सेंट्रल मार्केट में होगी व्यापार की होगी तेंरहवी 

 बोले अब खुल कर करेंगे विपक्ष का स्वागत

 मेरठ। मेरठ की सेंट्रल मार्केट प्रकरण में व्यापारियों और स्थानीय निवासियों का प्रदर्शन पिछले 12 दिनों से लगातार जारी है। इसी बीच धरने पर बैठी महिलाओं ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि बुधवार यानी आज प्रदर्शन के 13 वे दिन व्यापारी और स्थानीय निवासी मिलकर व्यापार  खत्म हो जाने को लेकर उनकी तेहरवी करेंगे।

व्यापारियों ने कहा कि जहां प्रदर्शन चल रहा है वह मेरठ में एक पार्टी  का गढ़ है। हम पिछले 40 साल से यहां रह रहे हैं और तभी से  कोर वोटर हैं। जिसके चलते हमने एक यकीन कर अपने जनप्रतिनिधियों से उम्मीद और गुहार लगाई थी कि वह हमारी मदद करेंगे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।हमारा कोई जनप्रतिनिधि जिसे हमने वोट देकर सदन में भेजने का काम किया उन्होंने हमारे हक में यहां तक आना भी उचित नहीं समझा। जिसके चलते उनका भरोसा टूट गया है ।

महिलाओं ने कहा कि 12 दिन से उम्मीद लगाकर हम यहां बैठे हैं कि वह हमें न्याय दिलाने में हमारी मदद करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब इस भरोसे और व्यापार के खत्म होने की तेहरवी करने के भी करने के साथ यह ऐलान करते हैं कि इस प्रदर्शन में विपक्ष या बाहरी लोग जो यहां आना चाहते हैं उनका समर्थन करेंगे और उनका स्वागत भी करेंगे।महिलाओं ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान देर भी होने के बाद भी हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ऐसा प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक हमे न्याय नहीं मिल जाता है।

 बता दें  सेंट्रल मार्केट के 859 भूखंडों को सेटबैक के अनुसार ध्वस्त करने और उनमें चल रही कॉमर्शियल गतिविधियों को बंद करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने बीती 9 अप्रैल को दिया था। इसके बाद 10 अप्रैल से शास्त्री नगर के सेक्टर दो स्थित तिरंगा चौक पर प्रदर्शन जारी है। वहां बैठी महिलाओं का कहना है कि वह अपनी दुकान तो बंद कर सकते हैं लेकिन जो उनके छोटे-छोटे मकान हैं उनमें सेटबैक कैसे छोड़ सकते हैं यदि वह सेटबैक के अनुसार इन्हें ध्वस्त कर लेते हैं तो वह अपने मकान में रह नहीं पाएंगे।

पुलिस और प्रशासन ने जो बाहरी लोग वहां प्रदर्शन में पहुंच रहे थे उनको न्यायालय की अवमानना का नोटिस भी दिया है। जिस पर व्यापारी और विपक्ष नेताओं का कहना है कि प्रशासन दबाव बनाकर यहां के निवासियों की बात को दबाकर यह प्रदर्शन खत्म करना चाहता है। इसीलिए ऐसा तानाशाह रवैया दिखाया जा रहा है कि कोई किसी के दुख में भी शामिल नहीं हो सकता है।

न्याय की उम्मीद पर बैठे हैं

प्रदर्शन में बैठी महिलाओं का कहना है कि उनको एक उम्मीद है कि उन्हें न्याय जरूर मिलेगा सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए वह दुकान बंद कर लेंगे लेकिन अगर सरकार मध्यस्थ करें या हमारी आवाज वहां उठाई जाए तो हमारे मकान टूटने से बच सकते हैं। इसी उम्मीद पर हम यहां प्रदर्शन कर रहे हैं इसमें हम माननीय न्यायालय के आदेश की अवहेलना बिल्कुल नहीं कर रहे हैं।

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