'आप' की राघव चड्ढा पर गिरी गाज

 राज्यसभा के उपनेता पद से छुट्टी, अशोक मित्तल संभालेंगे कमान 

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर मची अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। गुरुवार को एक चौंकाने वाले फैसले में पार्टी ने अपने युवा और प्रखर चेहरे राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटा दिया है। उनकी जगह पंजाब के उद्यमी और राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

पार्टी की ओर से राज्यसभा सचिवालय को भेजे गए आधिकारिक पत्र ने इस कार्रवाई को और भी सख्त बना दिया है, जिसमें कहा गया है कि अब सदन मंस राघव चड्ढा को पार्टी की ओर से बोलने का समय न आवंटित किया जाए। हालांकि आम आदमी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इस बदलाव का कोई विशेष कारण नहीं बताया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राघव चड्ढा ने पिछले कुछ समय से पार्टी और नेतृत्व से दूरी बना रखी थी।

चुप्पी पर सवाल: मुद्दों का टकराव 

दिल्ली शराब नीति मामले में जब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को निचली अदालत से राहत मिली, तब भी राघव की ओर से कोई सार्वजनिक बयान या प्रतिक्रिया नहीं आई। राज्यसभा में पार्टी के कोर एजेंडे के बजाय राघव गिग वर्कर्स और स्कूल फीस जैसे व्यक्तिगत विषयों को उठा रहे थे, जिसे नेतृत्व के प्रति उनकी उदासीनता के रूप में देखा जा रहा था।

कौन हैं अशोक मित्तल? जिन्हें मिली नई जिम्मेदारी

राघव चड्ढा की जगह लेने वाले अशोक मित्तल पंजाब के एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और उद्यमी हैं। मित्तल देश की प्रसिद्ध एलपीयू यूनिवर्सिटी के संस्थापक और चांसलर हैं। उनका परिवार 'लवली ग्रुप' का मालिक है, जो ऑटोमोबाइल और उत्तर भारत की मशहूर 'लवली स्वीट्स' के लिए जाना जाता है। जालंधर के रहने वाले अशोक मित्तल 2022 में पंजाब से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। उनकी नियुक्ति को पार्टी द्वारा पंजाब के औद्योगिक और शिक्षित वर्ग को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

2028 तक है कार्यकाल, फिर भी बढ़ा तनाव

राघव चड्ढा 2022 में पंजाब से राज्यसभा पहुंचे थे और उनका कार्यकाल 2028 तक है। पार्टी के 'पोस्टर बॉय' माने जाने वाले राघव का अचानक इस तरह हाशिए पर जाना कई सवाल खड़े करता है। जानकारों का मानना है कि बोलने के समय की कटौती वाला निर्देश यह संकेत देता है कि पार्टी अब उन्हें संसद में अपना आधिकारिक पक्ष रखने का मौका नहीं देना चाहती।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

विपक्ष ने इस बदलाव को 'आप' के भीतर बढ़ते अविश्वास का परिणाम बताया है। वहीं, पार्टी के भीतर दबी जुबान में चर्चा है कि यह संगठनात्मक बदलाव भविष्य की नई रणनीति का हिस्सा है। अब देखना यह होगा कि राघव चड्ढा इस कार्रवाई पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और संसद के आगामी सत्र में उनकी भूमिका क्या रहती है।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts