 2 की हालत गंभीर है। 2 बच्चे रॉड पकड़कर लट गए। फिर धीरे-धीरे टंकी पर चढ़ गए। पानी की टंकी पर 16 घंटे से फंसे बच्चों का वायुसेना ने MI-17 हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू किया। इसमें सिर्फ 15 मिनट लगे। दोनों को गोरखपुर के एयरफोर्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
दरअसल, शनिवार को काशीराम आवास कॉलोनी में 5 बच्चे रील बनाने के लिए 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़े थे। उतरते वक्त सीढ़ी टूट गई। 3 बच्चे नीचे गिर गए। इनमें से 1 की मौत हो गई, जबकि 2 की हालत गंभीर है। 2 बच्चे रॉड पकड़कर लट गए। फिर धीरे-धीरे टंकी पर चढ़ गए।
टंकी के आस-पास दलदल होने की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कतें आईं। हाईड्रोलिक क्रेन मंगाई गई, लेकिन दल-दल के कारण क्रेन टंकी तक नहीं पहुंच पाई। इसलिए 150 मीटर सड़क बनाने का काम शुरू किया गया। देर रात तक करीब 120 मीटर तक सड़क बना ली गई।
इस बीच, रात करीब 3 बजे तेज बारिश शुरू हो गई, जिससे काम रोकना पड़ा। हालात को देखते हुए प्रशासन ने सेना की मदद मांगी। इसके बाद रविवार सुबह लगभग 5.20 बजे वायु सेना का MI-17 हेलिकॉप्टर घटनास्थल पर पहुंचा। दोनों बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया।
जिला मुख्यालय स्थित काशीराम आवास कॉलोनी में मोहाने का रहने वाला बाले (12) अपने मौसेरे भाई दीपचंद के घर आया था। शनिवार दोपहर करीब 3 बजे वो पड़ोस के गोलू (15), शनि (11), कल्लू (15) और पवन (16) के साथ आवास के पास ही जर्जर पानी की टंकी पर रील बनाने के लिए चढ़ गया।
ऊपर थोड़ी देर रुकने के बाद सभी एक-एक करके नीचे आने लगे। तभी अचानक 4 सीढ़ी उतरने के बाद ही जर्जर सीढ़ी टूट गई। जिसके चलते बाले, शनि और गोलू नीचे आ गिरे। बाले के ऊपर सीढ़ी का मलबा गिर गया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। शनि और गोलू घायल हो गए। कल्लू और पवन ऊपर ही फंस गए।
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। आनन फानन में लोगों ने गोद में उठाकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया। जहां बाले को डॉक्टरों को मृत घोषित कर दिया। सूचना के बाद मौके पर डीएम शिवशरणप्पा जीएन और एसएसपी अभिषेक महाजन समेत कई अफसर पहुंचे।राहत और बचाव कार्य शुरू कराया। मौके पर पोकलेन बुलाकर मलबा हटाया गया। बच्चों तक रस्सी के माध्यम से खाना और पानी पहुंचाया गया।
पानी की टंकी के चारों तरफ पानी भरा है। इस वजह से जमीन दलदल जैसी हो गई है। रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए गोरखपुर से हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म क्रेन मंगाई गई। इसमें लिफ्ट लगी होती है, जो सीढ़ी के जरिए 135 फीट ऊंचाई तक जाती है।
पहले हाइड्रोलिक क्रेन का मेन सड़क पर ट्रायल किया गया। इस दौरान उसके लिफ्ट सेंसर में तकनीकी खराबी आ गई। इसके बाद लखनऊ से क्रेन मंगाई गई। दूरी ज्यादा होने की वजह से दूसरा रास्ता पर तलाशा जाने लगा।
इसके बाद सड़क बनाकर टंकी तक पहुंचने का रास्ता अपनाया गया। जल्द ही 150 मीटर तक सड़क बनाने का काम शुरू किया गया। तीन जेसीबी और एक पोकलेन की मदद से देर रात तक 120 मीटर सड़क तैयार कर ली गई। फिर मौसम खराब हो गया। इसके बाद वायुसेना की मदद मांगी गई।
26 साल से बंद है टंकी
बताया जाता है कि जिस टंकी पर बच्चे चढ़े थे, वो करीब 26 साल से बंद है। जर्जर होने के चलते उसको प्रयोग में नहीं लिया जा रहा था। हालांकि, उस पर चढ़ने से रोकने के लिए प्रशासन की तरफ से कोई बोर्ड या सूचना नहीं दी गई थी।


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