सीलिंग के खिलाफ महिलाओं का धरना जारी 

 चौथे  दिन महिलाओं ने पढी हनुमान चालीसा 

 बोली  हनुमान जी आवास विकास की बुद्धि सही करें

मेरठ। शास्त्री नगर के  सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के सीलिंग अभियान और 859 आवासीय भूखंडों में सेटबैक छोड़ने के आदेश के खिलाफ चौथे दिन भी विरोध जारी रहा। व्यापारी और स्थानीय निवासी बड़ी संख्या में मार्केट में टेंट लगाकर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक आदेश में संशोधन नहीं होता, वे यहीं डटे रहेंगे।

रविवार को व्यापारियों ने परिवार सहित हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया है। महिलाओं का कहना है कि संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरे हनुमत बलवीरा। सरकार और आवास विकास से हमारी सुनवाई नहीं हो रही तो अब बजरंग बली ही हमारी सुरक्षा करें। आवास विकास की बुद्धि सही करें।

32°C तापमान में बच्चों का विरोध

सेंट्रल मार्केट में 32 डिग्री तापमान में छोटे बच्चे भी हाथों में पलायन के पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। पोस्टर पर लिखा है कि प्रधानमंत्री हमारी गुहार सुनें और हमारे बाजार को, हमारी दुकानें, हमारे स्कूल को बचा लें। हमें हमारा पुराना सेंट्रल मार्केट वापस कर दें।



मेन खरीदारी के दिन भी बाजार ठप

रविवार को मार्केट का मुख्य दिन होता है। ऐसे में आज सेंट्रल मार्केट की आधा से ज्यादा दुकानें बंद हैं। जो कुछ दुकानें खुली भी हैं उन पर ग्राहक नहीं हैं। व्यापारी वहीं जगह-जगह धरने पर बैठ गए हैं। व्यापारियों के परिवारों ने वहां पलायन के पोस्टर लगाए हैं और सरकार से रहम की गुहार कर रहे हैं।


अभी भी समाधान की आशा की किरण दिख रही है- राज्य सभा सांसद 

 सेंट्रल मार्केट में व्यापारियों के बीच न जाने की राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने सफाई दी है। उन्होंने कहा- सेंट्रल मार्केट में व्यापारियों के बीच आपसी बंटवारा है, जिसके चलते वे वहां नहीं गए।उन्होंने कहा- जब पहले टावर को ध्वस्त करने की बात चल रही थी, तब कुछ लोगों ने दावा किया था कि बाकी दुकानों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। इस बयान को लेकर व्यापारियों और जन प्रतिनिधियों के बीच विवाद भी देखने को मिला है।

उन्होंने कहा- अभी भी समाधान की आशा की किरण दिख रही है। व्यापारियों को 2 महीने का समय मिल गया है, और इस दौरान जनता की ओर से सरकार और सुप्रीम कोर्ट से अपील की जाएगी।जन प्रतिनिधियों के वहां न पहुंचने और इसे लेकर हो रही राजनीति पर डॉ. बाजपेयी ने विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी के घर में दुख होने पर वहां राजनीति करना गलत है। उन्होंने कहा- वे व्यापारियों का समर्थन करने जा सकते हैं, लेकिन वहां राजनीति करने का इरादा नहीं है और ऐसा करना उचित भी नहीं है।

सीलिंग को खौफ 

 एल ब्लॉक से एक ब्लॉक तक 

  सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आवास विकास द्वारा 44 भूखंडों पर की गयी सीलिंग की कार्रवाई  खौफ शास्त्री नगर के एल ब्लॉक से एल ब्लॉक तक साफ दिखाई देने लगा है। आवसीय भूखंडों पर व्यवसायिक इस्तेमाल करने वाले दुकानदारों ने कार्रवाई से बचने के लिए किराए पर दी गयी दुकानों को खाली कराना आरंभ कर दिया है। जिन आवासीय मकानों को व्यवसायिक उपयोग हो रहा है। उन्होंने उसे रिहायशी करना शुरू कर दिया है। 

 सील का असर जाग्रति विहार में भी दिख रहा 

  आवास विकास द्वारा कोर्ट के आदेश पर की गयी सीलिंग कार्रवाई का असर शास्त्री नगर के बाद दूसरी काॅलोनी जााग्रति विहार में दिखाई दे रहा है। दुकानदारों ने अपनी दुकानों के शटर को तोड़कर उसे आवासीय रूप देना आरंभ कर दिया है। वही आवासीय भूखंडाें में खडे हुए व्यवसायिक में सैट बैक के नियम के अनुसार बनाना आरंभ कर दिया है। दरअसल आवास विकास ने जाग्रति विहार मेंं दुकानदाराों काे नोटिस पहले से जारी कर रखे है। लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं की गयी थी। 

 ये है मामला 

दरअसल, 9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने 859 संपत्तियों पर बने अवैध सेटबैक को दो महीने के भीतर तोड़ने का आदेश दिया। अवैध सेटबैक यानी इमारत के चारों ओर छोड़ी जाने वाली अनिवार्य खाली जगह में किया गया निर्माण। कोर्ट ने यूपी के अधिकारियों को फटकार लगाई। कहा- स्कूलों, अस्पतालों और यहां तक कि सरकारी बैंकों को भी ऐसी इमारतों से चलाने की इजाजत कैसे दी, जो पूरी तरह से अवैध और बिना इजाजत हैं। मामले में 6 अप्रैल को कोर्ट ने 859 संपत्तियों में से सेंट्रल मार्केट की 44 संपत्तियों को सील करने का आदेश दिया था और रिपोर्ट मांगी थी।

क्यों सेंट्रल मार्केट पर एक्शन हो रहा

साल-1990 की बात है। मेरठ में आवास-विकास को सूचना मिली कि आवासीय भूखंड पर कॉम्प्लेक्स का निर्माण सेंट्रल मार्केट में किया जा रहा है। अधीक्षण अभियंता अरविंद कुमार भूखंड संख्या 661/6 पर पहुंचे। उन्होंने लेंटर कार्य रुकवाने का प्रयास किया।इस पर स्थानीय व्यापारियों ने हंगामा खड़ा कर दिया। बात इतनी बढ़ गई कि व्यापारियों ने अधीक्षण अभियंता को थप्पड़ मार दिया। इस मामले में नौचंदी थाने में FIR दर्ज हुई। इसके बाद आवास विकास ने कई बार अवैध कॉम्प्लेक्स को गिराना चाहा, लेकिन कुछ न कुछ अड़चन आ गई।ऐसे में आवास-विकास ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दायर की। साल-2014 में हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि 2 महीने में ये अवैध इमारत गिराई जाए। व्यापारियों ने इस आदेश को चुनौती दी और सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए।

करीब 10 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर, 2025 को कॉम्प्लेक्स नंबर 661/6 सहित सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश दिया। 25 अक्टूबर, 2025 को 22 दुकानों वाले इस कॉम्प्लेक्स को ढहा दिया गया था।

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