बदलते मौसम में एलर्जी से बचाकर रहे-डॉ दिव्यांशु सेंगर

डॉक्टर बोले खानपान पर भी विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता

मेरठ।अप्रैल के महीने में जहां एक और बूंदाबांदी हो रही है तो वहीं सुहानी सुबह और तेज धूप वाली दोपहर का महीना लोगों को परेशान भी कर रहा है। इस मौसम की सबसे बड़ी परेशानी है। काफी लोगों को एलर्जी हो जाती है। यह मौसम फूलों की खुशबू और रंगीन नजारों से भरा होता है, मगर परागण व फफूंद हवा में फैले हैं और लाखों लोगों को एलर्जी की चपेट में ले रहे हैं। शीख, नाक, बहना, आँखों में खुजली और सांस की समस्या आम हो रही है। इस स्थिति में, दवाएं राहत तो देती हैं, पर सही आहार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इस मौसम में अपने खानपान पर भी विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है।

मेडिकल कॉलेज के  डॉ. दिव्यांशु सेंगर का कहना है कि सबसे आसान और प्रभावी उपाय है कि पर्याप्त पानी पीते रहें। दिन में 8 से 10 ग्लास पानी शरीर को हाइड्रेट रखता है, जिससे नाक और गले की झिल्लियां नम्र रहती हैं और पराकण आसानी से बाहर निकल जाते हैं। डिहाइड्रेशन होने पर, हिस्टामिन का स्तर बढ़ जाता है, जो एलर्जी के मुख्य रसायन है। गुनगुना पानी, अदरक, तुलसी या हल्दी वाली चाय और भी बेहतर काम करती है। अदरक का जिंजराइल तत्व सूजन कम करता है, जबकि हल्दी और तुलसी एंटी इम्प्लीमेंट्री गुणों से भरपूर होती है। इनका सेवन किया जा सकता है।

पानी और शरीर को हाइड्रेशन बनाए रखें

सबसे आसान और प्रभावी उपाय है कि पर्याप्त पानी पीते रहें। दिन में 8 से 10 ग्लास पानी शरीर को हाइड्रेट रखता है, जिससे नाक और गले की झिल्लियां नम्र रहती हैं और पराकण आसानी से बाहर निकल जाते हैं। डिहाइड्रेशन होने पर, हिस्टामिन का स्तर बढ़ जाता है, जो एलर्जी के मुख्य रसायन है। गुनगुना पानी, अदरक, तुलसी या हल्दी वाली चाय और भी बेहतर काम करती है। अदरक का जिंजराइल तत्व सूजन कम करता है, जबकि हल्दी और तुलसी एंटी इम्प्लीमेंट्री गुणों से भरपूर होती है। इनका सेवन किया जा सकता है।

प्राकृतिक एंटी हिस्टामिन

विटामिन सी हिस्टामिन को तोड़ने में मदद करता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत कर एलर्जी के लक्षणों को कम करने में मददगार है। आंवला विटामिन सी का सबसे शक्तिशाली स्रोत है। एक आंवले में संतरे से तीस गुना ज्यादा विटामिन सी होता है। इसके लिए इसके अतिरिक्त नींबू कीवी, शिमला मिर्च, टमाटर और ब्रोकली को आहार में शामिल किया जा सकता है।

ओमेगा-3 और प्रोबायोटिक्स

शोध बताते हैं कि बचपन से उमेगा, थ्री लेने वाले बच्चों में एलर्जी और अस्थमा का जोखिम कम होता है। सरकारी स्रोतों में अखरोट, अर्शी के बीज और सरसों का तेल प्रमुख है। वहीं रोबार्टिक्स आंत को स्वस्थ रखते हैं जहां इम्यून सिस्टम का बड़ा हिस्सा मौजूद होता है, दही छाज जैसे फॉर्मेटेड फ्रूट्स। इसमें शामिल हैं।

शहद का सेवन होता है मददगार

स्थानीय शहद में आस-पास के पौधों के सूक्ष्म पराक्रम होते हैं। ऐसे में रोज थोड़ी मात्रा में शहद लेने से शरीर धीरे-धीरे इन पराक्रमों के प्रति अभ्यस्त हो जाता है। इमदलाजी में इसे डी सेस्टाइजेशन कहा जाता है। जो एलर्जी इमोथैरिटी के समान सिद्धांत पर आधारित है, मगर एक वर्ष कम उम्र के बच्चों को शहद न दें।

कैसे हो बचाव एलर्जी से

एलर्जी के दौरान कुछ खाद्यपदार्थ लक्षणों को बढ़ाते हैं, जैसे शराब और रेड पाइन, वहीं बहुत मसालेदार और पैकेज्ड प्रोसेस्ड भोजन शरीर में सूजन बढ़ाते हैं। ज्यादा चाय काफी लेने से डिहाइड्रेशन हो सकता है। ठंडे पेयसक्रीम तथा उच्च कच्चे फल सब्जियाँ भी एलर्जी के लक्षणों को उभार सकती हैं। इसलिए लक्षणों के गंभीर होने से पहले ही मेडिकल ऑफिसर डॉ दिव्यांशु सेंगर ने बताया कि समय पर डॉक्टर से सलाह लें और इस मौसम में होने वाली एलर्जी से अपने को सुरक्षित रखें।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts